कर्नाटक: सूखाग्रस्त किसानों को ₹25,000 मुआवज़ा दे सरकार — चलवाडी नारायणस्वामी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने 25 सितंबर 2026 को माँग की कि राज्य की कांग्रेस सरकार सूखे से प्रभावित किसानों को ₹25,000 का मुआवज़ा प्रदान करे, जिसमें पहली किस्त के रूप में कम से कम ₹10,000 तत्काल दिए जाएँ। भाजपा नेता ने यह बयान बेंगलुरु में उस वक्त दिया जब विपक्ष, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर सुर्खियों में है।
किसान मुआवज़े की माँग
नारायणस्वामी ने कहा, 'हम किसानों के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।' उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने केंद्र से मदद माँगी है और वे प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 'जहाँ भी ज़रूरत हो' जाने को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए ₹1 करोड़ आवंटित करने का दावा किया है, जबकि विधायक खुद कह रहे हैं कि उन्हें यह राशि अभी तक नहीं मिली।
चुनाव आयोग को हटाने की माँग पर प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्षी माँग पर नारायणस्वामी ने तीखे शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'चुनाव में हार-जीत तो होती रहती है। जो जीतता है वह हमेशा नहीं जीत सकता, और जो हारता है वह ऐसे मुद्दे उठाता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस पहले ईवीएम को दोष देती थी और अब चुनाव आयोग पर निशाना साध रही है, जिसे उन्होंने 'पागलपन भरी बातें' बताया।
राज्य के वित्तीय हालात पर हमला
नारायणस्वामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर 'आर्थिक दिवालियापन' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य के ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को ₹8,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी धन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति को स्वयं मंत्री बायरथी सुरेश ने विधानसभा में स्वीकार किया है। विपक्षी नेता ने आरोप लगाया कि सरकार 'मुफ्त सुविधाओं का नाटक करती है और योजनाओं के नाम पर खजाना खाली करती है।'
सड़कों की बदहाली पर भी निशाना
एक अन्य पोस्ट में नारायणस्वामी ने राज्य में सड़कों की जर्जर हालत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आम लोगों को 'सड़कों पर उतरकर मरम्मत की गुहार लगानी पड़ रही है।' उनके अनुसार, राज्य सरकार केवल 'सम्मानजनक रिश्वत' की बातों पर ध्यान देती है, जनता की समस्याओं की अनदेखी की जाती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में शासन की गुणवत्ता और विपक्ष-सरकार के बीच टकराव अपने चरम पर है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि कर्नाटक में सूखे की स्थिति और राज्य के वित्त को लेकर विधानमंडल में विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। किसान मुआवज़े की यह माँग राज्य की राजनीति में एक अहम मुद्दा बन सकती है, विशेष रूप से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के संदर्भ में। सरकार की प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।