80वें स्वतंत्रता दिवस पर मोदी का संदेश: 12 साल में भारत की छलांग, मोबाइल उत्पादन 33 गुना, 'विकसित भारत 2047' संकल्प अटल
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत ने विकास की एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार पकड़ी है। उन्होंने दावा किया कि अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प और सामर्थ्य को कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती। यह संबोधन आज़ादी के बाद से अब तक के सबसे व्यापक विकास आँकड़ों की एक श्रृंखला के साथ आया।
उत्पादन और विनिर्माण में ऐतिहासिक वृद्धि
मोदी ने पिछले एक दशक से अधिक की उपलब्धियाँ गिनाते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन करीब 4 गुना बढ़ा है। खादी व ग्रामोद्योग का उत्पादन लगभग 5 गुना हो गया है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में करीब 7 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा है — जो भारत के आत्मनिर्भरता अभियान का प्रतीक बन चुके हैं।
गौरतलब है कि ये आँकड़े सरकार के अपने दावे हैं; स्वतंत्र आर्थिक संस्थाओं द्वारा इनकी पुष्टि अलग से की जानी अपेक्षित है।
डिजिटल क्रांति और नवाचार
डिजिटल क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने बताया कि इंटरनेट उपयोगकर्ता करीब 4 गुना बढ़े हैं। पेटेंट अनुदान की संख्या भी 4 गुना हो गई है और डिजिटल लेन-देन में 100 गुना की छलांग लगाई गई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान का एक मानक बन चुका है।
आम जनता के जीवन पर असर
मोदी ने जन-कल्याण योजनाओं की गति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर साल औसतन 15 गुना तेज़ रफ्तार से 'नल से जल' कनेक्शन दिए गए। गैस कनेक्शन देने की गति हर साल औसतन 6 गुना रही। शौचालय निर्माण की रफ्तार 4 गुना और गरीबों को पक्के घर देने की गति 3 गुना तेज़ रही। ये आँकड़े सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच को रेखांकित करते हैं।
शासन सुधार और आधुनिक बुनियादी ढाँचा
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के शासन तंत्र में भी व्यापक बदलाव आए हैं। सैकड़ों पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है, क्योंकि उनके अनुसार पिछली शताब्दी के कानूनों से 21वीं सदी की प्रगति संभव नहीं है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और सार्वजनिक परिवहन को मज़बूत करने पर भी उन्होंने विशेष ज़ोर दिया।
आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 का संकल्प
मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को केंद्रीय विषय के रूप में रखा। उन्होंने कहा, 'ये सारे आँकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि हम आगे बढ़ने वाले हैं, लेकिन उसके लिए आत्मविश्वास और आत्म-गौरव की ज़रूरत होती है। साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत होना भी बहुत ज़रूरी होता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया में सस्ती और सुलभ चीज़ें उपलब्ध हैं, किंतु बाहरी निर्भरता से देश का सामर्थ्य नहीं बनता। 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने का लक्ष्य इसी आत्मनिर्भरता की नींव पर टिका है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का अवसर दे रहे हैं।