फर्जी डिटेक्टिव एजेंसी वेबसाइट से ₹1.15 लाख की साइबर ठगी, गाजियाबाद से मां-बेटा गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
साइबर ईस्ट पुलिस ने 29 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक मां-बेटे की जोड़ी को गिरफ्तार किया है, जिन पर एक फर्जी डिटेक्टिव एजेंसी की वेबसाइट संचालित कर एक शिकायतकर्ता से ₹1.15 लाख की साइबर धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोपियों की पहचान 45 वर्षीया पूनम सिंह और उनके 22 वर्षीय बेटे अर्णव सिंह के रूप में हुई है।
मामला कैसे सामने आया
यह मामला तब उजागर हुआ जब भानु प्रताप सिंह ने ऑनलाइन डिटेक्टिव सर्विस की तलाश के दौरान इस फर्जी वेबसाइट से संपर्क किया। वेबसाइट को किसी प्रामाणिक डिटेक्टिव एजेंसी जैसा दिखाने के लिए तैयार किया गया था, जिससे शिकायतकर्ता को उसकी असलियत का अंदेशा नहीं हुआ। जांच और निगरानी सेवाएँ देने के बहाने उनसे ₹1.15 लाख अलग-अलग किस्तों में जमा कराए गए।
ठगी का तरीका और डिजिटल नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, ठगी की समूची रकम पूनम सिंह के नाम पर खुले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते में जमा की गई और बाद में कई अन्य बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी गई। शिकायत मिलने के बाद साइबर ईस्ट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 319(2) और 340 के अंतर्गत ई-एफआईआर दर्ज की गई। गौरतलब है कि यह साइबर अपराध की उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें वैध दिखने वाली वेबसाइटें भोले-भाले नागरिकों को फँसाने का हथियार बनती हैं।
जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया
साइबर ईस्ट पुलिस स्टेशन के एसएचओ इंस्पेक्टर पवन यादव की अगुवाई और ईस्ट जिले की एसीपी (ऑपरेशन्स) अमनदीप कौर की निगरानी में एक विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम ने फर्जी वेबसाइट, संबंधित मोबाइल नंबरों, ई-मेल आईडी, संचार रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का व्यापक तकनीकी विश्लेषण किया। डिजिटल और वित्तीय सुरागों को आपस में जोड़कर आरोपियों का पता गाजियाबाद में लगाया गया, जहाँ छापेमारी की गई।
अर्णव सिंह को पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया; उसके पास से एक लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए गए। पूनम सिंह का मोबाइल फोन भी बरामद हुआ, जिसमें कई नंबर पाए गए — इनमें से एक का उपयोग शिकायतकर्ता से संपर्क के लिए किया गया था। दोनों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस ने बताया कि पूनम सिंह का नाम पहले भी सराय रोहिल्ला पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 420 के तहत दर्ज एक धोखाधड़ी के मामले में सामने आ चुका है। यह तथ्य इस जोड़ी के कथित आपराधिक इतिहास की ओर इशारा करता है। आरोपियों से जुड़े पूरे डिजिटल और वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच अभी जारी है।
नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा सलाह
साइबर ईस्ट पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी ऑनलाइन सेवा के लिए अग्रिम भुगतान करने से पहले वेबसाइट की प्रामाणिकता, सेवा प्रदाता की पहचान, संपर्क नंबर और भुगतान विवरण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य करें। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि डिजिटल युग में एक पेशेवर दिखने वाली वेबसाइट ही विश्वसनीयता की गारंटी नहीं होती — और सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।