पर्यटन का GDP में योगदान 2047 तक 10% करने का लक्ष्य: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 11 जुलाई 2026 को जयपुर में अपने आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र की हिस्सेदारी को वर्तमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अंतरिम पड़ाव के रूप में, सरकार 2030 तक यह हिस्सेदारी 7 प्रतिशत तक पहुँचाने की दिशा में काम कर रही है।
पर्यटन क्षेत्र की विकास रणनीति
शेखावत ने पर्यटन को विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख चालक बताया और कहा कि यह क्षेत्र विकास के लाभों को सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुँचाने में सक्षम है। उन्होंने रेखांकित किया कि पर्यटन, परिवहन, हस्तशिल्प, खाद्य एवं पेय पदार्थ और स्थानीय उत्पादों सहित अनेक सहायक क्षेत्रों में रोज़गार व आय के अवसर सृजित करता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि कृषि के बाद पर्यटन में सर्वाधिक रोज़गार पैदा करने की क्षमता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार देशभर में पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ करने और पर्यटक सुविधाओं के उन्नयन को प्राथमिकता दे रही है।
वैश्विक प्रतिष्ठा और पर्यटन पर असर
शेखावत के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक साख का पर्यटन क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जबकि घरेलू पर्यटन ने हाल के वर्षों में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया है। उनके अनुसार, 2014 के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुने से अधिक हो चुका है और प्रभावी मुद्रास्फीति प्रबंधन से लोगों की क्रय शक्ति में वृद्धि हुई है, जिसका सीधा लाभ घरेलू पर्यटन को मिला है।
आम जनता और गरीबी उन्मूलन
शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार की कल्याणकारी पहलों के फलस्वरूप 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रति व्यक्ति आय और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू पर्यटन की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और सरकार इसे एक दीर्घकालिक आर्थिक अवसर के रूप में देख रही है।
राजस्थान में तबादलों पर स्थिति
मीडिया के एक प्रश्न के उत्तर में शेखावत ने बताया कि राजस्थान में लंबे समय से लगी तबादलों की रोक हटने के बाद अनेक कर्मचारियों ने पारिवारिक परिस्थितियों, स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य वास्तविक कठिनाइयों का हवाला देते हुए उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आवेदन संबंधित मंत्रियों के पास विचार के लिए भेजे जा चुके हैं और पात्र कर्मचारियों में से अधिकांश को इस प्रक्रिया का लाभ मिल चुका है।
हालाँकि, कठिन तबादलों या विशेष प्रशासनिक कारणों से जुड़े मामलों में अभी भी आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। शेखावत ने तबादलों की प्रक्रिया को एक नियमित प्रशासनिक कार्यवाही बताया, जो अगले कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि पर्यटन क्षेत्र को लेकर सरकार की यह दीर्घकालिक रणनीति विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी है। अवसंरचना निवेश, डिजिटल पर्यटन प्रोत्साहन और स्थानीय रोज़गार सृजन के माध्यम से इस लक्ष्य को हासिल करने की योजना है। आने वाले वर्षों में सरकार की नीतियाँ और उनका क्रियान्वयन यह तय करेगा कि क्या पर्यटन वाकई भारत की अर्थव्यवस्था का अगला बड़ा स्तंभ बन सकता है।