3 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर: 'परेशानियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी जितना अच्छे कामों का श्रेय'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर: 'परेशानियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी जितना अच्छे कामों का श्रेय'

सारांश

आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने नई दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रेय और जिम्मेदारी साथ-साथ चलती है — व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक। एआई के दौर में मानव विवेक की अपरिहार्यता, सह-अस्तित्व और समावेशी अर्थव्यवस्था पर उनका संदेश संघ के शताब्दी दर्शन की झलक देता है।

मुख्य बातें

सुनील आंबेकर ने 16 जून 2026 को देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान-2026 , नई दिल्ली में एआई, पत्रकारिता और सामाजिक जवाबदेही पर विचार रखे।
उन्होंने कहा कि अच्छे कामों का श्रेय लेने की तरह ही परेशानियों की जिम्मेदारी भी सामूहिक रूप से लेनी होगी।
आईआईटी मुंबई एक ऐसा एआई मॉडल विकसित कर रहा है जो भारत की क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में संवाद कर सकेगा।
आंबेकर ने कहा कि संघ के 100 वर्षों का दर्शन यही है — सही मनुष्य से ही सही समाज और व्यवस्था बनती है।
उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि हर विषय को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से न देखा जाए; सामाजिक समस्याओं के समाधान में नागरिक भागीदारी आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान-2026 समारोह में कहा कि जिस तरह अच्छे कार्यों का श्रेय लिया जाता है, उसी तरह समस्याओं और परेशानियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी। उन्होंने एआई, पत्रकारिता की भूमिका, सामाजिक जवाबदेही और भारत के विकास पर व्यापक विचार साझा किए।

एआई के युग में मानव विवेक की अपरिहार्यता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव पर आंबेकर ने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत हो जाए, मनुष्य का कोई विकल्प नहीं है। उनके अनुसार, "भगवान ने इंसान को विशेष क्षमता दी है कि वह अपनी बुद्धि और विवेक से विचार, चिंतन कर निर्णय ले सकता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के युग में भी ह्यूमन इंटेलिजेंस की प्रासंगिकता बनी रहेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि आईआईटी मुंबई एक ऐसे एआई मॉडल पर काम कर रहा है जो देश की क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में भी संवाद करने में सक्षम होगा — जो भारत जैसे बहुभाषी देश के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा। गौरतलब है कि एआई वर्तमान में केवल डेटा नहीं, बल्कि ज्ञान भी संचित कर रहा है, और इसका वैश्विक प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है।

भारत का सकारात्मक माहौल और बढ़ती आकांक्षाएँ

देश के वर्तमान परिवेश पर आंबेकर ने कहा कि आज भारत में एक सकारात्मक वातावरण है और आम नागरिकों में आकांक्षाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, "आज सबसे गरीब व्यक्ति भी चाहता है कि उसके बच्चे पढ़ें-लिखें, आगे बढ़ें और देश के विकास में योगदान दें।" उनके अनुसार यह भारत के इतिहास का एक अत्यंत अनुकूल दौर है।

उन्होंने पत्रकारों और समाज से अपील की कि इस सकारात्मकता को और आगे ले जाने की दिशा में सामूहिक प्रयास होने चाहिए, ताकि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत में स्थिरता को बल मिल सके।

संघ के शताब्दी दर्शन: सही मनुष्य, सही समाज

मानव मूल्यों और चरित्र पर ज़ोर देते हुए आंबेकर ने कहा कि आधुनिक जीवन में हम अक्सर मूलभूत बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि असली महत्त्व व्यक्ति के चरित्र और विचारों का है। उन्होंने बताया कि 100 वर्षों से संघ इसी सिद्धांत पर कार्य कर रहा है — यदि मनुष्य सही है तो वह किसी भी युग में सही काम करेगा; यदि मनुष्य गलत है तो परिणाम भी गलत होगा।

जिम्मेदारी और सह-अस्तित्व का संदेश

सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही पर आंबेकर ने कहा कि अच्छे कामों का श्रेय सभी लेते हैं, लेकिन समस्याओं की जिम्मेदारी भी सभी को लेनी चाहिए — चाहे वह निजी जीवन हो, परिवार हो, समाज हो, राष्ट्र हो या राजनीति। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि देश में कोई समस्या है, तो उसकी जिम्मेदारी सामूहिक है — केवल एक पक्ष को दोष देना उचित नहीं।

धर्म और सह-अस्तित्व पर उन्होंने कहा, "एक ही सड़क पर कई वाहन चल सकते हैं, उसी तरह विभिन्न विचार और आस्थाएँ भी समाज में साथ रह सकती हैं।" उनके अनुसार धर्म का अर्थ दूसरे धर्म को समाप्त करना नहीं, बल्कि सभी का मिलकर आगे बढ़ना है।

पत्रकारिता और समावेशी अर्थव्यवस्था पर आह्वान

पत्रकारों को संबोधित करते हुए आंबेकर ने कहा कि राजनीति देश का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन हर विषय को केवल चुनावी या राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने समावेशी अर्थव्यवस्था की बात करते हुए कहा कि यदि हर काम को सम्मानजनक नहीं माना जाएगा, तो टकराव की स्थिति बनी रहेगी — और यह समस्या केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं, बल्कि शहरों और शिक्षित वर्ग में भी मौजूद है।

यह ऐसे समय में आया है जब मीडिया की भूमिका और जवाबदेही पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। आंबेकर का यह संबोधन पत्रकारिता, तकनीक और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच एक नई बहस को आमंत्रण देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई से देखें तो यह संघ की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जो सामाजिक समस्याओं की जिम्मेदारी को राज्य से हटाकर व्यक्ति और समाज पर डालती है। 'हर काम को सम्मानजनक मानो' और 'सरकार पर निर्भर मत रहो' जैसे संदेश जहाँ नागरिक सक्रियता को प्रोत्साहित करते हैं, वहीं नीतिगत विफलताओं की जवाबदेही को भी धुंधला कर सकते हैं। हिंदू-मुस्लिम समस्या पर 'सामूहिक जिम्मेदारी' की बात सुनने में संतुलित लगती है, लेकिन इसमें ऐतिहासिक असमानताओं और संस्थागत पूर्वाग्रहों की अनदेखी का जोखिम भी है। पत्रकारिता को 'राजनीति से परे' देखने की सलाह देना ऐसे समय में विचारणीय है जब मीडिया की स्वतंत्रता और सत्ता से दूरी खुद एक बड़ा सवाल बनी हुई है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील आंबेकर ने देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान में क्या कहा?
आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने 16 जून 2026 को नई दिल्ली में कहा कि जिस तरह अच्छे कामों का श्रेय लिया जाता है, उसी तरह परेशानियों और समस्याओं की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी। उन्होंने एआई, पत्रकारिता, सह-अस्तित्व और समावेशी अर्थव्यवस्था पर भी विचार साझा किए।
आरएसएस का एआई पर क्या रुख है?
आंबेकर के अनुसार एआई तेज़ी से डेटा और ज्ञान एकत्र कर रहा है, लेकिन मनुष्य की बुद्धि और विवेक का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि आईआईटी मुंबई एक ऐसा एआई मॉडल विकसित कर रहा है जो भारत की क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में संवाद कर सकेगा।
संघ के 100 वर्षों के दर्शन पर आंबेकर ने क्या कहा?
आंबेकर ने कहा कि संघ 100 वर्षों से इस विचार पर काम कर रहा है कि यदि मनुष्य सही है तो वह किसी भी युग में सही काम करेगा। व्यक्ति का चरित्र और विचार ही समाज और व्यवस्था की दिशा तय करते हैं।
आंबेकर ने पत्रकारों को क्या संदेश दिया?
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि हर विषय को केवल राजनीतिक या चुनावी दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और केवल सरकार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान-2026 कहाँ और कब आयोजित हुआ?
यह समारोह 16 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसमें आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले