दिल्ली पुलिस ने सेक्सटॉर्शन गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार किए, ₹5.80 लाख की ठगी का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 19 जुलाई को एक संगठित सेक्सटॉर्शन-आधारित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों — राजेश (18), कुणाल (22) और इमरान (23) — को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों ने गंगा विहार निवासी एक 44 वर्षीय व्यक्ति को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिये फंसाकर ₹5.80 लाख की ठगी की।
मुख्य घटनाक्रम
6 मई को पीड़ित को एक अज्ञात महिला की व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई, जिसने खुद को उनके किसी सोशल मीडिया परिचित के रूप में पेश किया। महिला ने विश्वास में लेकर पीड़ित को आपत्तिजनक स्थिति में उकसाया और उस दौरान उनकी वीडियो गुप्त रूप से रिकॉर्ड कर ली। इसके बाद कई अज्ञात नंबरों से कॉल आए, जिनमें कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी, सोशल मीडिया अधिकारी और सरकारी अधिकारी बताया।
आरोपियों ने पीड़ित को वीडियो वायरल करने, कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार डराने-धमकाने के कारण पीड़ित ने आरोपियों के बैंक खातों में ₹5.80 लाख ट्रांसफर कर दिए।
जाँच और गिरफ्तारी
जब पीड़ित को धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तो उन्होंने साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल एक विशेष टीम गठित कर तकनीकी और वित्तीय जाँच शुरू की। जाँच में ठगी की रकम का एक हिस्सा राजेश और कुणाल के बैंक खातों तक पहुँचता पाया गया, जिसके आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया।
फरीदाबाद के सेक्टर-53 निवासी आरोपी राजेश को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर कुणाल की पहचान हुई और फिर तीसरे आरोपी इमरान को पकड़ा गया, जो एटीएम से ठगी की रकम निकालने में शामिल था। उसके पास से अपराध में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया।
मेवात से जुड़ा संगठित सिंडिकेट
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि यह गिरोह राजस्थान के मेवात इलाके से संचालित एक संगठित सेक्सटॉर्शन सिंडिकेट से जुड़ा है। गौरतलब है कि मेवात क्षेत्र पहले भी इस तरह के साइबर ठगी नेटवर्क के केंद्र के रूप में सामने आ चुका है। फिलहाल दिल्ली पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
आम जनता पर असर और सावधानी
यह मामला उस बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है जिसमें साइबर अपराधी सोशल मीडिया के ज़रिये पहचान बनाकर पीड़ितों को जाल में फंसाते हैं। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अनजान नंबरों से आई वीडियो कॉल स्वीकार न करना और किसी भी धमकी की स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करना सबसे बड़ा बचाव है।