बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में जिराफ 'शिवानी' की मौत, 'सीकल टॉर्शन' से तीन दिन में हारी जंग

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बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में जिराफ 'शिवानी' की मौत, 'सीकल टॉर्शन' से तीन दिन में हारी जंग

सारांश

बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में जिराफ 'शिवानी' की मौत महज एक हादसा नहीं — यह उस लंबे सिलसिले की अगली कड़ी है जिसमें बाघ शावक, जेब्रा, तेंदुए और हिरण अपनी जान गँवा चुके हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन सिर्फ पोस्टमॉर्टम रिपोर्टों तक सीमित रहेगा, या कैद में रखे जानवरों की देखभाल में बुनियादी सुधार होंगे।

मुख्य बातें

जिराफ 'शिवानी' की मौत 7 मई 2026 को बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क, बेंगलुरु में हुई।
मौत का कारण 'सीकल टॉर्शन' — आंत के मुड़ने की गंभीर स्थिति — पाई गई।
शिवानी तीन साल दस महीने की मादा जिराफ थी, जिसे 2024 में मैसूर चिड़ियाघर से लाया गया था।
अंगों के नमूने आगे की जाँच के लिए 'इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड वेटरिनरी बायोलॉजिकल्स लैबोरेटरी' भेजे गए।
जुलाई 2025 से अब तक पार्क में बाघ शावक, जेब्रा और तेंदुए सहित कई जानवरों की मौत हो चुकी है।
वन्यजीव कार्यकर्ता लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि प्रशासन ने हर संभव प्रयास का दावा किया है।

बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में गुरुवार, 7 मई को शिवानी नाम की एक मादा जिराफ की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, जिराफ 'सीकल टॉर्शन' नामक आंतों की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी, जिसमें आंत का एक हिस्सा मुड़ जाता है। लगातार तीन दिनों तक पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा इलाज के बावजूद शिवानी को नहीं बचाया जा सका।

शिवानी की स्थिति और इलाज

शिवानी तीन साल और दस महीने की मादा जिराफ थी, जिसे 2024 में मैसूर चिड़ियाघर से बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क स्थानांतरित किया गया था। कथित तौर पर उसने पिछले तीन दिनों से खाना-पीना बंद कर दिया था, जिसके बाद पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम को उसकी देखरेख में लगाया गया। अधिकारियों ने बताया कि तमाम चिकित्सीय प्रयासों के बावजूद गुरुवार सुबह करीब 11 बजे शिवानी की मृत्यु हो गई।

पोस्टमॉर्टम और जाँच

शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक मौत का कारण 'सीकल टॉर्शन' पाया गया — एक ऐसी स्थिति जिसमें आंत का एक हिस्सा मुड़कर रक्त प्रवाह और पाचन क्रिया को बाधित कर देता है। अधिकारियों ने बताया कि जिराफ के अंदरूनी अंगों के नमूने ले लिए गए हैं और उन्हें आगे की जाँच के लिए 'इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड वेटरिनरी बायोलॉजिकल्स लैबोरेटरी' भेजा गया है।

पार्क में पशु मौतों का सिलसिला

यह ऐसे समय में आया है जब बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क हाल के वर्षों में कई पशु मौतों को लेकर सवालों के घेरे में है। जुलाई 2025 में तीन नवजात बाघ शावकों की मौत हुई, जिन्हें उनकी माँ ने छोड़ दिया था। उसी दौरान एक गर्भवती जेब्रा की मौत की खबर भी सामने आई, जिसे कथित तौर पर कर्मचारियों की लापरवाही से जोड़ा गया। जून 2025 में एक दुर्घटना के बाद 'कैप्चर मायोपैथी' के कारण तीन साल के एक जेब्रा की मौत पर जाँच शुरू की गई, और नवंबर 2025 में फेफड़ों के फेल होने से एक नर तेंदुए की भी मौत हुई।

गौरतलब है कि सितंबर 2023 में 'फेलिन पैनल्यूकोपेनिया वायरस' के कारण तेंदुए के सात बच्चों की मौत हो गई थी। उसी वर्ष हिरणों के एक झुंड को स्थानांतरित करने के बाद बैक्टीरियल संक्रमण से दो दिनों के भीतर 15 से अधिक हिरणों की जान चली गई थी।

वन्यजीव कार्यकर्ताओं की चिंताएँ

वन्यजीव कार्यकर्ता इन मौतों के लिए लापरवाही और अपर्याप्त प्रबंधन को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। हालाँकि, चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने जानवरों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए। आलोचकों का कहना है कि बार-बार हो रही मौतें कैद में रखे गए जानवरों की देखभाल के तरीकों पर गहरी जाँच की माँग करती हैं।

बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क के बारे में

बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क — जिसे बन्नेरघट्टा चिड़ियाघर के नाम से भी जाना जाता है — बेंगलुरु में स्थित एक प्रमुख प्राणी उद्यान है। इसकी स्थापना 1974 में बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान के भीतर एक छोटे चिड़ियाघर के रूप में हुई थी। 2002 में बायोलॉजिकल पार्क और राष्ट्रीय उद्यान को अलग किया गया। वर्तमान में यह 731.88 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें एक चिड़ियाघर, सफारी पार्क, बटरफ्लाई पार्क और रेस्क्यू सेंटर शामिल हैं। पार्क में जानवरों की सुरक्षा और प्रबंधन की समीक्षा आने वाले दिनों में और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में पिछले तीन वर्षों में हुई मौतों की फेहरिस्त देखें तो यह एक गहरी प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करती है। बाघ शावक, जेब्रा, तेंदुए, हिरण — और अब जिराफ — हर बार पोस्टमॉर्टम होता है, सैंपल भेजे जाते हैं, और मामला ठंडा पड़ जाता है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार और वन विभाग केवल प्रतिक्रियात्मक जाँच तक सीमित रहेंगे, या कैद में रखे जानवरों की देखभाल के लिए एक स्वतंत्र, नियमित ऑडिट तंत्र स्थापित करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएँगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिराफ 'शिवानी' की मौत कैसे हुई?
शिवानी की मौत 'सीकल टॉर्शन' नामक आंतों की बीमारी से हुई, जिसमें आंत का एक हिस्सा मुड़ जाता है। वह पिछले तीन दिनों से खाना-पीना छोड़ चुकी थी और पशु चिकित्सकों की टीम के इलाज के बावजूद 7 मई 2026 को सुबह करीब 11 बजे उसकी मृत्यु हो गई।
शिवानी को बन्नेरघट्टा पार्क में कब लाया गया था?
शिवानी को 2024 में मैसूर चिड़ियाघर से बन्नेरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क स्थानांतरित किया गया था। वह तीन साल और दस महीने की मादा जिराफ थी।
बन्नेरघट्टा पार्क में हाल के वर्षों में और कौन-कौन से जानवरों की मौत हुई है?
जुलाई 2025 में तीन नवजात बाघ शावक और एक गर्भवती जेब्रा की मौत हुई। जून 2025 में 'कैप्चर मायोपैथी' से एक जेब्रा और नवंबर 2025 में फेफड़े फेल होने से एक नर तेंदुए की मौत हुई। सितंबर 2023 में 'फेलिन पैनल्यूकोपेनिया वायरस' से तेंदुए के सात बच्चे और बैक्टीरियल संक्रमण से 15 से अधिक हिरण मारे गए थे।
शिवानी की मौत के बाद आगे क्या जाँच होगी?
अधिकारियों ने शिवानी के अंदरूनी अंगों के नमूने 'इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड वेटरिनरी बायोलॉजिकल्स लैबोरेटरी' को भेजे हैं। इन नमूनों की जाँच से मौत के अंतिम कारणों की पुष्टि होगी।
वन्यजीव कार्यकर्ता बन्नेरघट्टा पार्क पर क्या आरोप लगा रहे हैं?
वन्यजीव कार्यकर्ता बार-बार हो रही पशु मौतों के लिए लापरवाही और अपर्याप्त प्रबंधन को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। हालाँकि चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि हर बार जानवरों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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