कर्नाटक भाजपा का नागेंद्र को कैबिनेट से हटाने का अल्टीमेटम, सभी जिला मुख्यालयों पर बुधवार को प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार, 11 अगस्त को राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए मंत्री बी. नागेंद्र को कैबिनेट से तत्काल हटाने की माँग की। पार्टी ने चेतावनी दी कि बुधवार, 12 अगस्त को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। नागेंद्र को हाल ही में कैबिनेट में पुनः शामिल किए जाने के फैसले को भाजपा ने नैतिक रूप से अस्वीकार्य बताया है।
मुख्य घटनाक्रम
विपक्ष के नेता आर. अशोक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। अशोक ने कहा, "नागेंद्र पर अभी भी 31 मामले दर्ज हैं और उन्हें हर दिन कोर्ट में पेश होना होगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि मंगलवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन बुधवार को और तीव्र किया जाएगा।
अशोक के अनुसार, "बुधवार को सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हमारे नेता, विधायक, एमएलसी और पार्टी कार्यकर्ता सभी जिलों में डिप्टी कमिश्नर के कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे।"
भाजपा का तर्क — पूर्व मिसाल का सवाल
अशोक ने सरकार के फैसले की तार्किक विसंगति उजागर करते हुए पूछा कि यदि नागेंद्र को कैबिनेट में बाहर रखने का कोई आधार नहीं था, तो उन्हें पहले क्यों हटाया गया था। उन्होंने पूर्व मंत्री के.एस. ईश्वरप्पा का उदाहरण भी दिया — जिन्हें कथित तौर पर क्लीन चिट मिलने के बाद भी कैबिनेट से नहीं लौटाया गया था — और पूछा कि क्या भाजपा ने उन्हें वापस लिया था। यह तुलना सरकार की नीति में दोहरे मानदंड की ओर इशारा करती है।
गौरतलब है कि भाजपा महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी का विरोध कर रही है। यह मामला राज्य की राजनीति में काफी समय से विवाद का केंद्र रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से मंत्री शिवराज तंगदगी ने नागेंद्र को कैबिनेट में शामिल करने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा, "भाजपा विधायक जनार्दन रेड्डी पर क्या आरोप हैं? भाजपा की स्थिति ऐसी है कि अगर वे कुछ करते हैं तो उसे अच्छा माना जाता है, लेकिन जब दूसरे वही काम करते हैं तो उन्हें समस्या होती है।"
तंगदगी ने यह भी तर्क दिया कि आरोप और दोषसिद्धि दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में कई लोग आरोपों का सामना करते हैं, लेकिन आरोपी होना दोषी होने के बराबर नहीं है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी का नया अध्याय है। आलोचकों का कहना है कि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का यह कदम जनजातीय समुदायों के बीच गलत संदेश दे सकता है।
क्या होगा आगे
बुधवार को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद भाजपा का अगला कदम क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, अशोक ने संकेत दिया है कि पार्टी इस मुद्दे को दबाने नहीं देगी और आंदोलन जारी रहेगा। नागेंद्र के खिलाफ चल रहे 31 आपराधिक मामलों की सुनवाई का परिणाम भी इस राजनीतिक संघर्ष की दिशा तय करेगा।