सुभाष घई ने युवाओं को प्रेरित किया, बोले- एआई को मित्र मानें, दुश्मन नहीं
सारांश
Key Takeaways
- काम का महत्व: व्यक्ति की पहचान उसके काम से होती है।
- रचनात्मकता: एआई को एक सहायक उपकरण के रूप में समझें।
- सीखना: नए कौशल सीखते रहना चाहिए।
मुंबई, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध निर्देशक सुभाष घई अक्सर अपने विचारों को सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। उनकी फ़िल्में गहरी सोच और समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने के लिए जानी जाती हैं। बुधवार को उन्होंने अपनी फिल्मों पर अपने विचार साझा किए।
सुभाष घई ने इंस्टाग्राम पर एक विशेष पोस्ट साझा की, जिसमें उनके हिट फ़िल्मों जैसे राम-लखन, सौदागर, खलनायक, नायक, परदेस और ताल के नाम शामिल थे। इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने युवाओं को नई प्रेरणा देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसा काम करना चाहिए जो न केवल फ़िल्म उद्योग के लिए, बल्कि हर क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक हो। उनका कहना है कि काम ऐसा होना चाहिए कि वह खुद बोलता रहे, व्यक्ति की आवश्यकता न पड़े।
सुभाष ने लिखा, "आने वाले समय में किसी व्यक्ति की असली पहचान उसकी बातों से नहीं, बल्कि उसके काम से होगी। काम के माध्यम से ही उसके विचार और दृष्टिकोण का पता चलेगा।"
उन्होंने यह भी कहा, "दर्शक फ़िल्म को लंबे समय तक याद रखते हैं। फ़िल्म बनाने वाले निर्देशक या क्रिएटर को हमेशा अपने काम को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।"
अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि जब तक समय है, सीखते रहो और आगे बढ़ते रहो। नई चीज़ें सीखने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने लिखा, "एआई को अपनी 'तीसरी आंख' की तरह इस्तेमाल करो। यह नई सोच, दिशा और आइडिया प्रदान कर सकती है। एआई को दुश्मन नहीं, बल्कि एक सहायक उपकरण की तरह देखना चाहिए जो रचनात्मकता को और मजबूत बनाए।"
सुभाष ने अपने करियर में कई उत्कृष्ट फ़िल्में दी हैं, जिन्हें दर्शक आज भी पसंद करते हैं। हालाँकि उनकी फ़िल्में लंबे समय से बड़े पर्दे पर नहीं आई हैं, लेकिन वह वर्तमान में अपने संस्थान, व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अपने स्कूल के माध्यम से उन्होंने कई प्रतिभाओं को निखारा है।