बांग्लादेश में खसरे का कहर: रोज़ाना 4 बच्चों की मौत, 40 लाख बच्चे टीके से वंचित
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आँकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले तीन हफ्तों में प्रतिदिन औसतन 1,005 संदिग्ध और पुष्ट खसरा मामले सामने आए, 821 मरीज़ अस्पताल में भर्ती किए गए और रोज़ाना करीब 4 बच्चों की मौत दर्ज हुई। 15 मार्च से अब तक पुष्ट और संदिग्ध श्रेणी में कुल 797 मासूमों की जान जा चुकी है।
वैक्सीनेशन गैप: संकट की जड़
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकोप के पीछे सबसे बड़ी वजह 'वैक्सीनेशन गैप' है। खसरा-रूबेला और विटामिन-ए अभियानों के बीच लगभग 40 लाख बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए। इसके अलावा, अभियान के निर्धारित आयु वर्ग से बाहर के बच्चों में संक्रमण फैलना और संक्रमण रोकथाम उपायों की कमज़ोरी भी प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
खसरा और रूबेला उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय सत्यापन समिति के अध्यक्ष महमूदुर रहमान ने कहा, 'स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन टीकाकरण अभियान के दो महीने बाद भी यह अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ऐसा लगता है कि अधिकारी इस स्थिति को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।'
अस्पतालों में भर्ती अधिकांश बच्चे बिना टीके के
डीएनसीसी डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी आसिफ हैदर ने बताया कि वर्तमान में भर्ती खसरे के 80 से 90 प्रतिशत मरीज़ों का टीकाकरण नहीं हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि रविवार तक 24 घंटे में भर्ती 74 खसरा मरीज़ों में से केवल 5 को ही टीका लगाया गया था।
गौरतलब है कि यह अस्पताल मार्च के मध्य से खसरे के मरीज़ों के लिए विशेष उपचार उपलब्ध करा रहा है। खसरे से पीड़ित 7 बच्चों के परिजनों से मिली जानकारी में सामने आया कि इनमें से 6 बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगाया गया था।
विशेषज्ञों की चेतावनी
DGHS के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ बे-नज़ीर अहमद ने 40 लाख बच्चों के इस अंतर को 'चौंकाने वाला' बताया और कहा कि यह बेहद कम टीकाकरण लक्ष्य की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, 'अगर लक्ष्य ही सही नहीं था, तो ऐसा परिणाम आना स्वाभाविक था।'
अहमद के अनुसार, अपर्याप्त योजना और सीमित जन-जागरूकता अभियान ने खसरा टीकाकरण कार्यक्रम को गंभीर रूप से प्रभावित किया। कई परिवार संशोधित टीकाकरण कार्यक्रम से अनजान रह गए, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बच्चे असुरक्षित रह गए।
सरकार के दावे और ज़मीनी हकीकत
सरकार ने दावा किया है कि उसने आपातकालीन खसरा टीकाकरण अभियान का लक्ष्य पार कर लिया है, लेकिन अस्पतालों में अब भी बड़ी संख्या में बिना टीके वाले मरीज़ पहुँच रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही कई सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है और सरकार व आम जनता का ध्यान इस संकट से कुछ हद तक कम होता दिखाई दे रहा है।
DGHS के अनुसार, मंगलवार सुबह 8 बजे IST तक के आँकड़ों में हाल ही में हुई बच्चों की मौतों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक टीकाकरण अभियान की कमियों को दूर नहीं किया जाता, यह प्रकोप और गहरा हो सकता है।