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क्या दिल्ली में मुस्लिम बहुल इलाकों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है? : कासिम रसूल इलियास

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क्या दिल्ली में मुस्लिम बहुल इलाकों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है? : कासिम रसूल इलियास

सारांश

दिल्ली में मुस्लिम बहुल इलाकों पर चल रही कार्रवाई को लेकर कासिम रसूल इलियास ने गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या यह एक जानबूझकर की गई कार्रवाई है? आइए जानते हैं उनके विचार और इस संदर्भ में अदालत के निर्णय।

मुख्य बातें

तोड़फोड़ अभियान के खिलाफ उठी आवाजें अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप उमर खालिद का मामला और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय राजनीति और सामाजिक मुद्दों का आपसी संबंध न्यायिक प्रणाली में निष्पक्षता का महत्व

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के तुर्कमान गेट के निकट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आस-पास हुए तोड़फोड़ अभियान पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में कहा कि मस्जिद से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और इस मामले में अदालत द्वारा स्टे ऑर्डर भी जारी किया गया है। इसके बावजूद दिल्ली पुलिस और एमसीडी द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई निंदनीय है और यह कानून के खिलाफ है। दिल्ली में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम बहुल इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। पूरे दिल्ली में कई अवैध इमारतें हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती क्योंकि वे मुसलमानों की नहीं हैं।

जेएनयू में नारेबाजी को लेकर इलियास ने न्यायिक और प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि यह विरोध उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत से जुड़ी सुनवाई को लेकर था। हालांकि, नारे लगाने वालों ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, जो एक अलग मुद्दा है। उनका गुस्सा या विरोध उस तरह का नहीं था, जैसा दिखाया जा रहा है। अब एक खतरनाक पैटर्न बन रहा है, जिसमें किसी भी तरह के विरोध या नारेबाजी पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाती है, जबकि बलात्कारियों और अपराधियों को आसानी से जमानत मिल जाती है। उन्होंने इसे अदालतों के दोहरे रवैये का उदाहरण बताते हुए काबिल-ए-ऐतराज करार दिया।

उमर खालिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर बात करते हुए सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि यह पहली बार है जब सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा सिद्धांत अपनाया है, जो भारत और आपराधिक न्याय प्रणाली के इतिहास में नया है। उन्होंने बताया कि एक ही एफआईआर और एक ही चार्जशीट में, जिसमें एक ही घटना से जुड़े लोग शामिल हैं, उसे कोर्ट ने आरोपियों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया। कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को ‘वैचारिक आर्किटेक्ट’ बताया, जबकि अन्य आरोपियों को ‘फॉलोअर्स’ की श्रेणी में रखा गया। इलियास ने कहा कि पुलिस की चार्जशीट में इस तरह का कोई वर्गीकरण या अंतर नहीं किया गया है, जिससे यह फैसला कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उमर खालिद के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उनके अनुसार, उमर खालिद को केवल दिल्ली दंगों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि दंगों के समय वह न तो दिल्ली में थे और न ही उन्होंने कोई भड़काऊ भाषण दिया था, जिससे हिंसा भड़की हो। इलियास ने कहा कि उमर खालिद ने केवल सीएए और एनआरसी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट अब सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर पाबंदी लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह फैसला कई गंभीर और संवैधानिक सवाल खड़े करता है।

कन्हैया कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि कन्हैया कुमार अब एक राजनेता हैं और किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने के कारण उन पर कई तरह की राजनीतिक मजबूरियां हैं। उनका मानना है कि कन्हैया कुमार को लगता है कि उमर खालिद के मुद्दे पर खुलकर सवाल उठाने से उनके राजनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से, जेएनयू में साथ रहने और 2016 की एफआईआर में दोनों के नाम आरोपी के तौर पर होने के बावजूद, कन्हैया कुमार खुद को इस पूरे मामले से अलग रख रहे हैं। राजनीतिक मजबूरियां उनकी बेड़ियां बन गई हैं। इस स्थिति में शायद वह ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि किसी भी समुदाय के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। सरकार और प्रशासन को सभी नागरिकों के प्रति समान व्यवहार करने की आवश्यकता है। यह जरूरी है कि विवादित मामलों में निष्पक्षता बनाए रखी जाए।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कासिम रसूल इलियास ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मस्जिद के सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और तोड़फोड़ की कार्रवाई निंदनीय है।
क्या दिल्ली में मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है?
हाँ, कासिम रसूल इलियास का मानना है कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से मुस्लिम बहुल इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है।
उमर खालिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हुए नया सिद्धांत अपनाया है।
कन्हैया कुमार का इस मामले में क्या रोल है?
कन्हैया कुमार अब एक राजनेता हैं और उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर सवाल उठाने से परहेज किया है।
क्या इस मामले में कोई ठोस सबूत हैं?
कासिम रसूल इलियास का कहना है कि उमर खालिद के खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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