11 अगस्त 2026
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सुंदरबन की रॉयल बंगाल बाघिन की झारखाली रेस्क्यू सेंटर में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

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सुंदरबन की रॉयल बंगाल बाघिन की झारखाली रेस्क्यू सेंटर में मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

सारांश

सुंदरबन के चुल्काटी जंगल से दिसंबर 2024 में बचाई गई और अलीपुर चिड़ियाघर में चार महीने इलाज के बाद झारखाली लौटी 13 वर्षीय रॉयल बंगाल बाघिन की सोमवार को मौत हो गई। वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

मुख्य बातें

झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर , दक्षिण 24 परगना में लगभग 13 वर्षीय रॉयल बंगाल बाघिन की सोमवार को मौत हो गई।
बाघिन को दिसंबर 2024 में सुंदरबन के चुल्काटी जंगल से गंभीर रूप से बीमार अवस्था में बचाया गया था।
कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में लगभग चार महीने इलाज के बाद मार्च 2025 में उसे झारखाली वापस लाया गया था।
सोमवार सुबह बुखार और सुस्ती के लक्षण मिले; तत्काल उपचार के बावजूद बाघिन को बचाया नहीं जा सका।
मौत का सटीक कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम किया गया; DFO निशा गोस्वामी ने रिपोर्ट का इंतजार होने की पुष्टि की।

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर में लगभग 13 वर्षीय एक रॉयल बंगाल बाघिन की सोमवार को मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार, 11 अगस्त को इसकी पुष्टि की। बाघिन को इलाज के दौरान बचाया नहीं जा सका और मौत का सटीक कारण जानने के लिए उसका पोस्टमार्टम किया जा चुका है।

बाघिन का बचाव और इलाज

दिसंबर 2024 में सुंदरबन के चुल्काटी जंगल में बाघिन को गंभीर रूप से बीमार अवस्था में पाया गया था। कई दिनों तक वह जंगल में लड़खड़ाते हुए घूमती रही — सामान्य रूप से चलने में भी उसे कठिनाई हो रही थी। वन कर्मियों के ध्यान में आते ही बचाव अभियान शुरू किया गया और अंततः पिंजरे की सहायता से उसे सुरक्षित निकाला गया। बचाए जाने के समय उसकी शारीरिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी।

कोलकाता में चार महीने का उपचार

स्थानीय स्तर पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा न होने के कारण बाघिन को कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर भेजा गया, जहाँ डॉक्टरों और वन्यजीव विशेषज्ञों की देखरेख में लगभग चार महीने तक उसका उपचार चला। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार आया और मार्च 2025 तक उसे वापस झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया।

अंतिम दिनों में स्थिति का बिगड़ना

वन विभाग के अनुसार, झारखाली लौटने के बाद बाघिन की हालत स्थिर थी और उस पर निरंतर नजर रखी जा रही थी। सोमवार की सुबह वन कर्मियों ने देखा कि वह असामान्य रूप से सुस्त थी और ठीक से हिल-डुल नहीं रही थी। जाँच में बुखार की पुष्टि हुई। तत्काल दवाएँ और देखभाल शुरू की गई, किंतु बाघिन ने उपचार पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और इलाज के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

साउथ 24 परगना फॉरेस्ट डिवीजन की डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) निशा गोस्वामी ने कहा, 'इस बाघिन को दिसंबर 2024 में चुल्काटी के जंगल से बहुत बीमार हालत में बचाया गया था। इलाज के बाद वह झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर में ठीक हो रही थी। सोमवार सुबह वह बीमार पड़ गई। इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। मौत की सही वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम किया गया है।'

आगे क्या

वन विभाग अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिससे मौत का सटीक कारण स्पष्ट होगा। यह घटना सुंदरबन के बाघ संरक्षण प्रयासों की चुनौतियों को एक बार फिर रेखांकित करती है — जहाँ बचाए गए वन्यजीवों की दीर्घकालिक देखभाल और पुनर्वास एक जटिल प्रक्रिया बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

महीनों इलाज करने और स्थिर करने के बाद भी उसे नहीं बचाया जा सका, जो यह सवाल उठाता है कि क्या मौजूदा रेस्क्यू-टू-रिहैबिलिटेशन प्रोटोकॉल पुराने या गंभीर रूप से बीमार बाघों के लिए पर्याप्त है। सुंदरबन में मानव-बाघ संघर्ष और आवास क्षरण के बीच बचाव अभियानों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन दीर्घकालिक देखभाल के लिए संसाधन और विशेषज्ञता अभी भी अपर्याप्त नज़र आती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट केवल इस एक मामले का नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली का मूल्यांकन करने का अवसर है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर में किस बाघिन की मौत हुई?
सुंदरबन के चुल्काटी जंगल से दिसंबर 2024 में बचाई गई लगभग 13 वर्षीय एक रॉयल बंगाल बाघिन की मौत हुई। वह अलीपुर चिड़ियाघर में चार महीने के इलाज के बाद मार्च 2025 में झारखाली लौटी थी।
बाघिन की मौत का कारण क्या था?
मौत का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। सोमवार सुबह बाघिन में बुखार और असामान्य सुस्ती के लक्षण देखे गए। तत्काल उपचार के बावजूद वह नहीं बची और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
इस बाघिन को पहले कब और कहाँ से बचाया गया था?
बाघिन को दिसंबर 2024 में सुंदरबन के चुल्काटी जंगल से बचाया गया था, जब वह कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार अवस्था में जंगल में घूम रही थी और सामान्य रूप से चलने में भी असमर्थ थी।
झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर कहाँ स्थित है?
झारखाली टाइगर रेस्क्यू सेंटर पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सुंदरबन क्षेत्र में स्थित है। यह केंद्र घायल या बीमार वन्यजीवों के पुनर्वास के लिए उपयोग किया जाता है।
आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
साउथ 24 परगना फॉरेस्ट डिवीजन पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिससे मौत का सटीक कारण सामने आएगा। DFO निशा गोस्वामी ने पुष्टि की है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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