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कुमारस्वामी का आरोप: सूखा राहत पर कर्नाटक सरकार केंद्र से सिर्फ कागज़ी बातचीत कर रही है

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कुमारस्वामी का आरोप: सूखा राहत पर कर्नाटक सरकार केंद्र से सिर्फ कागज़ी बातचीत कर रही है

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने 71वें कर्नाटक राज्योत्सव पर सीधा हमला बोला — राज्य सरकार सूखे पर ₹26,000 करोड़ की माँग कर रही है, लेकिन PM मोदी या गृह मंत्री शाह से मिलने की जहमत नहीं उठाई। गारंटी योजनाओं, बस किराए और दूध के दाम पर भी घेराबंदी — और प्रियंक खड़गे को 'मूर्ख' वाली टिप्पणी पर करारा जवाब।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 6 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में 71वें कर्नाटक राज्योत्सव पर कांग्रेस सरकार की आलोचना की।
आरोप — मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने PM मोदी या गृह मंत्री शाह से व्यक्तिगत मुलाकात नहीं की, केवल पत्राचार हुआ।
सूखा राहत माँग पहले ₹3,000 करोड़ से बढ़कर ₹26,000 करोड़ हो गई, लेकिन सरकार ने केंद्र से सीधी बातचीत नहीं की।
कुमारस्वामी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में राज्य राजस्व से ₹25,000 करोड़ के कृषि ऋण माफी का हवाला दिया।
शक्ति योजना के बाद बस किराए में 33–40 प्रतिशत और दूध में ₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए।
गृह मंत्री प्रियंक खड़गे की 'गाँव का मूर्ख' वाली टिप्पणी पर तीखा पलटवार, सिद्धार्थ ट्रस्ट पर सरकारी ज़मीन दुरुपयोग का आरोप।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 6 नवंबर 2026 को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार सूखा प्रबंधन के मुद्दे पर केंद्र सरकार से केवल औपचारिक संवाद तक सीमित है और किसानों को वास्तविक राहत दिलाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा। उन्होंने यह बात बेंगलुरु के विजयनगर स्थित भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) परिसर में आयोजित 71वें कर्नाटक राज्योत्सव समारोह के अवसर पर मीडिया से बातचीत में कही।

मुख्य आरोप: पत्राचार बनाम व्यक्तिगत पहल

कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार पिछले दो महीनों से केंद्र को केवल मुआवजे की माँग करने वाले पत्र लिखती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और न ही उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर राज्य की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

उन्होंने बताया कि सूखा राहत की माँग पहले ₹3,000 करोड़ थी, जो बाद में बढ़कर ₹26,000 करोड़ हो गई। उनके अनुसार, इतनी बड़ी राशि के लिए केंद्र से सीधी बातचीत आवश्यक थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।

दिल्ली प्रतिनिधिमंडल प्रस्ताव पर सवाल

राज्य सरकार के दिल्ली में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने के प्रस्ताव पर भी कुमारस्वामी ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र को वास्तव में विश्वास में लिए बिना इस तरह का कदम महज़ राजनीतिक प्रदर्शन बनकर रह जाएगा।

अपने कार्यकाल से तुलना

कुमारस्वामी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि जब किसान इसी प्रकार की कठिनाइयों से जूझ रहे थे, तब उन्होंने केंद्र की वित्तीय सहायता की प्रतीक्षा किए बिना राज्य के कर राजस्व से ₹25,000 करोड़ के कृषि ऋण माफ किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने भारत के राष्ट्रपति से व्यक्तिगत रूप से मिलकर ऋण राहत अधिनियम को मंजूरी दिलाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि वर्तमान उपमुख्यमंत्री भी उस समय उनकी सरकार का हिस्सा थे।

गारंटी योजनाओं और दूध किराया बढ़ोतरी पर निशाना

कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं पर हमला करते हुए कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं से हुए नुकसान की भरपाई जनता पर आर्थिक बोझ डालकर की जा रही है। उन्होंने शक्ति योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा देने के बाद बस किराए में 33 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी पर सवाल उठाया।

दूध की कीमत में ₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर उन्होंने कहा कि यदि इसका सीधा लाभ किसानों को मिले तो वह इसका स्वागत करेंगे। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक मूल्य वृद्धि से नंदिनी दूध की बिक्री प्रभावित हो सकती है और निजी डेयरी कंपनियों को बाज़ार में पकड़ मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

प्रियंक खड़गे पर पलटवार

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा कथित तौर पर उन्हें 'गाँव का मूर्ख' और 'बुद्धिहीन व्यक्ति' कहे जाने पर कुमारस्वामी ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "मैं वास्तव में मूर्ख हूँ, क्योंकि मैंने किसानों के ₹25,000 करोड़ के कर्ज़ माफ किए थे।" व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने जोड़ा, "अगर मैं उनकी तरह बुद्धिमान होता, तो उन ₹25,000 करोड़ को सड़कों और अन्य विकास कार्यों पर खर्च करता और 30 से 40 प्रतिशत कमीशन भी लेता।"

उन्होंने खड़गे को अपने आरोप साबित करने की खुली चुनौती दी और कहा कि राजनीति में आने के बाद या मुख्यमंत्री रहते उन्होंने कभी रियल एस्टेट का कोई कारोबार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म उद्योग से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने राजनीति में प्रवेश से पहले बिदादी के पास 45 एकड़ जमीन खरीदी थी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धार्थ ट्रस्ट के नाम पर सरकारी ज़मीन का दुरुपयोग किया गया, जिसमें कलबुर्गी में स्मारक और एयरोस्पेस पार्क के नाम पर भूमि के उपयोग का मामला शामिल है। कुमारस्वामी ने कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले नैतिक मानकों का पालन होना चाहिए। कर्नाटक में सूखे और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर यह विवाद आगे और तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की माँग को केवल फाइलों में दबाए रखना और PM या गृह मंत्री से सीधी बात न करना, वास्तव में एक प्रशासनिक चूक हो सकती है। दूसरी ओर, यह भी उतना ही सच है कि केंद्र की सूखा राहत प्रक्रिया ऐतिहासिक रूप से राज्य की राजनीतिक संबद्धता से प्रभावित होती रही है — इसलिए यह सवाल भी उठता है कि क्या 'व्यक्तिगत मुलाकात' की माँग व्यावहारिक सुझाव है या सियासी जाल।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार सूखा राहत के लिए केंद्र सरकार से केवल पत्राचार कर रही है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने PM मोदी या गृह मंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत रूप से मिलकर राज्य की स्थिति नहीं समझाई।
कर्नाटक ने केंद्र से कितनी सूखा राहत माँगी है?
कर्नाटक की माँग पहले ₹3,000 करोड़ थी, जो बाद में बढ़कर ₹26,000 करोड़ हो गई। कुमारस्वामी के अनुसार, इतनी बड़ी राशि के लिए केंद्र से सीधी बातचीत ज़रूरी थी, जो नहीं हुई।
कुमारस्वामी ने अपने मुख्यमंत्री काल का उदाहरण क्यों दिया?
कुमारस्वामी ने कहा कि अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्होंने केंद्र की प्रतीक्षा किए बिना राज्य के कर राजस्व से ₹25,000 करोड़ के कृषि ऋण माफ किए थे। उन्होंने यह तुलना यह दिखाने के लिए की कि वर्तमान सरकार किसानों के प्रति उतनी प्रतिबद्ध नहीं है।
प्रियंक खड़गे और कुमारस्वामी के बीच विवाद क्या है?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने कथित तौर पर कुमारस्वामी को 'गाँव का मूर्ख' और 'बुद्धिहीन व्यक्ति' कहा। इस पर कुमारस्वामी ने पलटवार किया और खड़गे पर सिद्धार्थ ट्रस्ट के नाम पर सरकारी ज़मीन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
नंदिनी दूध की कीमत बढ़ोतरी पर कुमारस्वामी का क्या कहना है?
कुमारस्वामी ने कहा कि यदि ₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का सीधा लाभ किसानों को मिलता है तो वह इसका स्वागत करेंगे। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक मूल्य वृद्धि नंदिनी की बिक्री घटा सकती है और निजी डेयरी कंपनियों को बाज़ार में फायदा मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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