नागेंद्र की कैबिनेट वापसी पर BJP का वार: 'कांग्रेस ने ₹89.62 करोड़ घोटाले से जुड़े नेता को दिया इनाम'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 4 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र को कर्नाटक कैबिनेट में दोबारा शामिल किए जाने को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 'महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम' के कथित घोटाले से जुड़े एक नेता को पुरस्कृत किया है।
आरोप: आदिवासी कल्याण निधि का कथित दुरुपयोग
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अशोक ने दावा किया कि महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से अनुसूचित जनजाति समुदायों के कल्याण के लिए आवंटित ₹89.62 करोड़ से अधिक की राशि का कथित तौर पर गबन किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जाँच रिपोर्ट और आधिकारिक चार्जशीट से पता चलता है कि यह धनराशि राजनीतिक और चुनावी खर्चों में इस्तेमाल की गई।
अशोक ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने स्वयं विधानसभा में इस घोटाले को स्वीकार किया था — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दलित अधिकारी की मौत का संदर्भ
BJP नेता ने इस मामले से जुड़े एक दलित अधिकारी की मौत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस अधिकारी ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था जिसमें कथित घोटाले में हुई अनियमितताओं का जिक्र था। यह एक संवेदनशील और गंभीर आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
कांग्रेस पर 'पाखंड' का आरोप
अशोक ने कांग्रेस पर सामाजिक न्याय के मुद्दे पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार ने पार्टी के 'असली एजेंडे' को उजागर कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस विवाद उठने पर नेताओं को इस्तीफा दिलाती है और जब जनता का ध्यान हट जाता है, तो उन्हें चुपचाप बहाल कर देती है।
अशोक ने कहा, 'आप भ्रष्टाचार से लड़ते नहीं हैं, बल्कि उसे संस्थागत बनाते हैं। आप आदिवासी अधिकारों की रक्षा नहीं करते, आप राजनीतिक सत्ता के लिए उनकी बलि देते हैं।'
BJP का सीधा सवाल
अशोक ने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए पूछा, 'कर्नाटक एक सीधा सवाल पूछ रहा है — क्या कांग्रेस ने आदिवासियों के कल्याण से जुड़े एक बड़े घोटाले से संबंधित नेता को इसलिए इनाम दिया क्योंकि वह बेगुनाह था, या इसलिए कि वह राजनीतिक रूप से बहुत जरूरी था? देश को जवाब दें।'
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार कई मोर्चों पर विपक्षी दबाव झेल रही है। नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी अब राजनीतिक जवाबदेही की बड़ी बहस का केंद्र बन गई है।