भारत में 300 करोड़ घरेलू यात्राएं: पर्यटन मंत्री शेखावत बोले — वैश्विक संकटों का असर नहीं पड़ेगा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भारत में पिछले एक वर्ष में लगभग 300 करोड़ घरेलू यात्राएं दर्ज की गई हैं, जो देश के पर्यटन उद्योग को वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल से बचाने वाली एक मज़बूत ढाल बन चुकी हैं। नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी इग्नाइट समिट में बोलते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा पर्यटन, सामाजिक कार्यक्रमों, विवाह और चिकित्सा यात्राओं सहित हर प्रकार की घरेलू आवाजाही को समाहित करता है।
300 करोड़ यात्राओं का आंकड़ा क्या दर्शाता है
शेखावत के अनुसार, इस गणना में वह हर यात्रा शामिल है जिसमें कोई व्यक्ति घर से बाहर जाता है, किसी होटल या आवास में रुकता है और वापस लौटता है — चाहे उसका उद्देश्य कुछ भी हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस 300 करोड़ के आंकड़े में कुंभ मेले से जुड़ी यात्राएं शामिल नहीं हैं, जहां अनुमानतः 66 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का दावा किया गया था। यानी वास्तविक संख्या और भी व्यापक हो सकती है।
मंत्री ने कहा, "भारत में घरेलू यात्रा करने वाले लोगों की संख्या — इसमें पर्यटन, सामाजिक कार्यक्रम, शादी या चिकित्सा यात्रा शामिल हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति बाहर जाता है, होटल में ठहरता है और वापस लौटता है, तो उसे एक यात्रा माना जाता है। ऐसी यात्राओं की संख्या 300 करोड़ है।"
वैश्विक संकटों से सुरक्षा कवच
शेखावत ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे वैश्विक व्यवधान अंतरराष्ट्रीय पर्यटन प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, भारत की स्थिति अलग है — यहां घरेलू पर्यटन की मांग इतनी विशाल है कि बाहरी झटकों का असर उद्योग पर सीमित रहता है।
उन्होंने कहा, "भारत उन सौभाग्यशाली देशों में से एक है, जहां घरेलू यात्रा और पर्यटन की ताकत इतनी अधिक है कि इसका हमारे उद्योग पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।" यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक पर्यटन उद्योग भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता के दबाव में है।
विदेशी पर्यटकों की गुणवत्ता बनाम संख्या
मंत्री ने यह भी तर्क दिया कि पर्यटन बाजार की ताकत केवल आगमन संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। थाईलैंड और दुबई जैसे गंतव्यों से तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटक औसतन 10 दिन तक देश में रहते हैं।
उन्होंने कहा, "भारत में लगभग 2 करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं, लेकिन वे औसतन 10 दिन रुकते हैं, जिससे करीब 20 करोड़ पर्यटक-रात्रियों का सृजन होता है।" यह लंबी ठहरान अवधि आर्थिक गतिविधियों — होटल, परिवहन, भोजन, स्थानीय खरीदारी — के लिहाज से अधिक मूल्यवान मानी जाती है।
सभ्यतागत विरासत और बदलता नजरिया
समिट में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत की सभ्यतागत विरासत को नई पहचान मिली है। उनके अनुसार, भारतीयों का इतिहास को देखने का नजरिया बदला है — अब देश को आक्रमणों और पराजयों के चश्मे से नहीं, बल्कि खोजकर्ताओं, साहसी यात्रियों और नवाचारकर्ताओं के देश के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि घरेलू पर्यटन में यह उछाल ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'देखो अपना देश' जैसी पहलों के जरिए आंतरिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह वृद्धि रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मापनीय लाभ पहुंचाती है।