कर्नाटक कैबिनेट: विभाग बंटवारे में चार दिन की देरी पर आर. अशोक का कांग्रेस पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शुक्रवार, 7 अगस्त को कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार किया — नए मंत्रियों को शपथ के चार दिन बाद भी विभाग न सौंपे जाने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सीधे सवाल पूछा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अशोक ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी कांग्रेस गुटबाजी और सत्ता की खींचतान में इस कदर उलझी है कि राज्य का प्रशासन ठप पड़ गया है।
मुख्य आरोप और बयान
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए राहुल गांधी को संबोधित करते हुए आर. अशोक ने पूछा — 'क्या कर्नाटक शासन चलाने के लिए एक राज्य है या आपके गुटों के बीच लूटने के लिए कोई साम्राज्य?' उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट विस्तार में ही अंदरूनी खींचतान के कारण पूरे दो महीने लग गए और अब शपथ के चार दिन बाद भी 19 नए मंत्री बिना किसी विभाग के हैं, जबकि कांग्रेस नेता 'मलाईदार विभागों' के लिए लॉबिंग में व्यस्त हैं।
प्रशासनिक ठहराव का आरोप
अशोक ने कहा कि पूरी सरकार ठप पड़ी है क्योंकि कांग्रेस के कर्ता-धर्ता जनता की सेवा करने के बजाय सत्ता के दलालों को खुश करने में लगे हैं। उनके अनुसार किसान, युवा, महिलाएं और कारोबारी एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन सत्ताधारी दल विभागों के बंटवारे और राजनीतिक संरक्षण की आपसी खींचतान में उलझा रहा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा — 'क्या यही वह 'कर्नाटक मॉडल' है, जिसकी आप लोग इतनी डींगें हांकते रहते हैं?'
कांग्रेस के भीतर असंतोष की पृष्ठभूमि
यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर अहम विभागों को लेकर लॉबिंग जारी है। कई विधायक मंत्रिमंडल में जगह न पाने पर नाराजगी जता चुके हैं, हालांकि नाराजगी जताने वाले नेताओं ने पार्टी के साथ रहने की प्रतिबद्धता भी जताई है। शुक्रवार को विभागों के बंटवारे की उम्मीद जताई जा रही थी।
आर. अशोक की माँग
अशोक ने कांग्रेस नेतृत्व से गतिरोध तत्काल खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा — 'आपसी कलह बंद करें। विभाग बांटें और कामकाज शुरू करें।' साथ ही उन्होंने कांग्रेस आलाकमान की 'रिमोट-कंट्रोल पॉलिटिक्स' पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि गुटबाजी न रोक पाने की वजह से कर्नाटक का प्रशासन 'मजाक का पात्र' बन गया है।
आगे क्या
कर्नाटक सरकार पर अब विभागों के त्वरित आवंटन का दबाव है ताकि प्रशासनिक कार्य सामान्य हो सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जितनी देर तक यह गतिरोध जारी रहेगा, विपक्ष को उतना ही राजनीतिक लाभ मिलता रहेगा।