1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सेबी ने पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर 12 महीने का बाज़ार प्रतिबंध लगाया, ZEEL पर ₹1.48 करोड़ जुर्माना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेबी ने पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर 12 महीने का बाज़ार प्रतिबंध लगाया, ZEEL पर ₹1.48 करोड़ जुर्माना

सारांश

सेबी ने ZEEL के शीर्ष अधिकारियों पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर 12 महीने का बाज़ार प्रतिबंध लगाया और ₹1.48 करोड़ जुर्माना ठोका। आरोप है कि हैदराबाद की कंपनी संपत्ति को बिना ज़रूरी कॉर्पोरेट मंजूरी के एस्सेल ग्रुप के ₹726 करोड़ के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया।

मुख्य बातें

सेबी ने पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर 12 महीने के लिए प्रतिभूति बाज़ार में कारोबार पर प्रतिबंध लगाया।
ZEEL को 2 महीने के लिए बाज़ार में प्रवेश से रोका गया; तीनों पर कुल ₹1.48 करोड़ जुर्माना।
ZEEL की हैदराबाद स्थित ज़मीन को बिना ऑडिट कमेटी, बोर्ड या शेयरधारकों की मंजूरी के ₹726 करोड़ के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया।
सेबी ने LODR रेगुलेशंस 2015 और PFUTP रेगुलेशंस 2003 के उल्लंघन की पुष्टि की।
सभी पक्षों को 45 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश।

पूंजी बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 1 अगस्त 2026 को ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गोयनका और कंपनी के संस्थापक सुभाष चंद्रा पर 12 महीने के लिए प्रतिभूति बाज़ार में कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही ZEEL को दो महीने के लिए बाज़ार में प्रवेश से रोका गया है और तीनों पर मिलाकर ₹1.48 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

इस प्रकरण की जड़ें वित्त वर्ष 2018-19 के वैधानिक ऑडिट में हैं, जब ZEEL की कुछ अचल संपत्तियों के मूल स्वामित्व दस्तावेज (टाइटल डीड) उपलब्ध नहीं पाए गए। जाँच में सामने आया कि दिसंबर 2016 में एस्सेल ग्रुप की चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) से ₹726 करोड़ का कर्ज लिया था, जिसमें एस्सेल होम प्राइवेट लिमिटेड सह-उधारकर्ता थी।

सेबी की जाँच के अनुसार, इन कंपनियों पर कई कॉर्पोरेट स्तरों के माध्यम से पुनीत गोयनका, सुभाष चंद्रा और उनके परिवार का नियंत्रण था। जब उधार लेने वाली कंपनियाँ आवश्यक सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहीं, तो नवंबर 2018 में IHFL ने अतिरिक्त संपार्श्विक (कोलेटरल) उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया।

हैदराबाद की ज़मीन गिरवी रखने का विवाद

इसके बाद 27 दिसंबर 2018 को ZEEL की ओर से एक 'डिक्लेरेशन एंड एक्नॉलेजमेंट' पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत कंपनी की हैदराबाद स्थित ज़मीन के मूल दस्तावेज IHFL के पास जमा कराए गए। इसका उद्देश्य एस्सेल ग्रुप कंपनियों के कर्जों के लिए उस संपत्ति पर फर्स्ट-रैंकिंग मॉर्टेज बनाना था।

ZEEL ने दावा किया कि इस बंधक के लिए सभी आवश्यक कॉर्पोरेट मंजूरियाँ ली गई थीं। परंतु सेबी की जाँच में ऑडिट कमेटी, निदेशक मंडल या शेयरधारकों की ओर से ऐसी कोई पूर्व मंजूरी का कोई अभिलेख नहीं मिला। उल्लेखनीय है कि बाद में ZEEL ने स्वयं नियामक को बताया कि कंपनी का प्रबंधन और निदेशक मंडल इस बंधक से अनभिज्ञ था और उन्होंने इस लेनदेन को कभी स्वीकृति नहीं दी थी।

सेबी का आदेश और जुर्माना

सेबी के अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी द्वारा जारी अंतिम आदेश के तहत तीनों पर अलग-अलग जुर्माना लगाया गया है — ZEEL पर ₹30 लाख, पुनीत गोयनका पर ₹58 लाख और सुभाष चंद्रा पर ₹60 लाख। नियामक ने निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्ष 45 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करें।

सेबी ने माना कि इन सभी ने लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस, 2015 तथा प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज (PFUTP) रेगुलेशंस, 2003 का उल्लंघन किया। नियामक के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 और 2019-20 के वित्तीय विवरणों के आधार पर यह एक संबंधित पक्ष लेनदेन था, जिसके लिए लागू नियमों के तहत अनिवार्य मंजूरियाँ और प्रकटीकरण (खुलासे) नहीं किए गए।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब ZEEL पहले से ही कई नियामकीय और वित्तीय चुनौतियों से गुज़र रहा है। गौरतलब है कि सेबी ने इससे पहले भी गोयनका और चंद्रा के खिलाफ अन्य मामलों में कार्रवाई की है। प्रतिबंध की अवधि के दौरान दोनों अधिकारी किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय पद नहीं संभाल सकते। ZEEL के शेयरधारकों और निवेशकों पर इस आदेश के दीर्घकालिक प्रभाव की निगरानी बाज़ार विश्लेषक करते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी नियामकीय कार्रवाई में वर्षों लगे — जो सेबी की जाँच गति पर भी सवाल उठाता है। लघु निवेशकों के लिए यह एक और अनुस्मारक है कि प्रमोटर-नियंत्रित कंपनियों में संबंधित पक्ष लेनदेन की पारदर्शिता अभी भी एक अनसुलझी चुनौती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
सेबी ने पाया कि ZEEL की हैदराबाद स्थित ज़मीन को बिना ऑडिट कमेटी, निदेशक मंडल या शेयरधारकों की पूर्व मंजूरी के एस्सेल ग्रुप कंपनियों के ₹726 करोड़ के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया। इससे LODR और PFUTP नियमों का उल्लंघन हुआ, जिसके चलते दोनों अधिकारियों पर 12 महीने का बाज़ार प्रतिबंध लगाया गया।
ZEEL पर सेबी का क्या आदेश है?
ZEEL को 2 महीने के लिए प्रतिभूति बाज़ार में प्रवेश से रोका गया है और उस पर ₹30 लाख का जुर्माना लगाया गया है। पुनीत गोयनका पर ₹58 लाख और सुभाष चंद्रा पर ₹60 लाख जुर्माना है; तीनों को 45 दिनों में राशि जमा करनी होगी।
हैदराबाद ज़मीन गिरवी मामला क्या है?
दिसंबर 2018 में ZEEL ने अपनी हैदराबाद स्थित संपत्ति के मूल दस्तावेज IHFL के पास जमा कराए ताकि एस्सेल ग्रुप कंपनियों के कर्ज पर फर्स्ट-रैंकिंग मॉर्टेज बनाया जा सके। सेबी की जाँच में इस लेनदेन के लिए कोई कॉर्पोरेट मंजूरी का अभिलेख नहीं मिला।
इस मामले की शुरुआत कब और कैसे हुई?
वित्त वर्ष 2018-19 के वैधानिक ऑडिट के दौरान ZEEL की कुछ अचल संपत्तियों के टाइटल डीड अनुपलब्ध पाए गए, जिसने जाँच की शुरुआत की। इसके बाद सेबी ने एस्सेल ग्रुप और ZEEL के बीच के लेनदेन की विस्तृत जाँच की।
प्रतिबंध की अवधि में गोयनका और चंद्रा क्या नहीं कर सकते?
12 महीने के प्रतिबंध के दौरान पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा प्रतिभूति बाज़ार में कोई भी कारोबार नहीं कर सकते। सेबी के आदेश के तहत वे इस अवधि में किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय पद पर भी नहीं रह सकते।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले