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बेंगलुरु कचरा टेंडर विवाद: भाजपा नेता आर. अशोक ने शिवकुमार पर लगाए ₹36,500 करोड़ घोटाले के आरोप

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बेंगलुरु कचरा टेंडर विवाद: भाजपा नेता आर. अशोक ने शिवकुमार पर लगाए ₹36,500 करोड़ घोटाले के आरोप

सारांश

बेंगलुरु के कचरा प्रबंधन टेंडर को लेकर कर्नाटक की राजनीति गरमाई हुई है। भाजपा नेता आर. अशोक ने CM शिवकुमार पर ₹36,500 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है, जबकि सरकार जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक करने से बच रही है — यह टकराव कांग्रेस सरकार के लिए पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है।

मुख्य बातें

अशोक ने 12 जून को CM डी.के.
शिवकुमार पर बेंगलुरु के कचरा टेंडर में ₹36,500 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया।
कथित तौर पर ₹10,000 करोड़ कमीशन के रूप में दिए जाने का दावा; आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं।
CM शिवकुमार ने अशोक को 'कचरा माफिया का एजेंट' बताया, अशोक ने इसे संवैधानिक जिम्मेदारी बताकर खारिज किया।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलकर सीबीआई जाँच और सरकार बर्खास्तगी की माँग की।
जाँच समिति की रिपोर्ट तय समय-सीमा बीतने के बाद भी सार्वजनिक नहीं की गई।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 12 जून को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर सीधा हमला बोलते हुए बेंगलुरु के इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट में कथित तौर पर ₹36,500 करोड़ के घोटाले और ₹10,000 करोड़ के कमीशन का आरोप लगाया। उन्होंने माँग की कि जाँच समिति की रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाए, जो कथित तौर पर तय समय-सीमा बीतने के बाद भी जनता से छिपाई जा रही है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह टकराव उस समय और तीखा हो गया जब बुधवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अशोक को 'कचरा माफिया का एजेंट' बताते हुए उन पर ईर्ष्या से प्रेरित राजनीति करने का आरोप लगाया था। इससे पहले अशोक ने बेंगलुरु के कचरा प्रबंधन टेंडर में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जाँच की माँग उठाई थी। गौरतलब है कि यह मामला कांग्रेस सरकार के विरुद्ध भाजपा का पहला बड़ा भ्रष्टाचार आरोप माना जा रहा है।

अशोक का पलटवार

सीएम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अशोक ने कहा, 'मैं किसी लॉबी, ठेकेदार या कचरा माफिया का एजेंट नहीं हूँ, बल्कि जनता का एजेंट हूँ।' उन्होंने जोड़ा कि विपक्ष के नेता के रूप में घोटालों को उजागर करना, संदिग्ध टेंडरों पर सवाल उठाना और सरकार को जवाबदेह बनाना उनका संवैधानिक कर्तव्य है। अशोक ने कहा कि वह कर्नाटक की 7.5 करोड़ जनता और बेंगलुरु के 1.5 करोड़ नागरिकों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पारदर्शिता पर सवाल

अशोक ने शिवकुमार के पारदर्शिता संबंधी दावे को 'कर्नाटक का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक मजाक' बताया। उन्होंने कहा, 'सरकार द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट जनता से छिपाई जा रही है। बेंगलुरु कचरे से जूझ रहा है, बुनियादी ढाँचा चरमराया हुआ है और हजारों करोड़ के संदिग्ध ठेकों पर काम हो रहा है।' भाजपा नेता ने माँग की कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो रिपोर्ट बिना देरी के जारी की जाए।

सीबीआई जाँच और राज्यपाल से मुलाकात

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग की और राज्य सरकार को बर्खास्त करने की भी माँग उठाई। अशोक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि इस प्रोजेक्ट में ₹36,500 करोड़ का घोटाला हुआ है और ₹10,000 करोड़ कमीशन के रूप में दिए गए हैं — हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

आगे क्या होगा

अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर ही असंतोष बढ़ रहा है और कई विधायक पार्टी हाईकमान से सरकार के कामकाज को लेकर शिकायत कर रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बेंगलुरु का नागरिक प्रशासन पहले से ही बुनियादी ढाँचे की समस्याओं से घिरा है। जाँच समिति की रिपोर्ट का सार्वजनिक होना अब इस पूरे विवाद की अगली कड़ी बनने वाला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब तक जाँच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती। रिपोर्ट को तय समय-सीमा के बावजूद दबाए रखना सरकार की पारदर्शिता के दावों को खोखला बनाता है — यह वही कांग्रेस है जो सत्ता में आने से पहले 'जवाबदेही' को अपना मुख्य चुनावी वादा बताती थी। दूसरी ओर, भाजपा के ₹36,500 करोड़ के आँकड़े भी बिना सत्यापन-योग्य साक्ष्य के केवल दबाव की राजनीति हैं। असली सवाल यह है कि क्या कर्नाटक की जनता — खासकर बेंगलुरु के वे नागरिक जो रोज कचरे की समस्या झेलते हैं — को कभी सच्चाई मिलेगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु कचरा टेंडर विवाद क्या है?
बेंगलुरु के इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर ₹36,500 करोड़ के घोटाले और ₹10,000 करोड़ के कमीशन का आरोप लगाया है। इस मामले की जाँच के लिए सरकार ने एक समिति गठित की थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
आर. अशोक ने CM शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा नेता आर. अशोक ने CM डी.के. शिवकुमार पर भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी और टेंडर विवाद में कथित रूप से शामिल लोगों को बचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने जाँच रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने की माँग की है।
CM शिवकुमार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अशोक को 'कचरा माफिया का एजेंट' बताया और उन पर ईर्ष्या से प्रेरित राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार की पारदर्शिता का दावा करते हुए आरोपों को खारिज किया।
भाजपा ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जाँच की माँग की और राज्य सरकार को बर्खास्त करने की भी माँग उठाई। अशोक ने स्वतंत्र और समयबद्ध जाँच की भी माँग की है।
जाँच समिति की रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी?
सरकार द्वारा गठित जाँच समिति की रिपोर्ट तय समय-सीमा बीतने के बाद भी सार्वजनिक नहीं की गई है। भाजपा का आरोप है कि रिपोर्ट जानबूझकर दबाई जा रही है; सरकार की ओर से रिपोर्ट जारी करने की कोई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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