10 अगस्त 2026
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कर्नाटक कैबिनेट विवाद: नागेंद्र की वापसी पर BJP का हमला, कांग्रेस बोली — 'किस अदालत ने दोषी माना?'

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कर्नाटक कैबिनेट विवाद: नागेंद्र की वापसी पर BJP का हमला, कांग्रेस बोली — 'किस अदालत ने दोषी माना?'

सारांश

CBI चार्जशीट में नाम होने के बावजूद बी. नागेंद्र को कर्नाटक कैबिनेट में शामिल करने पर BJP ने कांग्रेस को घेरा। कांग्रेस का जवाब — 'किस अदालत ने दोषी माना?' CID ने क्लीन चिट दी है, ED की जांच जारी है। दो एजेंसियों के परस्पर विरोधाभासी रुख ने इस मामले को और जटिल बना दिया है।

मुख्य बातें

सुनील कुमार ने 10 अगस्त को आरोप लगाया कि CBI चार्जशीट में नाम होने के बावजूद बी.
नागेंद्र को कर्नाटक कैबिनेट में शामिल किया गया।
CBI ने नागेंद्र को वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन कथित घोटाले में कथित मास्टरमाइंड बताया; 2 जून 2026 के CBI बयान का हवाला दिया गया।
CID ने नागेंद्र को क्लीन चिट दी है, जबकि ED की जांच अभी जारी है।
कांग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने पूछा — 'किस अदालत ने नागेंद्र को दोषी माना?' और BJP पर येदियुरप्पा व जनार्दन रेड्डी के मामलों का हवाला देते हुए पलटवार किया।
BJP ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने के संकेत दिए हैं।

कर्नाटक में पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को राज्य कैबिनेट में शामिल किए जाने पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री वी. सुनील कुमार ने सोमवार, 10 अगस्त को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में नाम आने के बावजूद नागेंद्र को महज एक महीने के भीतर मंत्रिमंडल में जगह दी गई। बेंगलुरू में यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम कथित घोटाले की जांच अभी भी जारी है।

मुख्य आरोप: CBI चार्जशीट का हवाला

सुनील कुमार ने 2 जून 2026 को CBI की ओर से दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि एजेंसी ने अपनी जांच में बी. नागेंद्र को वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन अनियमितता मामले में एक कथित मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित किया है। उनके अनुसार, CBI ने तीन पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें नागेंद्र की भूमिका को केंद्रीय बताया गया है।

सुनील कुमार ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि क्या नागेंद्र कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का 'पेमेंट कोटा' हैं और मंत्रालय के आवंटन से किसे वास्तव में फायदा पहुंचा। गौरतलब है कि यह BJP की ओर से कर्नाटक की सिद्धरामैया सरकार पर सबसे सीधा हमला है।

जांच की स्थिति: CID और ED की अलग-अलग भूमिका

इस मामले में आपराधिक जांच विभाग (CID) ने नागेंद्र को क्लीन चिट दे दी है। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) अभी भी पूरे प्रकरण की जांच कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दो केंद्रीय एजेंसियों के निष्कर्ष परस्पर विरोधाभासी दिशाओं में दिख रहे हैं — एक ने क्लीन चिट दी, दूसरी ने आरोपी बताया।

कांग्रेस का पलटवार: 'किस अदालत ने दोषी माना?'

कांग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत में नागेंद्र के कैबिनेट में शामिल होने का बचाव किया। उन्होंने सवाल उठाया, 'आखिर किस अदालत में नागेंद्र को दोषी पाया गया है?'

खड़गे ने BJP पर पलटवार करते हुए कहा, 'भाजपा के हिसाब से देखें तो मैं भी एक दागी नेता हूं। भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसी कारण वो हमारी सरकार के कामकाज में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और नेता जनार्दन रेड्डी के खिलाफ आरोपों का भी उल्लेख करते हुए BJP की नैतिक स्थिति पर सवाल उठाए।

खड़गे ने यह भी कहा कि BJP 'सूखा राहत फंड' जारी करने को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रही है, जबकि उस फंड को जारी करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।

राजनीतिक संदर्भ: दलित-आदिवासी राजनीति का आयाम

बी. नागेंद्र अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं और कर्नाटक की राजनीति में उनका जनाधार महत्वपूर्ण माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि उनकी कैबिनेट में वापसी सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। वहीं BJP का तर्क है कि जांच के दौरान किसी आरोपी को मंत्री पद देना संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।

आगे क्या होगा

ED की जांच अभी जारी है और अदालत में मामला विचाराधीन है। BJP ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएगी। यह विवाद कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए एक राजनीतिक दबाव बिंदु बना हुआ है, जो आने वाले हफ्तों में और तीखा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय राजनीति की उस पुरानी परंपरा का आईना है जिसमें आरोप और जांच को दोष-सिद्धि से अलग रखकर राजनीतिक नियुक्तियां जारी रहती हैं। CID की क्लीन चिट और CBI की चार्जशीट — दोनों एक साथ सच हैं, और यही विरोधाभास इस मामले को कानूनी से अधिक राजनीतिक बनाता है। कांग्रेस का 'किस अदालत ने दोषी माना' वाला तर्क तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह उस नैतिक प्रश्न का जवाब नहीं देता जो जनता के मन में है। BJP का पलटवार भी उतना ही चयनात्मक है — येदियुरप्पा और रेड्डी के मामलों में पार्टी की अपनी भूमिका इस आक्रोश को कमज़ोर करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बी. नागेंद्र के खिलाफ क्या आरोप हैं?
बी. नागेंद्र पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितता और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। CBI ने अपनी चार्जशीट में उन्हें इस कथित घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है, जबकि CID ने उन्हें क्लीन चिट दी है और ED की जांच जारी है।
CID की क्लीन चिट और CBI की चार्जशीट में अंतर क्यों है?
CID (राज्य एजेंसी) और CBI (केंद्रीय एजेंसी) दोनों स्वतंत्र रूप से जांच करती हैं और उनके निष्कर्ष अलग हो सकते हैं। इस मामले में CID ने नागेंद्र को क्लीन चिट दी है, जबकि CBI ने चार्जशीट में उन्हें मुख्य आरोपी बताया है। अंतिम निर्णय अदालत का होगा।
BJP ने नागेंद्र की कैबिनेट नियुक्ति पर आपत्ति क्यों जताई?
BJP विधायक वी. सुनील कुमार का कहना है कि CBI की चार्जशीट लंबित होने के दौरान नागेंद्र को मंत्री पद देना नैतिक रूप से अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नियुक्ति कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और नागेंद्र के बीच किसी राजनीतिक समझौते का परिणाम हो सकती है।
कांग्रेस ने BJP के आरोपों का क्या जवाब दिया?
कांग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि नागेंद्र को किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है, इसलिए उन्हें 'दागी' कहना गलत है। उन्होंने BJP पर पलटवार करते हुए येदियुरप्पा और जनार्दन रेड्डी जैसे नेताओं के उदाहरण दिए जिन्हें BJP ने आरोपों के बावजूद टिकट दिए।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह मामला कर्नाटक की सिद्धरामैया सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बिंदु बन सकता है। BJP ने इसे विधानसभा में उठाने के संकेत दिए हैं और ED की जांच जारी रहने से यह विवाद आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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