जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का सिएटल संस्करण शुरू: AI युग में साहित्य और मानवीय कल्पना की पैरवी
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के सिएटल संस्करण का तीसरा आयोजन 19 सितंबर 2026 को सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में शुरू हुआ, जहाँ लेखकों, जनप्रतिनिधियों और राजनयिकों ने एकजुट होकर पढ़ने, मानवीय कल्पना और साहित्य की अपरिहार्य भूमिका की वकालत की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से फैलते प्रभाव के बीच यह महोत्सव इस केंद्रीय सवाल के इर्द-गिर्द घूमा कि क्या किताबें और कहानियाँ अभी भी मानव अनुभव को समझने का सबसे विश्वसनीय माध्यम हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सिएटल की मेयर कैटी विल्सन ने इस आयोजन का स्वागत जयपुर के 'पिंक सिटी' और सिएटल के 'एमराल्ड सिटी' के मिलन के रूप में किया। उन्होंने कहा, सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी इस महोत्सव की शुरुआत के लिए सबसे उपयुक्त स्थल है, क्योंकि यह वह जगह है जहाँ लोग एक साथ आते हैं। विल्सन ने कहा, 'सिएटल मूल रूप से पाठकों का शहर है।'
विल्सन ने यह भी स्वीकार किया कि सिएटल की स्थिति इस बहस में जटिल है — शहर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर टिका है और यहाँ AI उपकरण विकसित करने वाली कंपनियाँ काम कर रही हैं। तीन साल के बच्चे की माँ के रूप में उन्होंने चिंता जताई कि आज के बच्चे जिस दुनिया में बड़े होंगे, वह उनके अपने बचपन से बिल्कुल अलग होगी।
साहित्य और AI: केंद्रीय बहस
मेयर विल्सन ने सवाल उठाया कि AI का पढ़ने, ध्यान केंद्रित करने और सोचने की क्षमता पर क्या असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक इसी कारण साहित्य, लेखन और पढ़ने के प्रति सार्वजनिक प्रतिबद्धता और भी ज़रूरी हो जाती है। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, 'ऐसे कमरे में, जहाँ सीटें खुली हों और दिमाग खुले हों, हमें सहानुभूति का अभ्यास करने का अवसर मिलता है।'
महोत्सव की ओर से बोलते हुए संजय रॉय ने दर्शकों के सामने सवाल रखा कि प्रौद्योगिकी से गहरे जुड़े इस शहर में साहित्य, पुस्तकालय और कला क्यों ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा, 'ये वे संस्थान हैं जो स्मृति को सहेजकर रखते हैं।' रॉय ने इस आयोजन को 'उम्मीद का एक जमावड़ा' करार दिया और कहा कि विविधताओं को समझना अज्ञानता तथा गलत धारणाओं को कम करने में सहायक होता है।
यान मार्टेल का मुख्य भाषण
कनाडाई उपन्यासकार यान मार्टेल — जिन्हें 'लाइफ ऑफ पाई' के लिए 2002 में बुकर पुरस्कार मिला था — ने अनिश्चित दौर में कहानियों और कल्पना की भूमिका पर केंद्रीय भाषण दिया। उन्होंने कहानी कहने की परंपरा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा और मौखिक परंपराओं, नाटकों, कविताओं, गीतों, चित्रों और संगीत का भी उल्लेख किया।
मार्टेल ने ट्रोजन युद्ध की कथाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि एकिलीज, हेलेन और ओडीसियस जैसे पात्र आज भी परिचित हैं, भले ही लोगों ने होमर की मूल रचनाएँ न पढ़ी हों। यह ध्यान देने योग्य है कि कहानियाँ सदियों तक जीवित रहकर समाज की पहचान को आकार देती हैं।
भारत-अमेरिका सांस्कृतिक संबंध
सिएटल में भारत के महावाणिज्यदूत प्रकाश गुप्ता ने इस आयोजन को अमेरिका में भारतीय संस्कृति और भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती उपस्थिति से जोड़ा। उन्होंने बताया कि नवंबर 2023 में सिएटल पहुँचने पर उनकी महोत्सव के आयोजकों से पहली मुलाकात एक होटल में कॉफी के दौरान हुई थी और तब से दोनों पहल एक साथ आगे बढ़ रही हैं।
गुप्ता ने कहा कि अमेरिका के विभिन्न शहरों में JLF का विस्तार भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बढ़ते आकार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उसके योगदान को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'सिएटल में इस सप्ताहांत भारत की एक झलक लाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।'
आगे क्या
सिएटल संस्करण का मुख्य आयोजन पूरे सप्ताहांत जारी रहेगा, जिसमें स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लेखकों और विचारकों की भागीदारी होगी। पिछली शाम एक गैलरी में उद्घाटन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। JLF की अंतरराष्ट्रीय विस्तार यात्रा जयपुर से शुरू होकर अब पैसिफिक नॉर्थवेस्ट तक पहुँच चुकी है और आयोजकों का लक्ष्य इसे अमेरिका के और शहरों में ले जाना है।