शालीमार बाग मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई: SP-कांग्रेस का BJP पर हमला, भारी पुलिस बल तैनात
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मदीना मस्जिद के अवैध विस्तार और आसपास के अतिक्रमण पर प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई ने 23 सितंबर 2026 को तीखा सियासी विवाद खड़ा कर दिया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह कदम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की मंशा से उठाया गया है, जबकि प्रशासन ने इसे मैक्स हॉस्पिटल रोड चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा बताया है।
कार्रवाई का ब्यौरा
देर रात चलाए गए इस अतिक्रमण-हटाओ अभियान में मदीना मस्जिद के अवैध ढाँचे और उसके आसपास बने कई मकानों तथा सड़क पर मौजूद अन्य अनधिकृत निर्माण ध्वस्त किए गए। कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। स्थानीय निवासियों के एक वर्ग ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है, हालाँकि किसी अप्रिय घटना की सूचना अभी तक नहीं मिली है।
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस कार्रवाई पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी देश में लोगों को बांटकर, विविधता में एकता के सिद्धांत को कमजोर करके और सांप्रदायिकता फैलाकर सत्ता में बने रहना चाहती है।' प्रसाद ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में BJP को करारी हार का सामना करना पड़ेगा और अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। उनके अनुसार यदि BJP 403 सीटों में से 50 सीटें भी जीत पाई तो यह देश के लिए बड़ा आश्चर्य होगा।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अपराध की दर बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा। दत्त ने सवाल किया कि नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में लिप्त लोगों पर बुलडोजर क्यों नहीं चलता। उन्होंने राम मंदिर में चोरी के आरोपियों के विरुद्ध भी इसी तरह की कार्रवाई की माँग की और BJP पर केवल हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने का आरोप लगाया।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश में बुलडोजर कार्रवाइयों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट दिशानिर्देश जारी कर चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर यह मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ जब धार्मिक स्थलों से जुड़ी होती हैं तो इन्हें राजनीतिक रंग देना आसान हो जाता है। गौरतलब है कि प्रशासन का रुख यह है कि यह अभियान सड़क चौड़ीकरण की एक तकनीकी जरूरत है, जिसमें धार्मिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं।
आगे की स्थिति
प्रशासन इलाके में हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षाबल मौजूद हैं। यह मामला आने वाले दिनों में विधानसभा और संसदीय स्तर पर भी उठाए जाने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे अपने राजनीतिक एजेंडे से जोड़ चुका है।