शालीमार बाग मस्जिद तोड़े जाने पर मौलाना रशीदी का सवाल: दिल्ली के 1070 अवैध मंदिरों पर बुलडोजर क्यों नहीं?
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 23 सितंबर 2026 को दिल्ली प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए, जब शालीमार बाग स्थित मदीना मस्जिद के कथित अवैध विस्तार और आसपास के निर्माणों को मैक्स हॉस्पिटल रोड चौड़ीकरण के नाम पर ध्वस्त किया गया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में 1070 मंदिर भी सरकारी व सड़क की ज़मीन पर अवैध रूप से खड़े हैं, फिर भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
रात में कार्रवाई पर उठाए सवाल
मौलाना रशीदी ने कहा कि यदि कोई निर्माण अवैध है तो उसे रात के अंधेरे में क्यों गिराया जाता है। उन्होंने सहारनपुर की कलेक्टोरेट मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी प्रशासन ने सील करने की बात कहकर रात में करीब तीन-चार बजे मस्जिद को गिरा दिया था, जबकि कथित तौर पर उसके ध्वस्तीकरण का कोई वैध आदेश नहीं था। उनके अनुसार, शालीमार बाग में भी ऐसा ही हुआ।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि प्रशासन के पास वैध ध्वस्तीकरण आदेश हैं, तो दिन के उजाले में कार्रवाई में क्या आपत्ति है। उनके अनुसार, रात में इस प्रकार की कार्रवाई जानबूझकर इसलिए की जाती है ताकि समाज में हिंदू और मुसलमानों के बीच वैमनस्य बढ़ाया जा सके।
1070 अवैध मंदिरों का दावा और RTI का हवाला
मौलाना रशीदी ने दावा किया कि दिल्ली में 1070 ऐसे मंदिर हैं जो अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं और सड़कों व सरकारी ज़मीन पर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक RTI दायर की गई थी, जिसके जवाब में यह जानकारी सामने आई थी, लेकिन उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सरकार पर 'दोहरे मानदंड' अपनाने का आरोप लगाया।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अतिक्रमण विरोधी अभियानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि दिल्ली में मौजूदा सरकार 2024 में सत्ता में आई थी और अब 2026 चल रहा है — मौलाना रशीदी ने सवाल उठाया कि इन डेढ़-दो वर्षों में प्रशासन ने अवैध निर्माणों की पहचान पहले क्यों नहीं की।
AIMIM की प्रतिक्रिया और मौलाना का जवाब
एआईएमआईएम (AIMIM) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई ने इस कार्रवाई को 'सहारनपुर पार्ट-2' बताया था। इस पर मौलाना रशीदी ने कहा कि यह 'पार्ट-2' का मसला नहीं है, असली सवाल यह है कि यदि मस्जिद का निर्माण अवैध था तो वह रातोंरात तो नहीं बनी — कोई भी मस्जिद एक दिन में नहीं खड़ी होती। उनका इशारा था कि प्रशासन वर्षों से इन निर्माणों से अवगत था, फिर भी उसने तात्कालिक कार्रवाई का रास्ता क्यों चुना।
जमुई कांड और बिहार के CM के बयान पर सवाल
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अपराधियों की कोई जाति नहीं होती' — मौलाना रशीदी ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जमुई कांड के आरोपी का 'फुल एनकाउंटर' क्यों नहीं हुआ और अन्य आरोपियों को अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया। उनका आरोप था कि आरोपी के धर्म के आधार पर कार्रवाई में भेदभाव हो रहा है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के खोड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही दिन में चार वारदातें हुईं, जिसमें एकमात्र मुस्लिम आरोपी को मार दिया गया, जबकि तीन हिंदू आरोपी जीवित रहे। उन्होंने इसे सरकार की 'दोहरी नीति' करार दिया।
संवैधानिक अधिकार और आगे की चेतावनी
मौलाना रशीदी ने कहा कि भारत का संविधान, जिसे डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बनाया है, सभी धर्मों को समान अधिकार देता है — हिंदू, मुसलमान, ईसाई और सिख सभी को अपने धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को किसी समुदाय के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मुसलमान अभी शांत है, उसे जगाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता और जो आज इस तरह की कार्रवाइयाँ कर रहे हैं, उन्हें भी भविष्य में इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। धार्मिक और राजनीतिक हलकों में इस बयानबाज़ी के बीच अब देखना यह होगा कि दिल्ली प्रशासन अन्य धर्मस्थलों पर अवैध निर्माण को लेकर क्या रुख अपनाता है।