26 अगस्त 2026
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रियल एस्टेट में एआई क्रांति: क्रेडएआई टेककॉन 2.0 में विशेषज्ञों ने बताया कैसे बदलेगा निर्माण क्षेत्र

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रियल एस्टेट में एआई क्रांति: क्रेडएआई टेककॉन 2.0 में विशेषज्ञों ने बताया कैसे बदलेगा निर्माण क्षेत्र

सारांश

कोलकाता में क्रेडएआई टेककॉन 2.0 ने साफ़ संकेत दिया — भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र अब तकनीक को विकल्प नहीं, ज़रूरत मान रहा है। हज़ारों फ्लैट वाले मेगा-प्रोजेक्ट्स की बढ़ती माँग के बीच एआई निर्माण गुणवत्ता, समय-पालन और भवन प्रबंधन तीनों मोर्चों पर गेम-चेंजर बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

क्रेडएआई टेककॉन का दूसरा संस्करण 26 अगस्त 2026 को कोलकाता में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर की अग्रणी तकनीकी कंपनियों ने भाग लिया।
सह-अध्यक्ष सुहेल सराफ ने कहा कि हज़ारों फ्लैट वाले बड़े प्रोजेक्ट्स के युग में तकनीक अपनाना अनिवार्य हो गया है।
बिल्डट्रैक के सीईओ बलबीर सिंह खेरा ने बताया कि एआई निर्माण से लेकर भवन संचालन तक — सुरक्षा, ऊर्जा और जल प्रबंधन में — प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
एआई प्रक्रिया के तीन चरण: डेटा संग्रह , विश्लेषण व बेसलाइन निर्माण , और स्वचालित समस्या-पहचान ।
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई अपनाने से परिचालन लागत घटेगी और घर खरीदारों को समय पर बेहतर गुणवत्ता का उत्पाद मिलेगा।

कोलकाता में 26 अगस्त 2026 को क्रेडएआई टेककॉन के दूसरे संस्करण का आयोजन हुआ, जहाँ देशभर की अग्रणी तकनीकी कंपनियों और उद्योग विशेषज्ञों ने रियल एस्टेट क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया। इस सम्मेलन का केंद्रीय उद्देश्य भारत के निर्माण उद्योग को अधिक कुशल, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना है।

मुख्य घटनाक्रम

क्रेडएआई टेककॉन के सह-अध्यक्ष सुहेल सराफ ने कहा कि यह आयोजन देश की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी कंपनियों को कोलकाता के रियल एस्टेट उद्योग से सीधे जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में शामिल कंपनियाँ बिक्री, मार्केटिंग, निर्माण और प्रबंधन जैसे विविध व्यावसायिक कार्यों को बेहतर बनाने में सहायक तकनीकें प्रस्तुत कर रही हैं।

सराफ ने कहा, 'समय के साथ रियल एस्टेट उद्योग का स्वरूप तेज़ी से बदला है। पहले जहाँ 25 से 50 फ्लैट वाले छोटे प्रोजेक्ट बनाए जाते थे, वहीं अब डेवलपर्स हज़ारों फ्लैट वाले बड़े आवासीय प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं।' उन्होंने जोर दिया कि इतने बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए तकनीक को अपनाना अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य हो गया है।

घर खरीदारों पर असर

सराफ ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी व्यक्ति के लिए घर खरीदना जीवन की सबसे बड़ी निवेश प्रक्रिया होती है। इसलिए यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि खरीदार को समय पर और बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पाद मिले। उन्होंने कहा, 'टेक्नोलॉजी एडॉप्शन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे निर्माण की गुणवत्ता बेहतर होगी, परियोजनाएँ समय पर पूरी होंगी और उपभोक्ताओं को बेहतर आवासीय अनुभव मिलेगा।'

एआई का बहुआयामी उपयोग

कार्यक्रम में बिल्डट्रैक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बलबीर सिंह खेरा ने बताया कि एआई का उपयोग केवल निर्माण चरण तक सीमित नहीं है — भवनों के संचालन और दीर्घकालिक रखरखाव में भी इसकी निर्णायक भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब किसी भवन में लोग रहने लगते हैं, तब सुरक्षा, ऊर्जा प्रबंधन, जल प्रबंधन और अन्य सुविधाओं की निगरानी एआई की सहायता से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

खेरा ने एआई की कार्यप्रणाली को तीन चरणों में समझाया — पहला, भवनों से संबंधित डेटा संग्रह; दूसरा, उस डेटा का विश्लेषण और बेसलाइन निर्माण; और तीसरा, एआई प्लेटफॉर्म पर उस डेटा के आधार पर स्वचालित समस्या-पहचान। उन्होंने कहा, 'जब डेटा को एआई प्लेटफॉर्म पर डाला जाता है, तो सिस्टम स्वतः यह पहचान सकता है कि भवन में सुरक्षा, ऊर्जा खपत, पानी की खपत या अन्य परिचालन क्षेत्रों में कोई समस्या है या नहीं।'

परिचालन लागत में कमी और भविष्य की राह

खेरा ने बताया कि एआई की मदद से समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे परिचालन लागत घटेगी और भवनों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। उन्होंने क्रेडएआई की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इसके माध्यम से पूरे देश के रियल एस्टेट क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई बड़े शहरों में हज़ारों करोड़ रुपये के आवासीय और मिश्रित उपयोग वाले प्रोजेक्ट एक साथ निर्माणाधीन हैं।

गौरतलब है कि यह क्रेडएआई टेककॉन का दूसरा संस्करण है, जो दर्शाता है कि रियल एस्टेट उद्योग में तकनीक-केंद्रित संवाद की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में भारत के अन्य शहर भी एआई-आधारित समाधानों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि तकनीक-अपनाने की रफ़्तार क्या छोटे और मझोले डेवलपर्स तक भी पहुँच पाएगी या यह लाभ केवल बड़े खिलाड़ियों तक सीमित रहेगा। भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र में देरी और गुणवत्ता की शिकायतें लंबे समय से उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी पीड़ा रही हैं — एआई इसका तकनीकी जवाब हो सकता है, पर क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति और प्रशिक्षित जनशक्ति के बिना यह केवल सम्मेलनों की भाषा बनकर रह जाएगा। रेरा जैसे नियामक ढाँचे के बावजूद परियोजना-विलंब की समस्या बनी हुई है, जो दर्शाता है कि तकनीक को नीतिगत जवाबदेही के साथ जोड़ना भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्रेडएआई टेककॉन 2.0 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
क्रेडएआई टेककॉन रियल एस्टेट क्षेत्र में तकनीक और एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसका दूसरा संस्करण 26 अगस्त 2026 को कोलकाता में हुआ। इसमें देशभर की अग्रणी तकनीकी कंपनियों और रियल एस्टेट विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
रियल एस्टेट में एआई का उपयोग किन क्षेत्रों में हो सकता है?
एआई का उपयोग निर्माण प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, बिक्री, मार्केटिंग के साथ-साथ भवन संचालन में सुरक्षा, ऊर्जा प्रबंधन और जल प्रबंधन में भी किया जा सकता है। बिल्डट्रैक के सीईओ बलबीर सिंह खेरा के अनुसार, एआई सिस्टम स्वचालित रूप से संभावित समस्याओं की पहचान कर सकता है।
एआई अपनाने से घर खरीदारों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीक अपनाने से डेवलपर्स परियोजनाओं को समय पर पूरा कर सकेंगे और खरीदारों को बेहतर गुणवत्ता वाला घर मिलेगा। चूँकि घर खरीदना जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है, समय पर डिलीवरी और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना उपभोक्ताओं के लिए सीधा लाभ है।
एआई आधारित भवन प्रबंधन की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
बलबीर सिंह खेरा के अनुसार, इसके तीन चरण हैं — पहले भवन से संबंधित डेटा संग्रह, फिर उस डेटा का विश्लेषण और बेसलाइन निर्माण, और अंत में एआई प्लेटफॉर्म पर स्वचालित समस्या-पहचान। इससे बिना निरंतर मानव निगरानी के भी सिस्टम संभावित खामियाँ बता सकता है।
क्या भारत के अन्य शहर भी रियल एस्टेट में एआई अपनाएंगे?
कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत के अन्य शहर भी एआई-आधारित समाधानों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। क्रेडएआई की यह पहल पूरे देश के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक मॉडल बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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