शालीमार बाग मस्जिद तोड़े जाने पर मुस्लिम नेताओं का विरोध, AIMPLB बोला- 'रात में बुलडोजर चलाना गलत'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में एक मस्जिद का हिस्सा तोड़े जाने के बाद 23 सितंबर 2026 को मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। नेताओं ने आरोप लगाया कि सड़क चौड़ीकरण और अवैध निर्माण का हवाला देकर मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे मुस्लिम समुदाय में भय का माहौल बन रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि अवैध निर्माण का बहाना बनाकर भाजपा शासन में मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में कोई उल्लंघन था, तो प्रशासन को पूरे सबूतों के साथ दिन में आना चाहिए था, न कि रात के अंधेरे में कार्रवाई करनी चाहिए थी। इलियास ने कहा कि यह सिर्फ एक ढाँचे को तोड़ना नहीं है, बल्कि मुसलमानों में खौफ पैदा करने की कोशिश है।
उल्लेखनीय है कि यह मामला कथित तौर पर न्यायालय में विचाराधीन था। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष शोएब जमाई ने आरोप लगाया कि कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद आधी रात को कार्रवाई की गई।
नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि यह सरकार की 'नफरत की राजनीति' का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'इस सरकार के पास इस वक्त काम गिनाने के लिए कुछ नहीं है। ये सरकार छात्रों के मुद्दों पर घिरी हुई है। अब इनके पास एक सूत्री कार्यक्रम है कि मुस्लिम धार्मिक स्थलों को तोड़िए, बुलडोजर चलाइए, मुसलमानों को प्रताड़ित करिए, तब जाकर लोगों का मुद्दा डायवर्ट हो।' उन्होंने विश्वास जताया कि अदालतें इस मामले का संज्ञान लेंगी।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मलिक मोतसिम खान ने कहा कि यह मामला किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि जयपुर, सहारनपुर और फरीदाबाद में भी मस्जिदों को गिराया जा चुका है, और अब नई दिल्ली में भी यही हुआ है। मोतसिम खान ने कहा कि जब तक अदालत का कोई फैसला नहीं आ जाता, तब तक नगर निगम और संबंधित प्राधिकरणों को कार्रवाई से बचना चाहिए।
AIMIM का दखल और आरोप
शोएब जमाई के अनुसार, दिल्ली में सहारनपुर जैसी घटना को दोहराने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की टीम मौके पर पहुँची और यह सुनिश्चित किया कि पवित्र कुरान को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। जमाई ने आरोप लगाया कि उनके दखल देने पर पुलिस ने गिरफ्तारी का प्रयास किया और पूरे इलाके को भारी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था।
न्यायिक कार्रवाई की माँग
मोतसिम खान ने स्पष्ट किया कि उनके संगठन न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि इसे रोकने की जिम्मेदारी सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका की है। इलियास ने भी इस विषय में कुरान का संदर्भ देते हुए कहा कि जो लोग मस्जिदों में इबादत से रोकते हैं, उन्हें जालिम माना गया है।
आगे क्या
मुस्लिम संगठनों ने न्यायिक हस्तक्षेप की माँग की है। यह देखना होगा कि दिल्ली उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं, खासकर तब जब कार्रवाई कथित तौर पर विचाराधीन मामले के दौरान की गई बताई जा रही है। राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और सामुदायिक तनाव को देखते हुए यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक विस्तार ले सकता है।