स्वतंत्रता दिवस 2026: लालकिले पर 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगाँठ, 2,500 कैडेटों ने ज्ञानपथ पर बनाई विशाल आकृति
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150 साल पुरानी विरासत को ऐतिहासिक सलामी दी गई। पहली बार लालकिले पर 'वंदे मातरम' को औपचारिक रूप से गाया गया, जो इस राष्ट्रगीत की डेढ़ सौ वर्षों की यात्रा का उत्सव है। इस भव्य आयोजन में सेना, नौसेना, वायुसेना के कैडेटों और 'मेरा भारत' के स्वयंसेवकों समेत 2,500 प्रतिभागियों ने ज्ञानपथ पर 'वंदे मातरम' की विशाल मानव-आकृति बनाकर इतिहास रचा।
मुख्य घटनाक्रम
लालकिले की प्राचीर के सामने ज्ञानपथ पर सेना, नौसेना और वायुसेना के कैडेटों के साथ-साथ 'मेरा भारत' के स्वयंसेवकों ने मिलकर 'वंदे मातरम' की आकृति बनाई। इस आयोजन में 2,500 लड़के और लड़कियाँ शामिल रहे। समारोह की थीम 'विकसित भारत @2047' को प्रदर्शित करने के लिए ज्ञानपथ पर विशेष दृश्य अवरोधक भी लगाए गए।
प्रधानमंत्री का स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने लालकिले प्रांगण में प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद रक्षा सचिव ने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी का परिचय प्रधानमंत्री से कराया। जीओसी प्रधानमंत्री को सलामी मंच तक ले गए, जहाँ तीनों सेनाओं और दिल्ली पुलिस के संयुक्त दल ने 'जनरल सैल्यूट' दिया और प्रधानमंत्री ने 'गार्ड ऑफ ऑनर' का निरीक्षण किया।
ध्वजारोहण और 21 तोपों की सलामी
कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सहायता की। ध्वजारोहण के साथ ही 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) की ओर से 21 तोपों की सलामी दी गई। स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से सुसज्जित इस सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत ने संभाली। नायब सूबेदार अनुतोष सरकार ने गन पोजीशन ऑफिसर की जिम्मेदारी निभाई।
'वंदे मातरम' की विरासत का महत्त्व
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था और यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक रहा है। इसकी 150 साल पुरानी विरासत को लालकिले पर पहली बार औपचारिक रूप से गाकर सम्मानित करना इस समारोह को अन्य वर्षों से अलग बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य के तहत सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को नई ऊर्जा देने पर बल दिया जा रहा है।
आगे क्या
इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह ने सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के संदेश को केंद्र में रखा है। 'विकसित भारत @2047' की थीम के साथ आयोजित यह कार्यक्रम आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय उत्सवों की दिशा तय कर सकता है।