सुभाष घई का एआई पर बड़ा बयान: 'क्रिएटिविटी और इमोशनल इंटेलिजेंस की जगह नहीं ले सकती मशीन'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के वरिष्ठ फिल्म निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने 5 जून 2026 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर अपनी सोच एक बार फिर सार्वजनिक रूप से साझा की। उन्होंने कहा कि एआई भले ही मानसिक और बौद्धिक कार्यों में इंसान की सहायता करे, लेकिन वह इंसान के भीतर मौजूद मानवीय गुणों की जगह कभी नहीं ले सकता। उनके अनुसार, भविष्य उन्हीं लोगों का होगा जो अपनी रचनात्मकता को निरंतर विकसित करते रहेंगे।
सुभाष घई ने क्या कहा
सुभाष घई ने अपनी एक तस्वीर के साथ लिखा, 'एआई भविष्य में लोगों के अधिकतर मानसिक और बौद्धिक कार्यों को संभाल सकता है, लेकिन वह इंसान के भीतर मौजूद मानवीय गुणों की जगह नहीं ले सकता। भविष्य उन्हीं लोगों का होगा जो अपने भीतर की क्रिएटिविटी को लगातार मजबूत करते रहेंगे।' उन्होंने म्यूजिक, पोएट्री, पेंटिंग, कम्युनिकेशन, कोलेबोरेशन और क्रिटिकल थिंकिंग को वे गुण बताया जो इंसानों को मशीनों से अलग करते हैं।
रचनात्मकता और भावनाओं का महत्व
घई ने आगे जोड़ा कि 'एआई से केवल जानकारी हासिल करना ही काफी नहीं है, बल्कि उस जानकारी को भावनाओं और रचनात्मकता के साथ जोड़ना भी जरूरी है।' उनके मुताबिक, जब कोई व्यक्ति कला, साहित्य और मानवीय मूल्यों से जुड़ा रहता है, तभी वह समाज के लिए बेहतर योगदान दे सकता है और दूसरों की मदद करने की भावना विकसित कर सकता है।
एआई पर घई का पुराना नजरिया
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सुभाष घई ने इस विषय पर अपनी राय सार्वजनिक की हो। वह समय-समय पर एआई और मानवीय रचनात्मकता के संबंध पर अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं। उनका स्थायी मत रहा है कि एआई एक शक्तिशाली तकनीक है, परंतु कहानियाँ, भावनाएँ और कल्पनाएँ इंसानी दिमाग से जन्म लेती हैं — इन्हें पूरी तरह किसी मशीन के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
बदलते दौर में स्थायी सच
घई का मानना है कि समय के साथ पीढ़ियाँ बदलती हैं, तकनीक बदलती है और सोचने का नजरिया भी बदलता है — लेकिन इन सभी बदलावों के बीच इंसान की रचनात्मक सोच स्थायी रहती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई स्वयं इंसानी बुद्धिमत्ता की ही देन है, और उसका मूल उद्देश्य इंसान की सहायता करना है, न कि उसकी जगह लेना। यह ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग में एआई के उपयोग को लेकर बहस तेज होती जा रही है।