शालीमार बाग में नाबालिग की मौत: अवैध अतिक्रमण से यातायात खतरे में, CM रेखा गुप्ता ने जताई चिंता
सारांश
Key Takeaways
- शालीमार बाग में शनिवार, 25 अप्रैल को टेम्पो की टक्कर से अंबेडकर नगर, हैदरपुर निवासी एक नाबालिग की मौत हो गई।
- यह दो महीने में दूसरी बड़ी दुर्घटना है — इससे पहले एक पांच वर्षीय बालिका डंपर की चपेट में आकर जान गंवा चुकी है।
- CM रेखा गुप्ता ने अवैध अतिक्रमण को हादसे की वजह बताते हुए पूर्व सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने रोड नंबर 320 पर 140 से अधिक अवैध इकाइयां हटाने का आदेश दिया है।
- क्षेत्र में दो बड़े अस्पताल, शैक्षिक संस्थान और पुलिस प्रतिष्ठान होने से यातायात दबाव अधिक रहता है।
- अवैध कब्जे हटने के बाद आजादपुर से मुकरबा चौक तक का यातायात नए अंडरपास के जरिए सुगम होगा।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग में शनिवार शाम हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना में एक नाबालिग की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क किनारे व्याप्त अवैध अतिक्रमण इस हादसे की प्रमुख वजह है और यदि ये कब्जे समय रहते हटाए जाते तो यह जान बचाई जा सकती थी। यह दो महीने के भीतर इसी इलाके में दूसरी बड़ी दुर्घटना है, जो यहां की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को उजागर करती है।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
शालीमार बाग पुलिस के अनुसार, शनिवार की शाम मोटरसाइकिल पर सवार दो नाबालिग उस क्षेत्र से गुजर रहे थे जहां नाले और सड़क किनारे अवैध निर्माण किए गए हैं। पीछे से आ रहे एक टेम्पो ने मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मारी, जिससे एक नाबालिग की मौके पर ही मृत्यु हो गई। मृतक नाबालिग अंबेडकर नगर, हैदरपुर का निवासी था।
गौरतलब है कि इससे पहले लगभग दो माह पूर्व इसी इलाके में एक तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आने से पांच वर्षीय मासूम बालिका की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह दो त्रासदियां मिलकर यह सवाल खड़ा करती हैं कि पहली घटना के बाद प्रशासनिक सुधार क्यों नहीं हुए।
अवैध कब्जे और हाई कोर्ट का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में इस क्षेत्र के रोड नंबर 320 पर स्थित 140 से अधिक अवैध इकाइयों को हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए दिल्ली सरकार ने स्वयं हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके आधार पर यह आदेश पारित हुआ।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये कब्जे पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में सरकारी भूमि पर किए गए थे, जिससे वर्षों से यातायात अवरुद्ध हो रहा है। स्थानीय निवासी, राहगीर और वाहन चालक — सभी इस अव्यवस्था का खामियाजा भुगत रहे हैं।
इलाके की संवेदनशीलता और यातायात दबाव
शालीमार बाग क्षेत्र में दो बड़े अस्पताल, कई शैक्षिक संस्थान और पुलिस से संबंधित प्रतिष्ठान स्थित हैं, जिसके चलते यहां यातायात का दबाव सामान्य से कहीं अधिक रहता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध कब्जों का बने रहना प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट संकेत है।
दिल्ली सरकार ने इस क्षेत्र में एक बड़ा अंडरपास भी निर्मित किया है, जिसके जरिए आजादपुर से आने वाला यातायात सीधे आउटर रिंग रोड, मुकरबा चौक तक पहुंच सकेगा। अवैध कब्जे हटने के बाद उत्तरी दिल्ली का यातायात प्रवाह काफी सुगम होने की उम्मीद है।
विरोधाभास और जवाबदेही का सवाल
यह विडंबना ही है कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद अवैध कब्जे अभी तक पूरी तरह नहीं हटाए गए और इस बीच एक और जिंदगी चली गई। पहली दुर्घटना — पांच वर्षीय बालिका की मौत — के बाद यदि त्वरित कार्रवाई हुई होती, तो शायद यह दूसरा हादसा रोका जा सकता था।
आलोचकों का कहना है कि न्यायालय के आदेश और सरकारी घोषणाओं के बीच जमीनी क्रियान्वयन की खाई ही ऐसी दुर्घटनाओं को बार-बार जन्म देती है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली प्रशासन इन 140 से अधिक अवैध इकाइयों को कब तक हटाता है और शालीमार बाग के निवासियों को सुरक्षित सड़कें कब मिलती हैं।