कर्नाटक में दरियाई घोड़े के हमले की त्रासदी: पशु चिकित्सक के परिवार ने लापरवाही का आरोप लगाया

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कर्नाटक में दरियाई घोड़े के हमले की त्रासदी: पशु चिकित्सक के परिवार ने लापरवाही का आरोप लगाया

सारांश

शिवमोग्गा में दरियाई घोड़े के हमले में जान गंवाने वाली पशु चिकित्सक के परिवार ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने पशु चिकित्सा क्षेत्र में सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।

Key Takeaways

  • सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जान का जोखिम बढ़ता है।
  • जंगली जानवरों के साथ काम करते समय बुनियादी सावधानी बरतनी चाहिए।
  • युवाओं में पशु कल्याण के प्रति जुनून बढ़ रहा है।
  • परिवार ने अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
  • पुलिस जांच जारी है।

बेंगलुरु, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शिवमोग्गा में एक गर्भवती दरियाई घोड़े का उपचार करते समय जान गंवाने वाली युवा पशु चिकित्सक के परिवार ने अधिकारियों पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है और इस दुखद घटना के संदर्भ में उचित कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. समीशा रेड्डी (27) की 20 मार्च को शिवमोग्गा के त्यावरेकोप्पा टाइगर एंड लायन सफारी में दरियाई घोड़े के हमले में जान चली गई।

शनिवार को मीडिया से बातचीत में, डॉ. रेड्डी के चाचा नवीन ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की अपील की।

उन्होंने बताया कि उन्हें सफारी तक पहुंचाने के लिए एक वाहन उपलब्ध कराया गया था और छात्रावास वार्डन ने उनके साथ दो अन्य लड़कियों को भेजा था। इसके बाद एक गार्ड ने उन्हें दरियाई घोड़े की जांच के लिए बाड़े के अंदर ले जाने का निर्णय लिया।

नवीन ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को एक खतरनाक जंगली जानवर के साथ कार्य करते समय बुनियादी सुरक्षा सावधानियों का पालन करना चाहिए था।

उन्होंने बताया कि शेर जैसे शिकारी जानवर भी दरियाई घोड़ों से दूरी बनाए रखते हैं और अधिकारियों की आलोचना की कि उन्होंने प्रशिक्षु को जानवर के इतना करीब जाने दिया।

नवीन ने आगे कहा कि दरियाई घोड़ा एक हफ्ते में बच्चे को जन्म देने वाला था, जिससे उसकी संवेदनशीलता और भी बढ़ जाती है और अचानक हमले का जोखिम बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा, “कम से कम एक सुरक्षित दूरी तो बनाए रखनी चाहिए थी। वे उसे इतनी लापरवाही से बाड़े के अंदर कैसे जाने दे सकते थे?”

इस घटना को अधिकारियों की 'घोर लापरवाही' बताते हुए उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

समीशा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने समीशा को एक दयालु और मेधावी छात्रा बताया जो पशु कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित थी। सुखमय जीवन के साधन होते हुए भी, उन्होंने व्यावसायिक हितों के बजाय सेवा को चुना।

उन्होंने कहा कि समीशा को बचपन से ही पशुओं की सहायता करने का गहरा जुनून था और वह अक्सर बेंगलुरु के पशु चिकित्सकों के साथ मिलकर आवारा पशुओं की समस्याओं का समाधान करती थीं।

उन्होंने बताया कि उन्हें विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सुझाव भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने भारत में रहकर सेवा करने का विकल्प चुना। वह पशुओं के प्रति अत्यंत दयालु थीं। मैंने उनके जैसी किसी को नहीं देखा। पुलिस और वन अधिकारी अपनी जांच जारी रखे हुए हैं।

Point of View

बल्कि यह जंगली जानवरों के साथ काम करने के दौरान सुरक्षा मानकों की आवश्यकता को भी उजागर करती है। यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे तुरंत संबोधित करने की आवश्यकता है।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

यह घटना कब हुई?
यह घटना 20 मार्च को शिवमोग्गा के त्यावरेकोप्पा टाइगर एंड लायन सफारी में हुई।
डॉ. समीशा रेड्डी की उम्र क्या थी?
डॉ. समीशा रेड्डी की उम्र 27 वर्ष थी।
परिवार ने अधिकारियों पर क्या आरोप लगाया?
परिवार ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है और कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना के बाद क्या हो रहा है?
पुलिस और वन अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं।
डॉ. समीशा की विशेषताएँ क्या थीं?
डॉ. समीशा एक दयालु और मेधावी छात्रा थीं, जो पशु कल्याण के प्रति समर्पित थीं।
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