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नीति आयोग की रिपोर्ट: भारत के पर्यटन क्षेत्र को उड़ान देने के लिए वीजा सरलीकरण और व्यापार सुगमता ज़रूरी

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नीति आयोग की रिपोर्ट: भारत के पर्यटन क्षेत्र को उड़ान देने के लिए वीजा सरलीकरण और व्यापार सुगमता ज़रूरी

सारांश

नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि भारत के पास पर्यटन की अपार संपदा है — पर वीजा जटिलताएँ और संस्थागत अक्षमताएँ इसे पीछे खींच रही हैं। FY24 में ₹15.73 लाख करोड़ का योगदान और 8.46 करोड़ नौकरियों के बावजूद, वैश्विक बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी 1.5% से भी कम है।

मुख्य बातें

नीति आयोग ने 30 जून 2026 को पर्यटन क्षेत्र पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें वीजा सरलीकरण और व्यापार सुगमता को प्राथमिकता बताया।
वित्त वर्ष 2023-24 में पर्यटन क्षेत्र ने जीडीपी में ₹15.73 लाख करोड़ ( 170 अरब डॉलर ) का योगदान दिया — कुल अर्थव्यवस्था का 5.22% ।
क्षेत्र ने अनुमानित 8.46 करोड़ लोगों को रोज़गार दिया; पिछले पाँच वर्षों में 20% की बढ़ोतरी।
2024 में 2.9 अरब घरेलू पर्यटकों ने यात्राएँ कीं, जो 2019 के 2.3 अरब के रिकॉर्ड से अधिक।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से 35 अरब डॉलर की कमाई, लेकिन वैश्विक हिस्सेदारी 1.5% से भी कम।
भारतीयों का विदेश यात्रा खर्च महामारी-पूर्व स्तर से 15% अधिक — घरेलू माँग का बड़ा हिस्सा बाहर जा रहा है।

नीति आयोग ने 30 जून 2026 को एक विस्तृत रिपोर्ट जारी कर स्पष्ट किया कि भारत के पर्यटन क्षेत्र की वास्तविक क्षमता तभी उजागर होगी जब वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और व्यापार में आसानी सुनिश्चित की जाए। रिपोर्ट में कहा गया कि मांग या संसाधनों की नहीं, बल्कि अनुकूल नीतिगत माहौल की कमी ही इस क्षेत्र की सबसे बड़ी बाधा है।

पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक योगदान

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के पर्यटन क्षेत्र ने ₹15.73 लाख करोड़ (170 अरब डॉलर) का योगदान देश की जीडीपी में दिया, जो कुल अर्थव्यवस्था का 5.22 प्रतिशत है। इसके साथ ही इस क्षेत्र ने अनुमानित 8.46 करोड़ लोगों को रोज़गार दिया — पिछले पाँच वर्षों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

घरेलू पर्यटन इस विकास का मुख्य आधार रहा है। 2024 में 2.9 अरब घरेलू पर्यटकों ने यात्राएँ कीं, जो 2019 के महामारी-पूर्व उच्चतम स्तर 2.3 अरब से भी अधिक है।

विरासत और विविधता: भारत की ताकत

भारत के पास पर्यटन की दृष्टि से असाधारण संपदा है — 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, 106 राष्ट्रीय उद्यान और 18 बायोस्फीयर रिज़र्व। इसके अलावा तीर्थयात्रा और वेलनेस पर्यटन के स्थापित केंद्र भी देश की विशिष्ट पहचान बनाते हैं। बावजूद इसके, वैश्विक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भारत की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत से भी कम है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन: संभावना और खाई

2024 में भारत में 2 करोड़ से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए और इससे लगभग 35 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई, जो 2023 की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि वास्तविक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या — 2024 में लगभग 1 करोड़ — महामारी-पूर्व स्तर से नीचे है और थाईलैंड, मलेशिया व वियतनाम जैसे देशों की तुलना में काफी कम।

यह ऐसे समय में चिंताजनक है जब भारतीय यात्रियों द्वारा विदेश यात्रा पर खर्च महामारी-पूर्व स्तर से लगभग 15 प्रतिशत अधिक हो चुका है। रिपोर्ट में कहा गया, "यह अंतर बताता है कि यात्रा की माँग तो मज़बूत है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू पर्यटन इकोसिस्टम के बजाय अंतरराष्ट्रीय यात्रा से पूरा हो रहा है।"

बाधाएँ और नीतिगत सिफारिशें

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि भारत का पर्यटन क्षेत्र आर्थिक विकास, रोज़गार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने की अनूठी स्थिति में है। उन्होंने स्पष्ट किया, "रिपोर्ट का एक मुख्य निष्कर्ष यह है कि भारत के पर्यटन क्षेत्र के सामने चुनौती माँग या संसाधनों की उपलब्धता की नहीं, बल्कि अनुकूल माहौल बनाने की है। यह अंतर नियमों की जटिलता, बिखरी हुई संस्थागत प्रक्रियाओं और प्रक्रियागत अक्षमताओं के कारण है।"

गौरतलब है कि रिपोर्ट में बुनियादी ढाँचागत बाधाओं को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया गया है, जो भारत की पर्यटन संपत्तियों और माँग को वास्तविक परिणामों में बदलने की क्षमता को सीमित करती हैं। वीजा प्रक्रियाओं को सुगम बनाना, संस्थागत समन्वय और व्यापार सुगमता इस दिशा में तत्काल ज़रूरी कदम बताए गए हैं।

आगे की राह

नीति आयोग की यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करती है। यदि संस्थागत सुधार और वीजा सरलीकरण को प्राथमिकता दी गई, तो भारत वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यवस्था की है — और यही बात पिछले एक दशक से कही जा रही है। असली सवाल यह है कि क्या इस बार नीतिगत सिफारिशें केवल रिपोर्ट तक सीमित रहेंगी या वीजा-ऑन-अराइवल विस्तार और एकल-खिड़की मंज़ूरी जैसे ठोस कदमों में बदलेंगी। भारतीयों का विदेश यात्रा खर्च 15% बढ़ना यह भी बताता है कि अनुभव की माँग है — बस वह अनुभव देश के भीतर नहीं मिल पा रहा।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग की पर्यटन रिपोर्ट 2026 में क्या कहा गया है?
नीति आयोग ने 30 जून 2026 को जारी रिपोर्ट में कहा कि भारत के पर्यटन क्षेत्र की मुख्य चुनौती माँग की नहीं, बल्कि नियमों की जटिलता और संस्थागत अक्षमताओं की है। रिपोर्ट में वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने और व्यापार सुगमता सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
भारत के पर्यटन क्षेत्र का जीडीपी में कितना योगदान है?
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के पर्यटन क्षेत्र ने जीडीपी में ₹15.73 लाख करोड़ (170 अरब डॉलर) का योगदान दिया, जो कुल अर्थव्यवस्था का 5.22 प्रतिशत है। इस क्षेत्र ने अनुमानित 8.46 करोड़ लोगों को रोज़गार भी दिया।
2024 में भारत में कितने अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए?
2024 में भारत में कुल मिलाकर 2 करोड़ से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए और इससे लगभग 35 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई, जो 2023 की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। हालाँकि, वास्तविक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या लगभग 1 करोड़ रही, जो महामारी-पूर्व स्तर से अभी भी नीचे है।
भारत में घरेलू पर्यटन की स्थिति कैसी है?
2024 में 2.9 अरब घरेलू पर्यटकों ने यात्राएँ कीं, जो 2019 के महामारी-पूर्व रिकॉर्ड 2.3 अरब से भी अधिक है। घरेलू पर्यटन पिछले पाँच वर्षों में 20 प्रतिशत बढ़ा है और यह क्षेत्र के विकास का मुख्य आधार बना हुआ है।
भारत का पर्यटन थाईलैंड और मलेशिया से पीछे क्यों है?
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, नियमों की जटिलता, बिखरी हुई संस्थागत प्रक्रियाएँ और प्रक्रियागत अक्षमताएँ भारत को थाईलैंड, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों से पीछे रखती हैं। वैश्विक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भारत की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत से भी कम है।
राष्ट्र प्रेस
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