क्या दिल्ली के तुर्कमान गेट पर बुलडोजर कार्रवाई उचित है? जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- मलिक मोतासिम खान ने प्रशासन पर धैर्य रखने का जोर दिया।
- तुर्कमान गेट का मामला वक्फ भूमि से जुड़ा है।
- रात में की गई कार्रवाई से समुदाय में भय का माहौल बना।
नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने दिल्ली के तुर्कमान गेट के निकट अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, एमसीडी और अधिकारियों को धैर्य रखना चाहिए।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मलिक मोतासिम खान ने कहा कि तुर्कमान गेट के पास स्थित मस्जिद को लेकर मुस्लिम समुदाय का मानना है कि यह वक्फ की संपत्ति है। मस्जिद के निकट कुछ मुस्लिम परिवारों ने दवाखाना, बारात घर और कुरान की तालीम के लिए कमरे बनाए थे। मस्जिद से जुड़ी एक जगह भी होती है, जहां लोग नमाज के लिए तैयारी करते हैं। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह वक्फ की जमीन है, जबकि सरकार का दावा है कि यह सरकारी भूमि है जिस पर कब्जा किया गया है। यही असली विवाद है।
उन्होंने कहा, "जब मामला कोर्ट में चल रहा है, तो इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई क्यों की गई? यह प्रशासन की ज्यादती है। मान लिया जाए कि अवैध अतिक्रमण था, लेकिन वहां बने वजूखाने और अन्य सुविधाओं पर बातचीत हो सकती थी। रात 1:30 बजे 17 बुलडोजर और ट्रक लाकर सैकड़ों पुलिसवाले खड़े हो गए, जिससे भय का माहौल बना।"
मलिक मोतासिम खान ने पुनः कहा कि प्रशासन को धैर्यपूर्वक काम करना चाहिए और कोर्ट के आदेशों का इंतजार करना चाहिए।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने पत्थरबाजी को लेकर कहा, "जब पुलिस आती है, तो लोगों को लगता है कि उनकी पूजा की जगहों को नष्ट किया जा रहा है। ऐसे माहौल में अफवाहें फैलती हैं कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है या सिर्फ उसके बाहर का अतिक्रमण। जनता में हर प्रकार के लोग होते हैं।"
मलिक मोतासिम खान ने यह भी कहा कि प्रशासन को दिन के समय कार्रवाई करनी चाहिए थी। आपने यह कार्य रात 1:30 बजे किया। इसके अलावा, अधिकारियों को कोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतजार करना चाहिए।