1 अगस्त 2026
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भाजपा ने कर्नाटक के 'कचरे से आजादी' अभियान पर उठाए सवाल, बेंगलुरु में गड्ढों से मौतों का मुद्दा उठाया

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भाजपा ने कर्नाटक के 'कचरे से आजादी' अभियान पर उठाए सवाल, बेंगलुरु में गड्ढों से मौतों का मुद्दा उठाया

सारांश

कर्नाटक सरकार ने 'कचरे से आजादी' अभियान लॉन्च किया, तो भाजपा ने पलटवार करते हुए पूछा — बेंगलुरु को गड्ढों से आजादी कब मिलेगी? विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मानसून में गड्ढों को 'मौत का जाल' बताया और हजारों करोड़ खर्च के बावजूद सड़क हालत न सुधरने पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

भाजपा ने 1 अगस्त को कर्नाटक सरकार के 'फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट' अभियान की आलोचना की।
अशोक ने 'अभी गड्ढे भरें बेंगलुरु' अभियान की माँग की।
भाजपा का आरोप — डी.के.
शिवकुमार ने तीन वर्ष बेंगलुरु विकास मंत्री रहते हजारों करोड़ रुपये खर्च किए, फिर भी सड़कें नहीं सुधरीं।
मानसून में गड्ढों को 'मौत का जाल' बताया गया — दुर्घटनाएँ, चोटें और जानें जाने के आरोप।
शिवकुमार और मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने एस्टीम मॉल के पास अभियान का उद्घाटन किया।

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 1 अगस्त को राज्य की कांग्रेस सरकार के नवलॉन्च 'फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट' (कचरे से आजादी) अभियान पर तीखा हमला बोला और माँग की कि सरकार पहले बेंगलुरु की सड़कों पर जानलेवा गड्ढों की समस्या का समाधान करे। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार प्रचार-प्रसार को जनसुरक्षा से ऊपर रख रही है।

मुख्य घटनाक्रम

एस्टीम मॉल के निकट मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने शनिवार को यह सफाई अभियान औपचारिक रूप से लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य शहर में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता को बेहतर बनाना है। इसी अवसर पर भाजपा ने पलटवार करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।

विपक्ष के नेता अशोक के आरोप

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने एक बयान में कहा, 'तुरंत बेंगलुरू साफ' तो ठीक है, लेकिन आप 'अभी गड्ढे भरें बेंगलुरु' अभियान कब शुरू करेंगे? बेंगलुरु को गड्ढों से आजादी कब मिलेगी?'

अशोक ने आरोप लगाया कि डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने से पूर्व तीन वर्षों तक बेंगलुरु विकास मंत्री रहे और इस दौरान सड़क मरम्मत पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर का रोड इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं सुधरा।

गड्ढे बने 'मौत का जाल' — भाजपा का दावा

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मानसून के दौरान बेंगलुरु की सड़कों पर गड्ढे 'मौत का जाल' बन जाते हैं, जिनसे दुर्घटनाएँ, चोटें और जानें जाती हैं। उनके अनुसार, वाहन चालकों को गड्ढों से बचकर निकलने में भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है, जबकि दोपहिया वाहन सवार प्रतिदिन असुरक्षित सड़कों पर जोखिम उठाने को मजबूर हैं।

सरकार की प्राथमिकता पर सवाल

अशोक ने कहा, 'बेंगलुरु को सुरक्षित सड़कों की जरूरत है, पब्लिसिटी कैंपेन की नहीं।' उन्होंने माँग की कि सरकार दिखावटी प्रचार अभियानों की जगह शहरभर में गड्ढे भरने के ठोस काम पर ध्यान केंद्रित करे।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बेंगलुरु में मानसून की बारिश जारी है और सड़क सुरक्षा एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। भाजपा के इस हमले के बाद कांग्रेस सरकार पर दोनों मोर्चों — स्वच्छता और सड़क अवसंरचना — पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बेंगलुरु की गड्ढा समस्या वास्तव में वर्षों पुरानी और दलगत सीमाओं से परे है — भाजपा के अपने शासनकाल में भी यह मुद्दा अनसुलझा रहा। असली सवाल यह है कि हजारों करोड़ रुपये के बार-बार आवंटन के बावजूद जवाबदेही का कोई सत्यापन-योग्य ढाँचा क्यों नहीं बना। 'कचरे से आजादी' जैसे अभियान जनजागरण के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन जब तक बुनियादी ढाँचे की विफलता से मौतें हो रही हों, तब तक प्रचार-केंद्रित लॉन्च सरकार की प्राथमिकताओं पर स्वाभाविक सवाल खड़े करते हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार का 'फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट' अभियान क्या है?
यह कर्नाटक सरकार द्वारा बेंगलुरु में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता सुधारने के लिए शुरू किया गया अभियान है, जिसे मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने 1 अगस्त को एस्टीम मॉल के पास लॉन्च किया।
भाजपा ने इस अभियान पर क्यों आपत्ति जताई?
भाजपा का आरोप है कि सरकार कचरा सफाई के प्रचार पर ध्यान दे रही है, जबकि बेंगलुरु की सड़कों पर गड्ढों की वजह से दुर्घटनाएँ और मौतें हो रही हैं। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने माँग की कि पहले 'अभी गड्ढे भरें बेंगलुरु' जैसा अभियान चलाया जाए।
आर. अशोक ने डी.के. शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए?
अशोक ने आरोप लगाया कि शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने से पहले तीन साल बेंगलुरु विकास मंत्री रहे और इस दौरान सड़क मरम्मत पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए, फिर भी शहर का रोड इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं सुधरा।
बेंगलुरु में गड्ढों की समस्या कितनी गंभीर है?
भाजपा के अनुसार, मानसून के दौरान बेंगलुरु की सड़कों पर गड्ढे 'मौत का जाल' बन जाते हैं, जिनसे दुर्घटनाएँ, चोटें और मौतें होती हैं। दोपहिया वाहन चालक विशेष रूप से प्रभावित बताए गए हैं।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
मानसून सीजन में सड़क सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा है और भाजपा के इस हमले के बाद कांग्रेस सरकार पर स्वच्छता के साथ-साथ सड़क अवसंरचना पर भी ठोस जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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