आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर: 'परेशानियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी जितना अच्छे कामों का श्रेय'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान-2026 समारोह में कहा कि जिस तरह अच्छे कार्यों का श्रेय लिया जाता है, उसी तरह समस्याओं और परेशानियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी। उन्होंने एआई, पत्रकारिता की भूमिका, सामाजिक जवाबदेही और भारत के विकास पर व्यापक विचार साझा किए।
एआई के युग में मानव विवेक की अपरिहार्यता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव पर आंबेकर ने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत हो जाए, मनुष्य का कोई विकल्प नहीं है। उनके अनुसार, "भगवान ने इंसान को विशेष क्षमता दी है कि वह अपनी बुद्धि और विवेक से विचार, चिंतन कर निर्णय ले सकता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के युग में भी ह्यूमन इंटेलिजेंस की प्रासंगिकता बनी रहेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि आईआईटी मुंबई एक ऐसे एआई मॉडल पर काम कर रहा है जो देश की क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में भी संवाद करने में सक्षम होगा — जो भारत जैसे बहुभाषी देश के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा। गौरतलब है कि एआई वर्तमान में केवल डेटा नहीं, बल्कि ज्ञान भी संचित कर रहा है, और इसका वैश्विक प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है।
भारत का सकारात्मक माहौल और बढ़ती आकांक्षाएँ
देश के वर्तमान परिवेश पर आंबेकर ने कहा कि आज भारत में एक सकारात्मक वातावरण है और आम नागरिकों में आकांक्षाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, "आज सबसे गरीब व्यक्ति भी चाहता है कि उसके बच्चे पढ़ें-लिखें, आगे बढ़ें और देश के विकास में योगदान दें।" उनके अनुसार यह भारत के इतिहास का एक अत्यंत अनुकूल दौर है।
उन्होंने पत्रकारों और समाज से अपील की कि इस सकारात्मकता को और आगे ले जाने की दिशा में सामूहिक प्रयास होने चाहिए, ताकि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत में स्थिरता को बल मिल सके।
संघ के शताब्दी दर्शन: सही मनुष्य, सही समाज
मानव मूल्यों और चरित्र पर ज़ोर देते हुए आंबेकर ने कहा कि आधुनिक जीवन में हम अक्सर मूलभूत बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि असली महत्त्व व्यक्ति के चरित्र और विचारों का है। उन्होंने बताया कि 100 वर्षों से संघ इसी सिद्धांत पर कार्य कर रहा है — यदि मनुष्य सही है तो वह किसी भी युग में सही काम करेगा; यदि मनुष्य गलत है तो परिणाम भी गलत होगा।
जिम्मेदारी और सह-अस्तित्व का संदेश
सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही पर आंबेकर ने कहा कि अच्छे कामों का श्रेय सभी लेते हैं, लेकिन समस्याओं की जिम्मेदारी भी सभी को लेनी चाहिए — चाहे वह निजी जीवन हो, परिवार हो, समाज हो, राष्ट्र हो या राजनीति। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि देश में कोई समस्या है, तो उसकी जिम्मेदारी सामूहिक है — केवल एक पक्ष को दोष देना उचित नहीं।
धर्म और सह-अस्तित्व पर उन्होंने कहा, "एक ही सड़क पर कई वाहन चल सकते हैं, उसी तरह विभिन्न विचार और आस्थाएँ भी समाज में साथ रह सकती हैं।" उनके अनुसार धर्म का अर्थ दूसरे धर्म को समाप्त करना नहीं, बल्कि सभी का मिलकर आगे बढ़ना है।
पत्रकारिता और समावेशी अर्थव्यवस्था पर आह्वान
पत्रकारों को संबोधित करते हुए आंबेकर ने कहा कि राजनीति देश का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन हर विषय को केवल चुनावी या राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने समावेशी अर्थव्यवस्था की बात करते हुए कहा कि यदि हर काम को सम्मानजनक नहीं माना जाएगा, तो टकराव की स्थिति बनी रहेगी — और यह समस्या केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं, बल्कि शहरों और शिक्षित वर्ग में भी मौजूद है।
यह ऐसे समय में आया है जब मीडिया की भूमिका और जवाबदेही पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। आंबेकर का यह संबोधन पत्रकारिता, तकनीक और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच एक नई बहस को आमंत्रण देता है।