सेबी का 'पंप एंड डंप' घोटाले पर बड़ा प्रहार: 221 संस्थाओं पर प्रतिबंध, मास्टरमाइंड हनीफ शेख 7 साल के लिए बैन, ₹144 करोड़ वापसी का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 1 जुलाई 2026 को शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े 'पंप एंड डंप' घोटालों में से एक का पर्दाफाश करते हुए 221 संस्थाओं को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया। नियामक ने इस कथित औद्योगिक-स्तरीय हेरफेर स्कीम में शामिल पक्षों को ₹143.79 करोड़ की अवैध कमाई अक्टूबर 2020 से 12% वार्षिक ब्याज सहित वापस जमा कराने का भी आदेश दिया है।
घोटाले का मुख्य घटनाक्रम
सेबी के 394 पन्नों के अंतिम आदेश के अनुसार, यह कथित घोटाला 2017 से 2020 के बीच संचालित किया गया। इसमें मौर्या उद्योग, 7एनआर रिटेल, दार्जिलिंग रोपवे कंपनी, जीबीएल इंडस्ट्रीज और विशाल फैब्रिक्स — इन पाँच सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में कृत्रिम तरीके से कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाया गया। सेबी ने व्यक्तिगत निवेशक हनीफ शेख को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड करार दिया है।
जांच के अनुसार, आपस में जुड़े ट्रेडरों ने सिंक्रोनाइज्ड और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए इन कंपनियों के शेयरों में कृत्रिम मांग पैदा की, जिससे कीमतें और ट्रेडिंग गतिविधि तेजी से बढ़ गईं।
एसएमएस अभियान से खुदरा निवेशकों को फँसाया
जब शेयरों की कीमत और तरलता पर्याप्त बढ़ गई, तब नेटवर्क ने बड़े पैमाने पर एसएमएस अभियान चलाकर खुदरा निवेशकों को इन शेयरों को खरीदने के लिए प्रेरित किया। सेबी के अनुसार, हजारों निवेशकों को ऐसे सेंडर आईडी से संदेश भेजे गए जो प्रतिष्ठित ब्रोकरेज कंपनियों जैसे दिखाई देते थे, जिससे निवेशकों ने इन पर भरोसा करके बड़ी संख्या में शेयर खरीदे।
जैसे ही खुदरा निवेशकों की खरीदारी बढ़ी, नेटवर्क से जुड़ी संस्थाओं ने अपने शेयर ऊँची कीमत पर बेचकर भारी मुनाफा कमाया। यह ऐसे समय में आया है जब सेबी डिजिटल माध्यमों से होने वाली बाजार हेरफेर पर अपनी निगरानी और कड़ी कर रहा है।
अवैध कमाई छिपाने की जटिल व्यवस्था
सेबी की जांच में सामने आया कि ₹143.79 करोड़ की अवैध कमाई को कई परतों वाले नेटवर्क के जरिए विभिन्न कंपनियों, फाइनेंसरों और विदेशी मुद्रा कारोबारियों के माध्यम से घुमाया गया, ताकि अंततः यह रकम कंपनी के प्रमोटरों या हनीफ शेख से जुड़े संस्थानों तक पहुँचे और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके।
गौरतलब है कि यही मध्यस्थ संस्थाएं पाँचों कंपनियों के मामलों में बार-बार सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई अलग-अलग घटनाएँ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित शेयर हेरफेर अभियान था।
सेबी की कार्रवाई और दंड
मास्टरमाइंड हनीफ शेख को 7 वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया गया है और उन पर ₹10 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। शेख से जुड़ी 5 संस्थाओं को 6 वर्षों के लिए बाजार से बाहर किया गया है और प्रत्येक पर ₹2 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है।
नेटवर्क में शामिल अन्य प्रतिभागियों को उनकी भूमिका के आधार पर 5 वर्ष तक के प्रतिबंध और ₹5 लाख से ₹1 करोड़ तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित जांच
सेबी ने बताया कि जांच ट्रेडिंग रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल फोन डेटा, व्हाट्सएप चैट, वेबसाइट पंजीकरण विवरण और दूरसंचार कंपनियों, ट्रैवल एजेंसियों तथा वित्तीय संस्थानों से प्राप्त सूचनाओं सहित कई प्रकार के डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों पर आधारित थी। नियामक के अनुसार, इन साक्ष्यों से एसएमएस अभियान चलाने और व्यापक हेरफेर नेटवर्क के संचालन में शेख की भूमिका स्पष्ट रूप से साबित होती है। यह मामला भारतीय पूंजी बाजार में खुदरा निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी की बढ़ती सक्रियता का संकेत है।