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सेबी ने ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को फिर से मंजूरी दी, 1 अगस्त से लागू होगा नया नियम

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सेबी ने ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को फिर से मंजूरी दी, 1 अगस्त से लागू होगा नया नियम

सारांश

सेबी ने 19 जून 2026 की बोर्ड बैठक में ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को वापस लाने का फैसला किया — 1 अगस्त से 60 दिन की सीमा के साथ। साथ ही सोने-चाँदी ETF के लिए नई डायनामिक प्राइस बैंड प्रणाली 1 सितंबर से लागू होगी।

मुख्य बातें

सेबी ने 19 जून 2026 को ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को पुनः मंजूरी दी; नई व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से प्रभावी।
ओपन-मार्केट बायबैक की अधिकतम समय-सीमा 60 दिन निर्धारित की गई है।
पहले यह रूट पारदर्शिता की कमी और असमान शेयरधारक भागीदारी के कारण बंद किया गया था।
सोने और चाँदी के ETF के लिए नई ट्रेडिंग प्रणाली 1 सितंबर 2026 से लागू होगी, जिसमें प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और डायनामिक प्राइस बैंड शामिल हैं।
फिलहाल कंपनियाँ टेंडर ऑफर और ऑड-लॉट बायबैक के जरिए बायबैक कर सकती हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 19 जून 2026 को मुंबई में आयोजित अपनी बोर्ड बैठक में ओपन-मार्केट रूट से शेयर बायबैक को पुनः शुरू करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह नई व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी। इस फैसले से उन कंपनियों को राहत मिलेगी जो सेकेंडरी मार्केट से सीधे और लचीले तरीके से अपने शेयर वापस खरीदना चाहती थीं।

ओपन-मार्केट बायबैक क्यों बंद हुआ था

पारदर्शिता की कमी और सामान्य शेयरधारकों को समान भागीदारी न मिलने की शिकायतों के चलते सेबी ने पहले ओपन-मार्केट बायबैक पर रोक लगाई थी। आलोचकों का कहना था कि इस रूट में सभी निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होती और कंपनियाँ बाज़ार की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बाद कंपनियाँ केवल टेंडर ऑफर, ऑड-लॉट बायबैक और अन्य संरचित तरीकों के माध्यम से ही बायबैक कर सकती थीं।

नई व्यवस्था में क्या बदला

नए ढाँचे के तहत ओपन-मार्केट बायबैक की अधिकतम समय-सीमा 60 दिन तय की गई है। इस रूट में कंपनियाँ एक निर्धारित अवधि में सेकेंडरी मार्केट से सीधे शेयर खरीद सकती हैं, जिससे उन्हें बायबैक के क्रियान्वयन और समय-चयन में अधिक लचीलापन मिलता है। गौरतलब है कि यह विकल्प उन कंपनियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो एकमुश्त टेंडर ऑफर के बजाय चरणबद्ध तरीके से शेयर वापस खरीदना चाहती हैं।

बायबैक का महत्व और उद्देश्य

कंपनियाँ बायबैक का उपयोग मुख्यतः तीन उद्देश्यों के लिए करती हैं — शेयरधारकों को अतिरिक्त नकदी लौटाना, प्रति शेयर आय (EPS) में सुधार करना, और भविष्य की संभावनाओं के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ाना। ओपन-मार्केट रूट की अनुपस्थिति में बायबैक के विकल्प सीमित हो गए थे, जो अब बहाल हो रहे हैं।

सोने-चाँदी ETF के लिए नया ट्रेडिंग सिस्टम

सेबी ने इसी बैठक में सोने और चाँदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) के लिए एक नई ट्रेडिंग प्रणाली की भी घोषणा की, जो 1 सितंबर 2026 से लागू होगी। नियामक के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य मूल्य की सटीक खोज (price discovery), पारदर्शिता में वृद्धि और निवेशक सुरक्षा को मजबूत करना है। नए नियमों के तहत कमोडिटी ETF प्रत्येक सत्र की शुरुआत 'प्री-ओपन कॉल ऑक्शन' से करेंगे और 'डायनामिक प्राइस बैंड' के भीतर कारोबार करेंगे, ताकि वैश्विक कमोडिटी बाज़ारों में रात भर हुए बदलावों को तत्काल प्रतिबिंबित किया जा सके।

आगे क्या होगा

सेबी का लक्ष्य है कि ETF की कीमतें उन परिसंपत्तियों के वास्तविक मूल्य के निकट रहें जिन्हें वे ट्रैक करती हैं, और घरेलू कमोडिटी ETF की कीमतें वैश्विक बाज़ार के साथ बेहतर तालमेल बिठाएँ। 1 अगस्त से ओपन-मार्केट बायबैक की वापसी और 1 सितंबर से नई ETF प्रणाली — दोनों मिलकर भारतीय पूँजी बाज़ार में संरचनात्मक सुधार की दिशा में सेबी के ताज़े कदमों को रेखांकित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि जो खामियाँ पहले इस रूट को बंद करवाने की वजह बनीं — असमान शेयरधारक भागीदारी और बाज़ार मूल्य पर संभावित प्रभाव — उनका समाधान केवल 60 दिन की समय-सीमा से पूरी तरह नहीं होता। नई व्यवस्था में निगरानी तंत्र कितना मजबूत है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। छोटे खुदरा निवेशकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना ही इस सुधार की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को फिर से क्यों शुरू किया?
सेबी ने 19 जून 2026 की बोर्ड बैठक में ओपन-मार्केट बायबैक को पुनः मंजूरी दी ताकि कंपनियों को शेयर वापस खरीदने के लिए अधिक लचीला विकल्प मिल सके। पहले यह रूट पारदर्शिता की कमी और शेयरधारकों की असमान भागीदारी के कारण बंद किया गया था।
नए ओपन-मार्केट बायबैक नियम कब से लागू होंगे और इसकी समय-सीमा क्या है?
नई व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी। इसके तहत ओपन-मार्केट बायबैक की अधिकतम अवधि 60 दिन निर्धारित की गई है।
ओपन-मार्केट बायबैक और टेंडर ऑफर में क्या अंतर है?
ओपन-मार्केट बायबैक में कंपनी सेकेंडरी मार्केट से सीधे और चरणबद्ध तरीके से शेयर खरीदती है, जिससे समय-चयन में लचीलापन मिलता है। टेंडर ऑफर में कंपनी एक निश्चित मूल्य पर एक साथ सभी शेयरधारकों से शेयर वापस खरीदने का प्रस्ताव देती है, जो सभी निवेशकों को समान भागीदारी देता है।
सोने-चाँदी ETF के लिए सेबी का नया ट्रेडिंग सिस्टम क्या है?
सेबी ने 1 सितंबर 2026 से सोने और चाँदी के ETF के लिए नई प्रणाली लागू करने की घोषणा की है। इसमें प्रत्येक सत्र की शुरुआत 'प्री-ओपन कॉल ऑक्शन' से होगी और 'डायनामिक प्राइस बैंड' के तहत कारोबार होगा, ताकि वैश्विक बाज़ार के रात भर के बदलाव तुरंत परिलक्षित हो सकें।
इन बदलावों से आम निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?
ओपन-मार्केट बायबैक की वापसी से कंपनियों के पास शेयरधारकों को नकदी लौटाने का एक अतिरिक्त विकल्प होगा, जिससे EPS में सुधार और शेयर की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। सोने-चाँदी ETF की नई प्रणाली से मूल्य खोज अधिक सटीक होगी और निवेशकों को बेहतर पारदर्शिता मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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