25 अगस्त 2026
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आरएसएस शताब्दी वर्ष: सुनील आंबेकर बोले — भारत एकता के धर्म से जुड़ा, राजनीति से नहीं

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आरएसएस शताब्दी वर्ष: सुनील आंबेकर बोले — भारत एकता के धर्म से जुड़ा, राजनीति से नहीं

सारांश

आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर कानपुर में हुए युवा संवाद में सुनील आंबेकर ने साफ कहा — भारत की असली ताकत राजनीति नहीं, एकता का धर्म है। एआई के दौर में मानवीय विवेक को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने युवाओं को बहु-कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी की राह दिखाई।

मुख्य बातें

सुनील आंबेकर ने 25 अगस्त 2026 को कानपुर में कहा कि भारत एकता के धर्म से जुड़ा है, न कि केवल राजनीति से।
आरएसएस शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में युवा संवाद आयोजित हुआ।
आंबेकर ने युवाओं को मुख्य पढ़ाई के साथ 2-4 अतिरिक्त कौशल सीखने और एआई के दौर में मानवीय विवेक बनाए रखने की सलाह दी।
महिला सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि केवल कानून से अपराध नहीं रुकता — परिवार और समाज में निरंतर संवाद ज़रूरी है।
विनय कुमार पाठक ने छात्रों की सहभागिता को विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने 25 अगस्त 2026 को कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संवाद में कहा कि भारत केवल राजनीति से नहीं, बल्कि एकता के धर्म से जुड़ा हुआ है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस संवाद में युवाओं ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, एआई, शिक्षा-रोजगार, महिला सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर सीधे सवाल रखे।

एकता और सांस्कृतिक मूल्य

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में बोलते हुए आंबेकर ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है, परंतु यह स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब वह दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान में बाधा न बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्य स्वतंत्रता को सीमित नहीं करते, बल्कि आपसी सम्मान, त्याग, समर्पण और सेवा के माध्यम से सामाजिक सामंजस्य की नींव रखते हैं।

संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को याद करते हुए आंबेकर ने कहा कि संगठन की स्थापना देशभक्ति और स्वाधीनता के मूल उद्देश्यों पर हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पूर्वजों ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिसके लिए दुनिया में कहीं जाकर माफी माँगनी पड़े — जबकि कई अन्य देशों को अपने अतीत के लिए यह करना पड़ता है।

एआई और भविष्य की नौकरियाँ

एआई और रोजगार से जुड़े सवाल पर आंबेकर ने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी मुख्य पढ़ाई के साथ दो से चार अतिरिक्त कौशल अवश्य सीखें। उन्होंने कहा कि एआई सूचना दे सकता है, उसे संसाधित कर सकता है और बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण मनुष्य से कहीं तेज़ी से कर सकता है — लेकिन किस परिस्थिति में क्या निर्णय लिया जाए, यह विवेक केवल मनुष्य के पास है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आधुनिक तकनीकी दक्षताओं के साथ-साथ व्यावहारिक और हाथों से किए जाने वाले कौशल भी उतने ही ज़रूरी हैं। उनके अनुसार, कोई भी कौशल छोटा या बड़ा नहीं होता — युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार उसमें दक्षता हासिल करनी चाहिए।

महिला सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी

महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर आंबेकर ने कहा कि बदलाव की शुरुआत वहीं से होनी चाहिए जहाँ हम खड़े हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय और आसपास ऐसा वातावरण बनाने की ज़रूरत पर बल दिया जहाँ महिलाएँ स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। उनका मत था कि केवल सरकार कानून बनाकर अपराध समाप्त नहीं कर सकती — अपराध करने वाला व्यक्ति उस समय कानून के बारे में नहीं सोचता।

उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में सुरक्षा, सम्मान और अच्छे व्यवहार को लेकर निरंतर संवाद आवश्यक है। बच्चों के साथ बचपन से ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए जिसमें वे अपनी बात खुलकर रख सकें।

शिक्षा, अवसर और डिजिटल समानता

छोटे शहरों और सामान्य परिवारों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलने के सवाल पर आंबेकर ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने ज्ञान और शिक्षा तक पहुँच को काफी आसान बना दिया है। ऑनलाइन पुस्तकालय, शोध पत्रिकाएँ और अनुवाद के साधन विद्यार्थियों के लिए व्यापक संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से बड़े शहर या अंग्रेज़ी माध्यम को सफलता की अनिवार्य शर्त मानने वाली सोच बदलने का आह्वान किया।

सामाजिक संगठनों की भूमिका पर उन्होंने बताया कि एकल विद्यालय जैसे प्रयासों के ज़रिए उन क्षेत्रों तक शिक्षा पहुँचाई जा रही है जहाँ स्कूलों की उपलब्धता कम है। युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, उद्यमिता और उद्योगों से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है।

कुलपति की अपील और आगे की राह

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में केवल आदेश देने की संस्कृति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने छात्रों के साथ चर्चा, सहमति और उनकी सहभागिता को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाने पर ज़ोर दिया। आंबेकर ने अंत में कहा कि भारत आज प्रगति की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और दुनिया भारत को नए नज़रिए से देख रही है — ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे देश को अधिक समृद्ध, सशक्त और स्वाभिमानी बनाने में अपना योगदान दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। एआई और डिजिटल समानता जैसे समकालीन विषयों को उठाना यह दर्शाता है कि संघ अब शहरी और शिक्षित युवाओं तक अपनी पहुँच बढ़ाने पर गंभीरता से काम कर रहा है। हालाँकि, महिला सुरक्षा पर 'परिवार में संवाद' वाला नुस्खा संरचनात्मक सुधारों की माँग करने वाले विमर्श से कहीं कम पड़ता है। असली सवाल यह है कि क्या ये संवाद ज़मीनी नीतिगत बदलाव में तब्दील होंगे, या शताब्दी वर्ष की सुर्खियों तक ही सीमित रहेंगे।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील आंबेकर ने कानपुर युवा संवाद में क्या कहा?
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत केवल राजनीति से नहीं, बल्कि एकता के धर्म से जुड़ा है। उन्होंने युवाओं से एआई के दौर में अपने मानवीय विवेक को सर्वोपरि रखते हुए देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
आरएसएस शताब्दी वर्ष युवा संवाद कहाँ और कब हुआ?
यह युवा संवाद 25 अगस्त 2026 को कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित हुआ। यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
एआई और भविष्य की नौकरियों पर आंबेकर का क्या मत है?
आंबेकर ने कहा कि एआई सूचना संसाधित कर सकता है, लेकिन किस परिस्थिति में क्या निर्णय लेना समाज और मानव कल्याण के हित में होगा, यह विवेक केवल मनुष्य के पास है। उन्होंने युवाओं को मुख्य पढ़ाई के साथ दो से चार अतिरिक्त व्यावहारिक और तकनीकी कौशल सीखने की सलाह दी।
महिला सुरक्षा पर आंबेकर ने क्या सुझाव दिए?
आंबेकर ने कहा कि बदलाव की शुरुआत वहीं से होनी चाहिए जहाँ हम खड़े हैं। उनके अनुसार केवल कानून से अपराध नहीं रुकता — परिवार और समाज में सुरक्षा, सम्मान और अच्छे व्यवहार को लेकर निरंतर संवाद और बचपन से अनुकूल वातावरण ज़रूरी है।
छोटे शहरों के विद्यार्थियों के लिए आंबेकर ने क्या कहा?
आंबेकर ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने शिक्षा तक पहुँच को काफी आसान बना दिया है और बड़े शहर या अंग्रेज़ी माध्यम को सफलता की अनिवार्य शर्त नहीं मानना चाहिए। एकल विद्यालय जैसे प्रयासों के ज़रिए दूरदराज़ के क्षेत्रों तक शिक्षा पहुँचाने का काम जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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