1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

19वें एमआईएफएफ में विशेषज्ञों की राय: 'एआई रचनात्मकता का साधन है, प्रतिस्थापन नहीं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
19वें एमआईएफएफ में विशेषज्ञों की राय: 'एआई रचनात्मकता का साधन है, प्रतिस्थापन नहीं'

सारांश

19वें एमआईएफएफ के ओपन फोरम में फिल्म, तकनीक और कानून के विशेषज्ञों ने एकमत से कहा — एआई कहानी कहने की कला का विकल्प नहीं बन सकता। पोस्ट-प्रोडक्शन से लेकर कॉपीराइट तक, बहस ने स्पष्ट किया कि तकनीक सहायक है, स्वामी नहीं।

मुख्य बातें

19वें एमआईएफएफ में इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने 16 जून 2026 को 'क्या एआई रचनात्मकता का भविष्य है?' विषय पर ओपन फोरम आयोजित किया।
उज्ज्वल निर्गुडकर (एसएमपीटीई) ने एआई को सिनेमा के तकनीकी विकास की अगली कड़ी बताया — साउंड, कलर करेक्शन और फिल्म रेस्टोरेशन में इसकी भूमिका रेखांकित की।
फिल्मकार सुबोध मेनन ने कहा — एआई विचार-मंथन में सहायक है, लेकिन कहानी कहने की कला मूलतः मानवीय ही रहती है।
अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया ने स्पष्ट किया कि कॉपीराइट स्वामित्व मानव रचनाकारों के पास रहता है; लाइसेंस प्राप्त डेटा और मानवीय भागीदारी ज़रूरी है।
सभी पैनलिस्टों की सर्वसम्मत राय — एआई को रचनात्मकता का पूरक माना जाए, प्रतिस्थापन नहीं।

19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) में 16 जून 2026 को इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित ओपन फोरम में फिल्म और तकनीक जगत के विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रचनात्मकता का विकल्प नहीं, बल्कि उसे सशक्त बनाने का साधन है। 'क्या एआई रचनात्मकता का भविष्य है?' विषय पर केंद्रित इस परिचर्चा में फिल्म निर्माण, कानून और तकनीक के क्षेत्र से चार विशेषज्ञ पैनलिस्ट शामिल हुए।

पैनल में कौन थे शामिल

इस सत्र में फायरफ्लाई क्रिएटिव स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक सनत पीसी, सोसाइटी ऑफ मोशन पिक्चर एंड टेलीविजन इंजीनियर्स (एसएमपीटीई) के अध्यक्ष उज्ज्वल निर्गुडकर, अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया और फैनबॉय पिक्चर्स के फिल्मकार सुबोध मेनन ने फिल्म निर्माण तथा कंटेंट क्रिएशन में एआई के अवसरों, चुनौतियों और व्यापक प्रभावों पर विचार रखे।

तकनीकी विकास और पोस्ट-प्रोडक्शन में एआई

निर्गुडकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सिनेमा के तकनीकी विकास की अगली स्वाभाविक कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि पोस्ट-प्रोडक्शन में एआई की भूमिका तेज़ी से बढ़ रही है — साउंड की गुणवत्ता सुधारने, कलर करेक्शन, दृश्य संवर्धन और फिल्म रेस्टोरेशन जैसे कार्यों में। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उद्योग को इन टूल्स के मानकीकरण और व्यापक अपनाने में अभी समय लगेगा।

कहानी कहने की कला: मानव रचनात्मकता अपरिहार्य

सुबोध मेनन ने जोर देकर कहा कि एआई विचार-मंथन में सहायता कर सकता है और कंटेंट तैयार करने में भूमिका निभा सकता है, लेकिन कहानी कहने की कला मूलतः मानवीय ही रहती है। उनके अनुसार यह तकनीक नए विचार उत्पन्न करने और उनकी पुष्टि करने का एक मूल्यवान उपकरण है। सनत पीसी ने वर्तमान समय को एक प्रयोगात्मक दौर बताते हुए कहा कि रचनाकारों को एआई की संभावनाएँ ज़रूर तलाशनी चाहिए, परंतु इस पर पूर्ण निर्भरता से बचना होगा — इसे सहायक उपकरण की तरह इस्तेमाल करना ही उचित है।

कॉपीराइट और कानूनी पहलू

अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया ने एआई-जनित सामग्री के कानूनी आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लाइसेंस प्राप्त डेटा के उपयोग और रचनात्मक कार्यों में पर्याप्त मानवीय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार कॉपीराइट स्वामित्व मानव रचनाकारों के पास ही बना रहता है। उन्होंने फिल्मकारों को सलाह दी कि एआई का उपयोग मौलिक सामग्री को प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि उसे और बेहतर बनाने के लिए किया जाए।

पैनल की सर्वसम्मत राय

परिचर्चा के अंत में सभी पैनलिस्टों ने सहमति जताई कि एआई निर्माण प्रक्रियाओं को सरल बना सकता है, कार्यकुशलता बढ़ा सकता है और रचनात्मक संभावनाओं का विस्तार कर सकता है। किंतु कहानी कहने का वास्तविक सार — मानव कल्पना, भावनाएँ और कलात्मक दृष्टि — अपरिहार्य बनी रहेगी। श्रोताओं के साथ हुए संवाद सत्र में एआई अपनाने, नैतिक चिंताओं, कॉपीराइट संरक्षण और रचनात्मक व्यवसायों के भविष्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई। यह फोरम भारतीय फिल्म उद्योग में एआई को लेकर बढ़ती जागरूकता और नीतिगत विमर्श की ज़रूरत को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्वामी नहीं' वाली सहमति सुनने में सुकूनदेह लगती है, लेकिन असली सवाल यह है कि जब एआई-जनित कंटेंट की लागत शून्य के करीब पहुँच जाए, तो स्वतंत्र डॉक्यूमेंट्री फिल्मकारों के लिए बाज़ार कैसा दिखेगा। कॉपीराइट पर कानूनी स्पष्टता की माँग सही दिशा में है, लेकिन भारत में इस क्षेत्र में नीति-निर्माण अभी भी शैशवावस्था में है। एमआईएफएफ जैसे मंचों पर यह बहस केवल अकादमिक नहीं रहनी चाहिए — इसे ठोस उद्योग दिशानिर्देशों और सरकारी नीति में बदलना होगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

19वें एमआईएफएफ के ओपन फोरम में किस विषय पर चर्चा हुई?
'क्या एआई रचनात्मकता का भविष्य है?' विषय पर 16 जून 2026 को मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने यह फोरम आयोजित किया। इसमें फिल्म निर्माण, तकनीक और कानून के चार विशेषज्ञ पैनलिस्ट शामिल हुए।
फिल्म निर्माण में एआई की क्या भूमिका बताई गई?
विशेषज्ञों के अनुसार एआई पोस्ट-प्रोडक्शन में साउंड सुधार, कलर करेक्शन, दृश्य संवर्धन और फिल्म रेस्टोरेशन जैसे कार्यों में सहायक है। यह विचार-मंथन और कंटेंट निर्माण में भी उपयोगी है, लेकिन कहानी कहने की मूल कला मानवीय ही रहती है।
एआई-जनित सामग्री पर कॉपीराइट किसके पास रहता है?
अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया के अनुसार कॉपीराइट स्वामित्व मानव रचनाकारों के पास ही रहता है। उन्होंने लाइसेंस प्राप्त डेटा के उपयोग और रचनात्मक कार्यों में पर्याप्त मानवीय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
क्या एआई भविष्य में फिल्मकारों की जगह ले सकता है?
फोरम में सभी पैनलिस्टों ने एकमत से कहा कि एआई मानव रचनात्मकता का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक है। कहानी कहने का वास्तविक सार — कल्पना, भावनाएँ और कलात्मक दृष्टि — मानव रचनाकारों में ही निहित रहेगा।
फिल्मकारों को एआई अपनाने के बारे में क्या सलाह दी गई?
सनत पीसी ने सलाह दी कि रचनाकार एआई की संभावनाएँ ज़रूर तलाशें, लेकिन इस पर पूरी तरह निर्भर न हों — इसे सहायक उपकरण की तरह इस्तेमाल करें। सुबोध मेनन ने कहा कि जैसे-जैसे यह तकनीक व्यापक होगी, फिल्मकारों के लिए एआई की समझ और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले