संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को समाज से मिल रहा प्रेरणादायी समर्थन: सीआर मुकुंद
सारांश
Key Takeaways
- संघ ने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को लेकर समाज से व्यापक समर्थन प्राप्त किया है।
- गृह संपर्क अभियान के तहत 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंच बनाई गई है।
- बैठक में 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है।
- संघ का लक्ष्य संगठन का विस्तार और समाज में समरसता को बढ़ावा देना है।
- बैठक में कई प्रमुख व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी गई।
पट्टीकल्याणा (समालखा, हरियाणा), 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक शुक्रवार को माधव सृष्टि परिसर में औपचारिक रूप से आरंभ हो गई। सुबह नौ बजे सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक का उद्घाटन किया। इस बैठक में देशभर से लगभग 1400 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
प्रेस वार्ता में सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने जानकारी दी कि संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को समाज से मिल रहा प्रतिसाद अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि समाज की सज्जन शक्ति ने स्वयंसेवकों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया है। शताब्दी वर्ष का यह कार्यक्रम 2 अक्टूबर 2025 को नागपुर में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में शुरू हुआ था। इसके एक दिन पूर्व भारत सरकार ने संघ के नाम पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया था।
मुकुंद ने बताया कि शताब्दी वर्ष में दो प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पहला, संगठन का विस्तार करना और दूसरा, समाज की सज्जन शक्ति को सद्भाव एवं समरसता के लिए संगठित करना। इसी दिशा में चल रहे गृह संपर्क अभियान के तहत अब तक देश के कई प्रांतों में 10 करोड़ से अधिक घरों और 3 लाख 90 हजार गांवों तक संपर्क स्थापित किया जा चुका है। अन्य प्रांतों में यह कार्य जारी है।
यह विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि संपर्क के दौरान किसी भी वर्ग या समुदाय के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं रखा गया। केरल का उदाहरण लेते हुए, वहां 55 हजार से अधिक मुस्लिम परिवारों और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों के साथ स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर संवाद किया। सभी परिवारों ने स्वयंसेवकों का दिल से स्वागत किया।
देशभर में अब तक 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है, जिसमें लगभग 3.5 करोड़ लोग शामिल हुए। ये सम्मेलन शहरों, गांवों, जनजातीय इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में आयोजित हुए। अरुणाचल प्रदेश के एक दूर-दराज के क्षेत्र में हुए सम्मेलन में लोगों ने पहली बार इतनी आत्मीयता का अनुभव किया। इन सम्मेलनों के माध्यम से समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी गर्व, परिवार व्यवस्था की मजबूती और नागरिक कर्तव्यों की जागरूकता जैसे पंच परिवर्तन का संदेश दिया जा रहा है।
सीआर मुकुंद ने बताया कि प्रमुख नागरिकों के साथ संगोष्ठियों का आयोजन भी किया गया है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत स्वयं चार महानगरों और कई राज्यों की राजधानियों में जाकर लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। केवल चार महानगरों के कार्यक्रमों में एक हजार से अधिक सवालों के जवाब दिए गए, जिसमें 20 घंटे से ज्यादा समय लगा।
संघ कार्य के विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में 3,943 नए स्थानों पर कार्य प्रारंभ हुआ है। शाखाओं की संख्या 51,740 से बढ़कर 55,683 हो गई है, और शाखाओं की कुल संख्या 83,129 से बढ़कर 88,949 हो गई है। यानी एक वर्ष में 5,820 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। संघ का लक्ष्य है कि गांवों और कस्बों में अधिक से अधिक शाखाएं चलें ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार के शांति और विकास के प्रयासों का संघ ने स्वागत किया है। मणिपुर में शांति बहाल होने पर भी संतोष व्यक्त किया गया और वहां स्वयंसेवकों की भूमिका की सराहना की गई। बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चिंता जताई गई और आशा व्यक्त की गई कि वहां हालात शीघ्र बेहतर होंगे।
मुकुंद जी ने बैठक की शुरुआत में दिवंगत हुए कई प्रमुख व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी, जिनमें सतगुरुदास महाराज, डॉ. माधव गाडगिल, शिवराज पाटिल, सालुमरदा थिमक्का, केएन दीक्षित, अजीत पवार, धर्मेंद्र, एवीएम सरवनन, स्वराज कौशल, विनय हेगड़े, आर नल्लकणु और प्रफुल्ल गोविंद बरुआ जैसे नाम शामिल हैं।
संघ का शताब्दी वर्ष कार्यक्रम अक्टूबर 2026 तक विभिन्न गतिविधियों के साथ जारी रहेगा। संघ का उद्देश्य समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर और प्रदीप जोशी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।