कर्नाटक कैबिनेट विवाद: नागेंद्र की वापसी पर BJP का हमला, कांग्रेस बोली — 'किस अदालत ने दोषी माना?'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को राज्य कैबिनेट में शामिल किए जाने पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री वी. सुनील कुमार ने सोमवार, 10 अगस्त को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में नाम आने के बावजूद नागेंद्र को महज एक महीने के भीतर मंत्रिमंडल में जगह दी गई। बेंगलुरू में यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम कथित घोटाले की जांच अभी भी जारी है।
मुख्य आरोप: CBI चार्जशीट का हवाला
सुनील कुमार ने 2 जून 2026 को CBI की ओर से दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि एजेंसी ने अपनी जांच में बी. नागेंद्र को वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन अनियमितता मामले में एक कथित मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित किया है। उनके अनुसार, CBI ने तीन पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें नागेंद्र की भूमिका को केंद्रीय बताया गया है।
सुनील कुमार ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि क्या नागेंद्र कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का 'पेमेंट कोटा' हैं और मंत्रालय के आवंटन से किसे वास्तव में फायदा पहुंचा। गौरतलब है कि यह BJP की ओर से कर्नाटक की सिद्धरामैया सरकार पर सबसे सीधा हमला है।
जांच की स्थिति: CID और ED की अलग-अलग भूमिका
इस मामले में आपराधिक जांच विभाग (CID) ने नागेंद्र को क्लीन चिट दे दी है। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) अभी भी पूरे प्रकरण की जांच कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दो केंद्रीय एजेंसियों के निष्कर्ष परस्पर विरोधाभासी दिशाओं में दिख रहे हैं — एक ने क्लीन चिट दी, दूसरी ने आरोपी बताया।
कांग्रेस का पलटवार: 'किस अदालत ने दोषी माना?'
कांग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत में नागेंद्र के कैबिनेट में शामिल होने का बचाव किया। उन्होंने सवाल उठाया, 'आखिर किस अदालत में नागेंद्र को दोषी पाया गया है?'
खड़गे ने BJP पर पलटवार करते हुए कहा, 'भाजपा के हिसाब से देखें तो मैं भी एक दागी नेता हूं। भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसी कारण वो हमारी सरकार के कामकाज में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और नेता जनार्दन रेड्डी के खिलाफ आरोपों का भी उल्लेख करते हुए BJP की नैतिक स्थिति पर सवाल उठाए।
खड़गे ने यह भी कहा कि BJP 'सूखा राहत फंड' जारी करने को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रही है, जबकि उस फंड को जारी करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
राजनीतिक संदर्भ: दलित-आदिवासी राजनीति का आयाम
बी. नागेंद्र अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं और कर्नाटक की राजनीति में उनका जनाधार महत्वपूर्ण माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि उनकी कैबिनेट में वापसी सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। वहीं BJP का तर्क है कि जांच के दौरान किसी आरोपी को मंत्री पद देना संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।
आगे क्या होगा
ED की जांच अभी जारी है और अदालत में मामला विचाराधीन है। BJP ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएगी। यह विवाद कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए एक राजनीतिक दबाव बिंदु बना हुआ है, जो आने वाले हफ्तों में और तीखा हो सकता है।