राम मंदिर विवाद: मंत्री अनिल राजभर का अखिलेश पर पलटवार — 'औरंगजेब की बात करने वालों को प्रभु नहीं बुलाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने 29 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के राम मंदिर दर्शन से जुड़े बयान पर तीखा पलटवार किया और कहा कि जो लोग औरंगजेब और बाबर का महिमामंडन करते हैं, उन्हें प्रभु श्रीराम कभी नहीं बुलाएंगे। यह बयान उस समय आया जब अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन के सवाल पर कहा था कि 'जब भगवान बुलाते हैं, तभी कोई दर्शन के लिए जाता है।'
अखिलेश यादव का विवादित बयान
सपा प्रमुख अखिलेश यादव से जब मीडिया ने पूछा कि वे राम मंदिर, अयोध्या में दर्शन कब करने जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि भगवान खुद बुलाते हैं, तब जाते हैं। उनके इस कथन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने सनातन धर्म पर सवाल उठाने के रूप में व्याख्यायित किया।
मंत्री राजभर का पलटवार
मंत्री अनिल राजभर ने कहा, 'मसूद की मजार को सजाने वाले और बाबर तथा औरंगजेब की बात करने वालों को प्रभु श्रीराम कैसे बुलाएंगे। जिन लोगों ने सनातन का हमेशा से अपमान किया, उन्हें प्रभु बुलाएंगे भी नहीं।' उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के पास दर्शन की 'हिम्मत नहीं है' क्योंकि ऐसा करने पर उनके सहयोगी नाराज हो जाएंगे।
राजभर ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव का बयान 'भगवान पर सवाल खड़े करना' है और इससे उनकी मानसिकता स्पष्ट होती है। उनके अनुसार, 'समाजवादी पार्टी ने कभी सनातन की बात नहीं की। उनकी चालाकी और मक्कारी भरी टिप्पणी को सनातनी भी समझता है और यूपी का सम्मानित नागरिक भी।'
इंडिया ब्लॉक और सपा पर निशाना
मंत्री राजभर ने इंडिया ब्लॉक की बैठक में अखिलेश यादव की अनुपस्थिति को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक का कोई वजूद नहीं है — न पश्चिम बंगाल के चुनाव में दिखा, न दिल्ली में, न हरियाणा में। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच खींचतान जारी है। 'यह जनता को ठगने वाले लोग हैं जो रोज एजेंडा बदलते हैं', उन्होंने कहा।
योगी का 'गिरगिट' वाला तंज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सपा को 'गिरगिट' कहे जाने के सवाल पर मंत्री राजभर ने मुख्यमंत्री के बयान का पूरी तरह समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री हमेशा यही कहते हैं। इसमें झूठ कहाँ है?' उनके अनुसार सपा नेता रोज नए मुद्दे उठाते हैं और हर जगह राजनीति करने का प्रयास करते हैं।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि राम मंदिर का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से केंद्रीय रहा है। जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से विपक्षी नेताओं पर मंदिर दर्शन को लेकर दबाव बना हुआ है। यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं और सत्तारूढ़ दल सनातन एवं हिंदुत्व के मुद्दों को राजनीतिक धरातल पर बनाए रखना चाहता है।