वित्त वर्ष 2027 में कमर्शियल वाहन बिक्री रिकॉर्ड 12.4 लाख यूनिट तक पहुंचेगी — क्रिसिल रेटिंग्स
सारांश
Key Takeaways
- क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत का कमर्शियल वाहन उद्योग वित्त वर्ष 2027 में 12.4 लाख यूनिट की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज कर सकता है।
- वित्त वर्ष 2026 में उद्योग में 13 प्रतिशत की मजबूत रिकवरी हुई; FY2027 में विकास दर 5-6 प्रतिशत रहने का अनुमान।
- LCV सेगमेंट (कुल वॉल्यूम का 60%25) में 5-6%25 और MHCV सेगमेंट में 4-5%25 वृद्धि संभावित।
- बस सेगमेंट में 3-4%25 वृद्धि का अनुमान; इलेक्ट्रिक बसों का इलेक्ट्रिफिकेशन सबसे तेज़ गति से बढ़ेगा।
- पश्चिम एशिया के तनाव के कारण निर्यात वृद्धि FY2026 के 17%25 से घटकर FY2027 में 2-4%25 रह सकती है।
- घरेलू बाजार कुल CV वॉल्यूम का 92 प्रतिशत है; जीएसटी कटौती और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च मुख्य चालक।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। क्रिसिल रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कमर्शियल वाहन (CV) उद्योग वित्त वर्ष 2027 में 12.4 लाख यूनिट की ऐतिहासिक बिक्री दर्ज कर सकता है। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2019 के पिछले सर्वोच्च स्तर को पार कर देगा, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, जीएसटी दरों में राहत और ई-कॉमर्स की बढ़ती मांग इस उछाल के प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
रिकवरी की रफ्तार और विकास दर का अनुमान
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2026 में कमर्शियल वाहन उद्योग में 13 प्रतिशत की मजबूत रिकवरी दर्ज की गई। हालांकि इस ऊंचे आधार के चलते वित्त वर्ष 2027 में विकास दर घटकर 5 से 6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह धीमापन कमजोरी नहीं, बल्कि एक परिपक्व और स्थिर बाजार की निशानी है।
घरेलू बाजार इस उद्योग की रीढ़ है और कुल वॉल्यूम का लगभग 92 प्रतिशत हिस्सा देश के भीतर ही खपता है। इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तेजी, स्थिर रिप्लेसमेंट मांग और जीएसटी दरों में कटौती ने खरीदारों की रुचि को नए सिरे से जगाया है।
एलसीवी और एमएचसीवी सेगमेंट की संभावनाएं
क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी के अनुसार, हल्के कमर्शियल वाहन (LCV) — जो उद्योग के कुल वॉल्यूम में करीब 60 प्रतिशत की भागीदारी रखते हैं — ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की बढ़ती जरूरतों के कारण 5 से 6 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ सकते हैं।
मध्यम और भारी कमर्शियल वाहन (MHCV) सेगमेंट में 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। माल ढुलाई की बढ़ती जरूरत और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च इस सेगमेंट को मजबूती देंगे। हालांकि अनुज सेठी ने यह भी कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण अधिक क्षमता वाले वाहनों की ओर बढ़ता रुझान वॉल्यूम वृद्धि की गति को थोड़ा सीमित कर सकता है।
बस सेगमेंट और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती भूमिका
वित्त वर्ष 2027 में बस सेगमेंट में 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और रिप्लेसमेंट मांग इस वृद्धि को गति देगी। क्रिसिल का मानना है कि बसों का सेगमेंट भले ही अभी आकार में छोटा हो, लेकिन इसमें इलेक्ट्रिफिकेशन की रफ्तार किसी भी अन्य कमर्शियल वाहन श्रेणी से तेज़ रहेगी।
यह बात उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की PM-eBus Sewa और FAME-II जैसी योजनाओं ने इलेक्ट्रिक बसों की मांग को नया आयाम दिया है। शहरी परिवहन में हरित ऊर्जा की ओर यह बदलाव दीर्घकालिक रूप से पूरे CV उद्योग की संरचना को प्रभावित करेगा।
निर्यात में अस्थायी रुकावट का अनुमान
क्रिसिल रेटिंग्स की डायरेक्टर पूनम उपाध्याय ने बताया कि निर्यात — जो कुल CV वॉल्यूम का लगभग 8 प्रतिशत है — वित्त वर्ष 2026 के करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि से घटकर वित्त वर्ष 2027 में मात्र 2 से 4 प्रतिशत की धीमी रफ्तार पर आ सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताएं निर्यात की राह में बाधा बन सकती हैं। हालांकि घरेलू मांग की मजबूती इस कमी की भरपाई काफी हद तक कर देगी।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2019 में कमर्शियल वाहन उद्योग ने अपना तत्कालीन सर्वोच्च उत्पादन दर्ज किया था, लेकिन उसके बाद COVID-19 महामारी, चिप की कमी और आर्थिक मंदी ने इस क्षेत्र को गहरी चोट पहुंचाई थी। अब पांच साल बाद उद्योग न केवल उस स्तर पर वापस आ रहा है, बल्कि उसे पार करने की स्थिति में है — यह भारतीय अर्थव्यवस्था की पुनर्जीवन क्षमता का प्रमाण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्याज दरों में नरमी जारी रही और राष्ट्रीय राजमार्ग व लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं, तो वित्त वर्ष 2028 तक यह उद्योग और भी ऊंचे पायदान पर पहुंच सकता है। इलेक्ट्रिक CV का बढ़ता बाजार और स्मार्ट फ्लीट मैनेजमेंट तकनीक इस क्षेत्र की अगली बड़ी कहानी बनने के लिए तैयार है।