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डीके शिवकुमार का दावा: संयुक्त राष्ट्र ने भी सराही कर्नाटक की गारंटी योजनाएँ, ₹51,000 करोड़ सालाना खर्च

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डीके शिवकुमार का दावा: संयुक्त राष्ट्र ने भी सराही कर्नाटक की गारंटी योजनाएँ, ₹51,000 करोड़ सालाना खर्च

सारांश

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक साथ दो मोर्चे संभाले — गारंटी योजनाओं में ₹100 करोड़ के दुरुपयोग को स्वीकार करते हुए भी संयुक्त राष्ट्र की सराहना का दावा किया, और केंद्र पर एलपीजी व चावल आपूर्ति को लेकर तीखा हमला बोला। ₹51,000 करोड़ सालाना खर्च वाली ये योजनाएँ अब सियासी और प्रशासनिक दोनों कसौटियों पर परखी जा रही हैं।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 25 मई 2026 को बेंगलुरु में दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र ने कर्नाटक की गारंटी योजनाओं की प्रशंसा की है।
गारंटी योजनाओं में दुरुपयोग के कारण कथित तौर पर ₹100 करोड़ गलत लाभार्थियों के पास गए; प्रत्येक तालुका में समीक्षा जारी।
अन्न भाग्य योजना के तहत चावल वितरण में अनियमितता के लिए शिवकुमार ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर में इस वर्ष कई चरणों में वृद्धि, 1 मई को अकेले ₹993 की बढ़ोतरी।
कर्नाटक सरकार पाँच गारंटी योजनाओं पर सालाना लगभग ₹51,000 करोड़ खर्च कर रही है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 25 मई 2026 को बेंगलुरु में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं की प्रशंसा न केवल देशभर में हुई है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इन्हें सराहा है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी।

गारंटी योजनाओं में दुरुपयोग और समीक्षा

शिवकुमार ने स्वीकार किया कि गारंटी योजनाओं के लाभार्थी रिकॉर्ड में अनियमितताएँ सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी है और दुरुपयोग के कारण कथित तौर पर लगभग ₹100 करोड़ अन्य लोगों के पास चले गए हैं। कुछ मामलों में गलत फोन नंबर दर्ज किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार यह सत्यापित कर रही है कि लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँच रहे हैं या नहीं, और प्रत्येक तालुका स्तर पर समीक्षा की जा रही है। लाभार्थी रिकॉर्ड एकत्र करने के संबंध में चर्चा जारी है।

अन्न भाग्य योजना और केंद्र पर आरोप

पिछले दो महीनों से अन्न भाग्य योजना के तहत चावल वितरण में अनियमितता के आरोपों पर शिवकुमार ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य को चावल उपलब्ध नहीं करा रही है और यह समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं, बल्कि कांग्रेस-शासित अन्य राज्यों में भी है।

एलपीजी और ईंधन कीमतों पर तीखा हमला

शिवकुमार ने व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस वर्ष हुई बढ़ोतरी का विस्तृत ब्यौरा दिया। उनके अनुसार, 1 मार्च को ₹28, 7 मार्च को ₹114.50, 23 मार्च को ₹49, 1 अप्रैल को ₹195 से ₹218 के बीच और 1 मई को ₹993 की वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद केंद्र सरकार ने ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं, जिससे कई होटलों को आंशिक रूप से बंद करना पड़ा है। उन्होंने इसे आम जनता के जीवन पर अभिशाप बताया।

गारंटी योजनाओं का वित्तीय आयाम

शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पाँच गारंटी योजनाओं पर सालाना लगभग ₹51,000 करोड़ खर्च कर रही है। उनका तर्क था कि जहाँ केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार महंगाई बढ़ाकर लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है, वहीं राज्य सरकार इन योजनाओं के ज़रिए उस बोझ को कम करने का प्रयास कर रही है।

आगे क्या

लाभार्थी रिकॉर्ड की तालुका-स्तरीय समीक्षा जारी है और सरकार के अनुसार सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजनाओं में संभावित संशोधन किए जा सकते हैं। गारंटी योजनाओं की विश्वसनीयता और क्रियान्वयन अब राज्य की राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका कोई स्रोत या दस्तावेज़ी आधार प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं दिया गया — यह तथ्य मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है। दूसरी ओर, ₹100 करोड़ के दुरुपयोग की स्वीकृति खुद सरकार की ओर से आई है, जो योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है। ₹51,000 करोड़ सालाना के खर्च और लाभार्थी सत्यापन में चूक का यह संयोग सवाल उठाता है कि क्या पैमाने की महत्वाकांक्षा प्रशासनिक क्षमता से आगे निकल गई है। केंद्र पर चावल आपूर्ति रोकने का आरोप गंभीर है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि के बिना यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की सीमा में ही रहता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीके शिवकुमार ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा गारंटी योजनाओं की सराहना का क्या दावा किया?
शिवकुमार ने 25 मई 2026 को बेंगलुरु में दावा किया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं की प्रशंसा न केवल देशभर में हुई है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इन्हें सराहा है। हालाँकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई विशेष दस्तावेज़ या रिपोर्ट का हवाला नहीं दिया।
कर्नाटक की गारंटी योजनाओं में दुरुपयोग की समीक्षा क्यों हो रही है?
सरकार को पता चला है कि कुछ लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी है और दुरुपयोग के कारण कथित तौर पर ₹100 करोड़ गलत व्यक्तियों के पास चले गए हैं। कुछ मामलों में गलत फोन नंबर दर्ज किए गए, जिससे लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक नहीं पहुँचे। इसलिए प्रत्येक तालुका में लाभार्थी रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।
अन्न भाग्य योजना में चावल वितरण की अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार है?
शिवकुमार ने इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि केंद्र राज्य को चावल उपलब्ध नहीं करा रहा। उनके अनुसार यह समस्या कर्नाटक के अलावा कांग्रेस-शासित अन्य राज्यों में भी है।
कर्नाटक सरकार गारंटी योजनाओं पर कितना खर्च करती है?
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पाँच गारंटी योजनाओं पर सालाना लगभग ₹51,000 करोड़ खर्च करती है। शिवकुमार ने इसे केंद्र की महंगाई नीतियों के मुकाबले आम जनता को राहत देने का प्रयास बताया।
व्यावसायिक एलपीजी की कीमतों में 2026 में कितनी वृद्धि हुई?
शिवकुमार के अनुसार इस वर्ष व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी हुई — 1 मार्च को ₹28, 7 मार्च को ₹114.50, 23 मार्च को ₹49, 1 अप्रैल को ₹195 से ₹218 के बीच और 1 मई को ₹993 की वृद्धि। इस वजह से कई होटलों को आंशिक रूप से बंद करना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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