यूसीसी पर ओवैसी का हमला: 'गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना है समान नागरिक संहिता'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 14 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर घोषणा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा कि यूसीसी दरअसल गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने का एक माध्यम है, न कि समानता लाने का प्रयास।
ओवैसी की मुख्य दलीलें
ओवैसी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भाजपा ने खुद ही एक विधि आयोग नियुक्त किया था, जिसने कहा था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछित। इस देश की आत्मा इसकी विविधता में है। यूसीसी का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा।' उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता को समानता के नाम पर पेश किया जा रहा है, लेकिन इसका असली उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना है।
भाजपा के सहयोगियों और 'लव जिहाद' कानूनों पर निशाना
ओवैसी ने यह भी कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी दलों के लिए अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ दिखाने का समय है — कि वे 'छोटी भाजपा' नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित 'लव जिहाद' कानूनों को केवल ईसाइयों और मुसलमानों के विरुद्ध लागू किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह विडंबना है कि भाजपा यूसीसी चाहती है, जबकि उसके ही राज्य अशांत क्षेत्र अधिनियम जैसे कानून पारित करते हैं, जो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संपत्ति की बिक्री पर रोक लगाते हैं।
सीएए, एनआरसी और एसआईआर का संदर्भ
ओवैसी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का उल्लेख करते हुए कहा कि 2019 में हुए सीएए-विरोधी आंदोलन के पीछे गृह मंत्री अमित शाह का 'गलत अहंकार और क्रोनोलॉजी' ज़िम्मेदार था। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय स्वयं प्रधानमंत्री को कहना पड़ा था कि कोई एनआरसी नहीं होने वाला।
ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का भी उल्लेख किया और कहा कि इसमें आम लोगों को कागज़ात के साथ सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति-जनजाति और प्रवासी मज़दूरों को सबसे अधिक परेशानी हुई है। उनके अनुसार, 'एनआरसी इससे 100 गुना अधिक बुरा होगा।'
80 करोड़ राशन-निर्भर लोगों का हवाला
ओवैसी ने अपनी बात को व्यापक सामाजिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि जिस देश में 80 करोड़ लोग खाने के लिए सरकारी राशन पर निर्भर हैं, वहाँ उनसे नागरिकता के कागज़ात ढूंढने की माँग करना अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने असम एनआरसी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह प्रक्रिया कितनी 'विनाशकारी' रही, यह पहले ही देखा जा चुका है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यूसीसी पर बहस लंबे समय से भारतीय राजनीति में एक संवेदनशील विषय रही है। उत्तराखंड पहला राज्य बना था जिसने यूसीसी लागू की, और केंद्र में भाजपा सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में संकेत देती रही है। ओवैसी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब गृह मंत्री अमित शाह ने यूसीसी को लेकर एक नई घोषणा की है, जिसने विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक समूहों में नई बहस छेड़ दी है। आगे यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि भाजपा के सहयोगी दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।