दिल्ली मस्जिद ध्वस्तीकरण पर हाफिज मोहम्मद जमील हयात बोले — 'बुलडोजर चलाना तकलीफदेह, सरकार रोक लगाए'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के शालीमार बाग में प्रशासन द्वारा एक मस्जिद गिराए जाने के मामले में धार्मिक नेता हाफिज मोहम्मद जमील हयात ने 26 सितंबर 2026 को कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इबादत की जगहों पर बुलडोजर चलाना अत्यंत दर्दनाक है और सरकार को इस पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मस्जिद हो, मंदिर हो या गुरुद्वारा — किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचाने का वे विरोध करते हैं।
हाफिज हयात का बयान
हाफिज मोहम्मद जमील हयात ने कहा, '100-150 वर्ष पुरानी मस्जिदों पर बुलडोजर चलना तकलीफ की बात है। मस्जिद में लोग नमाज पढ़ते हैं। अगर किसी मंदिर को किसी मुस्लिम देश में गिराया जाता है तो हम उसका पूरा विरोध करते हैं। मस्जिदों के साथ सही नहीं हो रहा है। यह अल्लाह का घर है। इससे अच्छा संदेश नहीं जा रहा है।'
उन्होंने सभी दलों की सरकारों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में इबादत के स्थलों को क्षति नहीं पहुँचनी चाहिए। उन्होंने जोड़ा, 'किसी की भी सरकार हो, अगर किसी मस्जिद, मंदिर या गुरुद्वारे को नुकसान पहुँचाया जाएगा तो हम इसका विरोध करते हैं और करते रहेंगे।'
मस्जिद के सामाजिक महत्व पर जोर
हयात ने मस्जिद के सामाजिक और नैतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'यहाँ इंसानियत सिखाई जाती है। मस्जिद में अच्छी बातें सिखाई जाती हैं। मस्जिद ध्वस्त करना गुनाह की बात है।' उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद ध्वस्त होने पर केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि उनके 'हिंदू भाइयों को भी तकलीफ होती है।'
एआईएमआईएम का रुख
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई ने इस मामले को 'बड़ा अन्याय' करार दिया था। उन्होंने कहा था, 'शालीमार बाग में हाल ही में हुई घटना को देखते हुए हम कहते हैं कि मस्जिद को जिस तरह से गिराया गया, वह एक बड़ा अन्याय था।'
जमई के अनुसार, AIMIM की टीम घटनास्थल पर पहुँची और विरोध दर्ज कराया। इसके बाद मस्जिद कमेटी के सदस्य, इमाम और उनके अध्यक्ष भी बैठक में शामिल हुए और अपनी चिंताएँ साझा कीं।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में तथाकथित अतिक्रमण-विरोधी अभियानों के तहत धार्मिक संरचनाओं के ध्वस्तीकरण को लेकर बहस तेज है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय पूर्व में यह स्पष्ट कर चुका है कि कार्यपालिका न्यायपालिका की भूमिका नहीं निभा सकती और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के ध्वस्तीकरण अस्वीकार्य है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना को बढ़ाती हैं।
आगे क्या
हाफिज मोहम्मद जमील हयात ने सरकार से आग्रह किया है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए जाएँ। AIMIM समेत विभिन्न संगठनों द्वारा इस मामले को कानूनी और राजनीतिक मंचों पर उठाए जाने की संभावना है।