ओपी राजभर का अखिलेश पर हमला: 'काशी की उपेक्षा करने वाले अब विकास पर सवाल उठा रहे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने कहा कि जिन नेता के शासनकाल में काशी की उपेक्षा हुई, वही आज काशी के विकास पर सवाल उठाने की हिम्मत दिखा रहे हैं।
काशी के विकास पर राजभर का पलटवार
राजभर ने अखिलेश यादव को उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि तब उन्होंने वाराणसी के लिए क्या किया, यह जनता जानती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में काशी में जो कायापलट हुआ है, उसकी तुलना सपा के शासनकाल से करने पर जनता खुद फैसला कर लेगी।
अखिलेश यादव द्वारा काशी में मेट्रो चलाने के दावे पर राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'बेहयाई की भी एक हद होती है।' उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के शासन में विकास की गंगा बह रही है।
मंदिर दर्शन न करने पर निशाना
राजभर ने मथुरा, अयोध्या और काशी में मंदिर दर्शन नहीं करने को लेकर सपा प्रमुख को घेरते हुए कहा कि आखिर उन्हें किस बात का भय है। उन्होंने कहा कि अखिलेश अयोध्या तो जाते हैं, लेकिन हनुमानगढ़ी और भगवान राम के दर्शन नहीं करते; वाराणसी जाने के बावजूद उन्होंने बाबा भोलेनाथ के दर्शन नहीं किए।
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव खुद कहते हैं कि 'राम ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राम हैं', तो फिर दर्शन करने में क्या परेशानी है? यह सवाल उन्होंने सीधे जनता के सामने रखा।
जालीदार टोपी से त्रिशूल तक — राजभर का व्यंग्य
राजभर ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव जालीदार टोपी पहनकर 'अली-अली' करते थे, लेकिन अब वही नेता त्रिशूल और चक्र धारण कर बजरंगबली का नाम लेते हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दिया।
राजभर ने यह भी कहा कि अखिलेश को डर था कि अगर वो मंदिर जाते, तो जालीदार टोपी वाले उन्हें छोड़ते नहीं — यह उनके तुष्टिकरण की राजनीति का सबूत है।
सपा सरकार बनने के दावों पर प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बनाने के बार-बार किए जाने वाले दावों पर राजभर ने एक कहावत का सहारा लिया — 'न नौ मन गेहूं होगा, न राधे गवने जाएंगी।' यह टिप्पणी स्पष्ट तौर पर सपा के चुनावी आत्मविश्वास पर सीधा हमला था।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियों के मद्देनज़र सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। राजभर का यह हमला NDA की ओर से अखिलेश यादव की छवि और उनके शासनकाल के रिकॉर्ड को कठघरे में खड़ा करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।