जयपुर: सीबीआई ने बैंक फ्रॉड के मामले में आलोक अग्रवाल को 7 साल की सजा और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया
सारांश
Key Takeaways
- आलोक अग्रवाल को 7 साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना
- बैंक को 5 करोड़ रुपए का नुकसान
- सीबीआई की कड़ी कार्रवाई का उदाहरण
- आरोपियों ने आपराधिक साजिश रची थी
- कोर्ट ने सबूतों के आधार पर निर्णय लिया
जयपुर, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने एक पुरानी बैंक फ्रॉड जांच में एसीजेएम (एसपीई केस) जयपुर ने आलोक अग्रवाल को दोषी ठहराया है। 26 फरवरी 2026 को सुनाए गए फैसले में आलोक अग्रवाल को 7 वर्ष की सश्रम जेल और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। यह मामला 1997 का है, जिसमें विजया बैंक को लगभग 5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
सीबीआई ने 21 नवंबर 1997 को एक सूचना के आधार पर यह मामला दर्ज किया। इसमें आरोपियों में विजया बैंक के ब्रांच मैनेजर एस. आर. लालवानी, एम. आर. शेट्टी, और मेसर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एस. एस. शर्मा और एस. एम. अग्रवाल शामिल थे। जांच में पता चला कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंक से लोन प्राप्त किया और नकली कंपनियों के माध्यम से बिना वास्तविक सामान के लेन-देन दिखाकर धन का हनन किया।
आरोपी विभिन्न माध्यमों से प्राप्त धन को निकालकर कैश में एकत्रित करते थे। इससे उन्हें गलत तरीके से 4,99,71,944 रुपए का लाभ हुआ और बैंक को इसी राशि का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने 28 सितंबर 2001 को एस. एम. अग्रवाल और अरुण अग्रवाल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में 3 अक्टूबर 2002 को आलोक अग्रवाल के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की गई। लंबे ट्रायल के दौरान एस. एम. अग्रवाल का निधन हो गया, जिसके कारण 1 दिसंबर 2016 को उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई। कोर्ट ने अरुण अग्रवाल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
ट्रायल के बाद, माननीय कोर्ट ने आलोक अग्रवाल को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। यह फैसला बैंक फ्रॉड और धन के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सीबीआई की कड़ी कार्रवाई का उदाहरण है। सीबीआई ने इस मामले में मजबूत सबूत प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने सजा सुनाई।