अन्न भाग्य योजना घोटाला: लोकायुक्त छापे में 35,000 बोरे मिले, BJP ने CM शिवकुमार को ठहराया जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने शनिवार, 13 जून को आरोप लगाया कि राज्य सरकार की प्रमुख 'अन्न भाग्य योजना' के तहत गरीब लाभार्थियों के लिए आवंटित सैकड़ों क्विंटल अनाज की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। यह आरोप बेंगलुरु में लोकायुक्त द्वारा फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के कई गोदामों पर की गई संयुक्त छापेमारी के बाद सामने आए हैं।
छापेमारी में क्या मिला
लोकायुक्त के संयुक्त अभियान में बेंगलुरु के विभिन्न हिस्सों में स्थित FCI गोदामों की जाँच की गई। विजयेंद्र के अनुसार, एक निजी गोदाम में 'अन्न भाग्य' योजना के लोगो वाले 35,000 बोरे बरामद हुए। इसके अलावा, जाँचकर्ताओं को एक ऐसे नेटवर्क का भी पता चला जो राशन के चावल को खुले बाज़ार में बेचने से पहले उसे पॉलिश और रीपैकेज करता था।
विजयेंद्र ने यह भी बताया कि गोदामों में 860 बिना दस्तावेज़ वाले चावल के बोरे मिले, कहीं सीसीटीवी सर्विलांस नहीं था, और इन्वेंट्री प्रबंधन तथा लेखा-जोखा में गंभीर खामियाँ पाई गईं।
विजयेंद्र के आरोप और माँगें
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सीधे संबोधित करते हुए विजयेंद्र ने कहा, "कर्नाटक सरकार को इस बड़े घोटाले के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, जिसमें गरीबों के लिए रखे गए अनाज को कथित तौर पर दूसरी जगह भेजकर अवैध रूप से बेचा जा रहा है।" उन्होंने इस कथित रैकेट में संलिप्त लोगों की तुरंत गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि 'अन्न भाग्य' लोगो वाले बोरों का निजी गोदाम में मिलना और चावल को पॉलिश-रीपैक करने वाले नेटवर्क का खुलासा होना, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत का स्पष्ट संकेत है।
विपक्ष के नेता आर. अशोक का बयान
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बेंगलुरु के अलग-अलग इलाकों में FCI के गोदामों से सैकड़ों क्विंटल 'अन्न भाग्य' चावल और रागी को अवैध रूप से निजी भंडारण सुविधाओं में स्थानांतरित किया गया।
अशोक ने कहा, "गरीबों का पेट भरने के लिए बना चावल कालाबाज़ारी करने वालों के हाथों में जा रहा है। कांग्रेस नेता, जो गरीबों के नाम पर राजनीति करने का दावा करते हैं, वे लाभार्थियों के लिए बने 'अन्न भाग्य' चावल को गैर-कानूनी तरीके से निजी गोदामों में भेजे जाने दे रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये का घोटाला हो रहा है।"
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
कर्नाटक सरकार ने 13 जून तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि 'अन्न भाग्य योजना' कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसके तहत पात्र परिवारों को निःशुल्क अनाज उपलब्ध कराया जाता है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। लोकायुक्त की जाँच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना है।