स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी का आरोप: 'कुछ लोगों को देश को डराने में मज़ा आता था', 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 13वाँ संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित किया — यह उनका 13वाँ लगातार स्वतंत्रता दिवस भाषण था। इस अवसर पर उन्होंने पिछले एक दशक की उपलब्धियाँ गिनाते हुए उन तत्वों पर तीखा निशाना साधा, जो उनके अनुसार संकट के समय देश को भयभीत करने में लगे रहे।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'देश को डराना, लोगों को भयभीत और चिंतित रखना — कुछ लोगों को ऐसा करने में बहुत मज़ा आता था।' उन्होंने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट के दौरान फैलाई गई अफवाहों का उल्लेख किया, जिनमें वैक्सीन न मिलने, पेट्रोल-डीजल की कमी और खाद की अनुपलब्धता जैसी भविष्यवाणियाँ शामिल थीं। उन्होंने कहा कि सरकार की पूर्व-नियोजित नीतियों के कारण ये सभी आशंकाएँ निराधार साबित हुईं।
विकास के आँकड़े और दावे
मोदी ने अपने कार्यकाल की तुलनात्मक उपलब्धियाँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले पाइप गैस की सुविधा केवल 70 शहरों में थी, जो अब बढ़कर 700 शहरों तक पहुँच गई है। उस समय यह सुविधा मुश्किल से 20 से 22 लाख घरों तक सीमित थी, जबकि अब 1.75 करोड़ घरों तक पहुँच रही है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उन्होंने दावा किया कि 2014 में देश की सोलर एनर्जी क्षमता मात्र 2 गीगावाट थी, जो आज 160 गीगावाट हो गई है। 'पीएम सूर्य घर, मुफ्त बिजली योजना' के तहत 50 लाख घरों में सोलर एनर्जी अपनाने का माइलस्टोन पार कर लिया गया है।
रेलवे विद्युतीकरण का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि 1925 से लेकर 90 वर्षों में रेलवे नेटवर्क का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा विद्युतीकृत हो पाया था, जबकि पिछले 10 वर्षों में यह आँकड़ा 70 प्रतिशत तक पहुँच गया।
आत्मनिर्भरता और वैश्वीकरण पर रुख
प्रधानमंत्री ने 'आत्मनिर्भरता' की अवधारणा का बचाव करते हुए कहा कि जब उन्होंने इसकी वकालत की थी, तब कुछ लोगों ने वैश्वीकरण के नाम पर इसकी आलोचना की थी। उन्होंने तर्क दिया कि आज दुनिया के अधिकांश देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं और संसाधनों — पेट्रोल, डीजल, खाद, दवाइयाँ, टेक्नोलॉजी चिप्स और यहाँ तक कि भूभाग — को भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि भारत ने समय रहते आत्मनिर्भरता का मार्ग न अपनाया होता, तो इन वैश्विक संकटों का सामना करना कहीं अधिक कठिन होता।
वैश्विक संकटों में भारत की स्थिति
मोदी ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में देश ने कोरोना महामारी और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के युद्धों जैसे अभूतपूर्व संकटों का सामना किया। उन्होंने 'नागरिक देवो भव' के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की पूर्व-तैयारी और नीतिगत दृष्टिकोण के कारण आज देश में गैस, पेट्रोल और यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ अभी भी दबाव में हैं और कई देश ऊर्जा सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आगे की राह
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि देश एक के बाद एक मील के पत्थर हासिल करते हुए आगे बढ़ रहा है। उनका यह भाषण ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे कर रहा है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में नीतिगत रोडमैप तैयार किया जा रहा है।