11 अगस्त 2026
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बी. नागेंद्र की कैबिनेट वापसी पर भड़के विजयेंद्र: 'यह अक्षम्य है', BJP-JDS ने दी आंदोलन की चेतावनी

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बी. नागेंद्र की कैबिनेट वापसी पर भड़के विजयेंद्र: 'यह अक्षम्य है', BJP-JDS ने दी आंदोलन की चेतावनी

सारांश

कर्नाटक BJP अध्यक्ष विजयेंद्र ने वाल्मीकि निगम घोटाले में आरोपी रहे बी. नागेंद्र की कैबिनेट वापसी को 'अक्षम्य' करार दिया। CBI-ED जाँच अधूरी रहते हुए यह नियुक्ति विपक्ष को विधानसभा सत्र में बड़ा हथियार दे सकती है।

मुख्य बातें

कर्नाटक BJP अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने 11 अगस्त को बी.
नागेंद्र की कैबिनेट में पुनः नियुक्ति को 'अक्षम्य' बताया।
नागेंद्र पर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से अवैध धन निकासी का आरोप; CBI और ED की जाँच अभी जारी है।
राज्य CID ने नागेंद्र को क्लीन चिट दी, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों की जाँच पूरी नहीं हुई।
विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से विधानसभा सत्र से पहले नागेंद्र का इस्तीफा लेने की माँग की।
BJP-JD(S) ने विधानसभा के भीतर और बाहर संयुक्त आंदोलन की चेतावनी दी।
विजयेंद्र ने सरकार पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दूध उत्पादक प्रोत्साहन और सूखा राहत में विफलता के भी आरोप लगाए।

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने मंगलवार, 11 अगस्त को राज्य सरकार के उस फैसले की कड़ी निंदा की, जिसमें विवादास्पद पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को कर्नाटक कैबिनेट में पुनः शामिल किया गया है। विजयेंद्र ने इस कदम को 'अक्षम्य' करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले नागेंद्र को कैबिनेट से नहीं हटाया गया, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] मिलकर अपना विरोध तेज करेंगे।

मुख्य घटनाक्रम

विजयेंद्र ने सरकार पर सीधा सवाल दागा — 'नागेंद्र को कैबिनेट में शामिल करने की क्या मजबूरी थी? सरकार किस बात से डर रही थी?' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नागेंद्र ने स्वयं कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड में वित्तीय अनियमितताओं की बात स्वीकार की थी। भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री को इस मामले में अभी तक पूरी तरह क्लीन चिट नहीं मिली है।

विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से माँग की कि वे विधानसभा सत्र प्रारंभ होने से पहले नागेंद्र का इस्तीफा लें। उन्होंने कहा कि जब तक नागेंद्र पद नहीं छोड़ते, BJP-JD(S) का संघर्ष विधानसभा के भीतर और बाहर — दोनों मोर्चों पर जारी रहेगा।

वाल्मीकि निगम घोटाला: पृष्ठभूमि

यह विवाद महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से धन निकाले जाने के मामले से जुड़ा है, जो राज्य सरकार द्वारा संचालित आदिवासी कल्याण संस्था है। इस घोटाले के उजागर होने पर तत्कालीन अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र को इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी।

केंद्रीय जाँच एजेंसियों — केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) — ने इस मामले की जाँच की। हालाँकि, राज्य के आपराधिक जाँच विभाग (CID) ने नागेंद्र को क्लीन चिट दे दी है। विजयेंद्र का तर्क है कि केंद्रीय एजेंसियों की जाँच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए उनकी कैबिनेट में वापसी समय से पहले और अनुचित है।

सरकार पर व्यापक आरोप

भाजपा अध्यक्ष ने नागेंद्र मुद्दे से आगे बढ़ते हुए कर्नाटक सरकार पर कई मोर्चों पर विफलता के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन — जिसमें वृद्धावस्था, विधवा और विकलांगता पेंशन शामिल हैं — ठीक से वितरित नहीं की जा रहीं। इसके अलावा, दूध उत्पादकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी समय पर जारी नहीं हो रही।

विजयेंद्र ने कहा कि कम वर्षा के कारण किसानों को फसल नुकसान झेलना पड़ रहा है और राज्य में सूखे की स्थिति गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया — 'सरकार को लोगों की समस्याओं से ज्यादा कांग्रेस आलाकमान की राजनीति की चिंता है।'

विपक्ष की रणनीति

विजयेंद्र ने घोषणा की कि BJP और JD(S) आगामी विधानसभा सत्र का उपयोग किसानों, सामाजिक सुरक्षा लाभार्थियों, दूध उत्पादकों और अन्य वर्गों के मुद्दे उठाने के लिए करेंगे। उन्होंने जोर दिया कि सत्र का सुचारू संचालन तभी संभव होगा जब सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने को तैयार हो। नागेंद्र की कैबिनेट वापसी का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

आगे क्या होगा

कर्नाटक विधानसभा का आगामी सत्र BJP-JD(S) गठबंधन और सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच तीखी नोकझोंक का मंच बन सकता है। नागेंद्र पर CBI और ED की जाँच की स्थिति इस राजनीतिक संघर्ष की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जाँच की स्थिति और जनजातीय राजनीति एक साथ उलझी हुई हैं। CID की क्लीन चिट और CBI-ED की सक्रिय जाँच का एक साथ अस्तित्व सरकार की स्थिति को कमज़ोर करता है — यह संदेश जाता है कि राज्य जाँच तंत्र और केंद्रीय एजेंसियाँ अलग-अलग दिशाओं में हैं। विजयेंद्र का आक्रामक रुख BJP के लिए विधानसभा सत्र से पहले एजेंडा सेट करने की रणनीति भी है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस नियुक्ति का राजनीतिक मूल्य, जो भी हो, उस छवि-क्षति की भरपाई कर सकती है जो जनजातीय कल्याण घोटाले के संदर्भ में हुई है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बी. नागेंद्र को कर्नाटक कैबिनेट में वापस क्यों लिया गया और विवाद क्या है?
कर्नाटक सरकार ने पूर्व अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र को कैबिनेट में पुनः शामिल किया है। विवाद इसलिए है क्योंकि नागेंद्र पर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से अवैध धन निकासी के मामले में CBI और ED की जाँच अभी भी जारी है, भले ही राज्य CID ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है।
वाल्मीकि निगम घोटाला क्या है?
यह मामला राज्य-संचालित महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से धन निकाले जाने से जुड़ा है। इस घोटाले के उजागर होने पर तत्कालीन मंत्री बी. नागेंद्र को इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी; CBI और ED दोनों ने जाँच की।
BJP और JD(S) आगे क्या करने की योजना बना रहे हैं?
BJP अध्यक्ष विजयेंद्र ने घोषणा की है कि BJP और JD(S) आगामी विधानसभा सत्र में नागेंद्र की कैबिनेट वापसी का मुद्दा उठाएंगे और सदन के भीतर व बाहर दोनों जगह आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने माँग की है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सत्र शुरू होने से पहले नागेंद्र का इस्तीफा लें।
BJP ने कर्नाटक सरकार पर और क्या आरोप लगाए हैं?
विजयेंद्र ने नागेंद्र मुद्दे के अलावा सरकार पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा, विकलांगता) समय पर न देने, दूध उत्पादकों की प्रोत्साहन राशि रोकने और सूखे से पीड़ित किसानों को पर्याप्त राहत न देने के आरोप भी लगाए हैं।
क्या नागेंद्र को पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई है?
नहीं। राज्य के आपराधिक जाँच विभाग (CID) ने नागेंद्र को इस मामले में क्लीन चिट दी है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों CBI और ED की जाँच अभी भी जारी है। BJP का तर्क है कि केंद्रीय जाँच पूरी होने से पहले कैबिनेट में वापसी उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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