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शालीमार बाग में 143 अवैध निर्माण ध्वस्त: सुप्रीम कोर्ट आदेश पर दिल्ली सरकार की बड़ी कार्रवाई

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शालीमार बाग में 143 अवैध निर्माण ध्वस्त: सुप्रीम कोर्ट आदेश पर दिल्ली सरकार की बड़ी कार्रवाई

सारांश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली सरकार ने शालीमार बाग के हैदरपुर गांव में 143 अवैध पक्के निर्माणों को ध्वस्त करना शुरू किया। चार दशक पहले अधिग्रहीत इस भूमि पर सड़क संख्या 320 का चौड़ीकरण होगा, जिससे आपातकालीन सेवाओं की राह खुलेगी।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार ने 31 मई 2026 को शालीमार बाग के हैदरपुर गांव में 143 अनाधिकृत पक्के निर्माणों के खिलाफ विध्वंस अभियान शुरू किया।
कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में; भूमि DDA मास्टर प्लान में सड़क संख्या 320 के रूप में नामित।
10 जनवरी 2026 के संयुक्त सर्वेक्षण में 30 मीटर के राइट ऑफ वे में अतिक्रमण की पुष्टि; 10.5 मीटर क्षेत्र अवरुद्ध।
संबंधित भूमि का अधिग्रहण 1959-1961 में शुरू हुआ, कब्जा जुलाई 1980 में लिया गया — यानी चार दशक से अधिक पुराना सरकारी स्वामित्व।
20 मार्च 2026 को भूमि अधिग्रहण कलेक्टर का आदेश; जनवरी 2026 में सार्वजनिक आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं।
सड़क चौड़ीकरण से एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहनों की आवाजाही सुगम होगी और रिंग रोड–आजादपुर–शालीमार बाग कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

दिल्ली सरकार ने 31 मई 2026 (रविवार) को शालीमार बाग के हैदरपुर गांव क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में एक व्यापक विध्वंस अभियान शुरू किया, जिसके तहत 30 मीटर के निर्धारित सार्वजनिक मार्ग पर खड़े 143 अनाधिकृत स्थायी निर्माणों को हटाया जा रहा है। यह कार्रवाई सड़क संख्या 320 के चौड़ीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगी, जो शालीमार बाग रेलवे अंडरब्रिज को आउटर रिंग रोड से जोड़ने वाला एक अहम यातायात गलियारा है।

मुख्य घटनाक्रम

मध्य-उत्तर जिले के जिला मजिस्ट्रेट एसएस परिहार ने बताया कि 10 जनवरी 2026 को किए गए संयुक्त सर्वेक्षण में निर्धारित 30 मीटर के राइट ऑफ वे के भीतर कुल 143 अनाधिकृत पक्के निर्माण चिह्नित किए गए। वर्तमान में सड़क की चौड़ाई मात्र 19.5 मीटर है, जबकि शेष 10.5 मीटर का क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल केवल उन्हीं 10.5 मीटर में कार्रवाई की जा रही है जो अवरुद्ध हैं, ताकि न्यूनतम विस्थापन के सिद्धांत का पालन हो सके और अधिकतम संरचनाओं को बचाया जा सके।

भूमि अधिग्रहण का इतिहास

परिहार के अनुसार, संबंधित भूमि का अधिग्रहण 1959 और 1961 की अधिसूचनाओं के माध्यम से शुरू हुआ था। भूमि अधिग्रहण की घोषणा 1966 में जारी हुई, और अवार्ड संख्या 40/1980-81 तथा 50/1980-81 वर्ष 1980 में घोषित किए गए। भूमि का भौतिक कब्जा जुलाई 1980 में लिया गया और शेष मुआवजा राशि 1981 में जमा कर दी गई। इस प्रकार यह भूमि चार दशक से भी अधिक समय पहले विधिवत सरकारी स्वामित्व में आ चुकी थी।

यह विवादित भूमि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के मास्टर प्लान में सार्वजनिक सड़क के रूप में नामित है। 2025 में DDA, राजस्व विभाग, भूमि एवं भवन विभाग और लोक निर्माण विभाग ने मिलकर टोटल स्टेशन मेथड (TSM) तकनीक से भूमि का वैज्ञानिक सीमांकन किया।

आम जनता पर असर

परिहार ने बताया कि यह मार्ग रिंग रोड, आजादपुर, शालीमार बाग और आसपास के बड़े आवासीय, वाणिज्यिक एवं संस्थागत क्षेत्रों को जोड़ता है। अतिक्रमण के चलते इस सड़क पर नियमित रूप से यातायात जाम की स्थिति बनती है और एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहनों तथा अन्य आपातकालीन सेवाओं के आवागमन में गंभीर बाधा उत्पन्न होती है। सड़क चौड़ीकरण से अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और विकासशील प्रशासनिक परिसरों तक पहुंच सुगम होगी।

कानूनी प्रक्रिया और नोटिस

जनवरी 2026 में प्रभावित व्यक्तियों से आपत्तियां आमंत्रित करते हुए एक सार्वजनिक सूचना जारी की गई, जिसे प्रमुख समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किया गया। सभी आपत्तियों पर विचार के बाद भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा 20 मार्च 2026 को औपचारिक आदेश पारित किया गया।

क्या होगा आगे

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विध्वंस अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक नामित क्षेत्र के सभी 143 अनाधिकृत निर्माण हटाकर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए भूमि पूरी तरह उपलब्ध नहीं करा दी जाती। यह कदम दिल्ली के उत्तरी हिस्से में यातायात प्रबंधन को दीर्घकालिक रूप से बेहतर बनाने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह नीति-क्रियान्वयन की विफलता है, न कि कानून की। असली सवाल यह है कि जब भूमि चार दशक पहले सरकारी हो गई थी, तो इतने वर्षों तक निर्माण कैसे होते रहे और किसकी जिम्मेदारी तय होगी। न्यायालय के दबाव के बिना यह कदम उठाया जाता या नहीं — यह दिल्ली के नगर नियोजन तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शालीमार बाग में विध्वंस अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में दिल्ली सरकार शालीमार बाग के हैदरपुर गांव में सड़क संख्या 320 के 30 मीटर के निर्धारित मार्ग पर खड़े 143 अनाधिकृत पक्के निर्माणों को हटा रही है। यह भूमि DDA के मास्टर प्लान में सार्वजनिक सड़क के रूप में नामित है और 1980 से सरकारी स्वामित्व में है।
इस विध्वंस से कितने निर्माण प्रभावित होंगे?
10 जनवरी 2026 के संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार कुल 143 अनाधिकृत स्थायी (पक्के) निर्माण चिह्नित किए गए हैं। प्रशासन ने न्यूनतम विस्थापन के सिद्धांत के तहत फिलहाल केवल 10.5 मीटर के अवरुद्ध क्षेत्र में कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
इस भूमि का अधिग्रहण कब हुआ था?
संबंधित भूमि का अधिग्रहण 1959 और 1961 की अधिसूचनाओं के जरिये शुरू हुआ था। जुलाई 1980 में भूमि का भौतिक कब्जा लिया गया और 1981 में मुआवजा राशि जमा कर दी गई — यानी अधिग्रहण प्रक्रिया चार दशक से भी पहले पूरी हो चुकी थी।
सड़क चौड़ीकरण से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
यह सड़क शालीमार बाग रेलवे अंडरब्रिज को आउटर रिंग रोड से जोड़ती है और रिंग रोड, आजादपुर व शालीमार बाग के आवासीय-वाणिज्यिक इलाकों की कनेक्टिविटी सुधारेगी। अतिक्रमण हटने से एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों की आवाजाही सुगम होगी और नियमित यातायात जाम से राहत मिलेगी।
प्रभावित लोगों को नोटिस दिया गया था?
हां, जनवरी 2026 में प्रभावित व्यक्तियों से आपत्तियां आमंत्रित करते हुए सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी, जो प्रमुख समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुई। सभी आपत्तियों पर विचार के बाद भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 20 मार्च 2026 को औपचारिक आदेश पारित किया।
राष्ट्र प्रेस
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