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भारत में 300 करोड़ घरेलू यात्राएं: पर्यटन मंत्री शेखावत बोले — वैश्विक संकटों का असर नहीं पड़ेगा

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भारत में 300 करोड़ घरेलू यात्राएं: पर्यटन मंत्री शेखावत बोले — वैश्विक संकटों का असर नहीं पड़ेगा

सारांश

भारत में एक साल में 300 करोड़ घरेलू यात्राएं — यह महज आंकड़ा नहीं, एक सुरक्षा कवच है। पर्यटन मंत्री शेखावत का कहना है कि यह विशाल आंतरिक आधार भारत को पश्चिम एशिया संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक झटकों से बचाता है — और यही भारतीय पर्यटन की असली ताकत है।

मुख्य बातें

पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि भारत में एक वर्ष में लगभग 300 करोड़ घरेलू यात्राएं दर्ज हुईं।
इस आंकड़े में कुंभ मेले की अनुमानित 66 करोड़ यात्राएं शामिल नहीं हैं।
भारत में 2 करोड़ विदेशी पर्यटक औसतन 10 दिन रुकते हैं, जिससे 20 करोड़ पर्यटक-रात्रियों का सृजन होता है।
मंत्री ने कहा कि घरेलू पर्यटन की मज़बूती पश्चिम एशिया संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक झटकों से उद्योग को बचाती है।
EAC-PM सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की सभ्यतागत विरासत को नई पहचान मिली है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भारत में पिछले एक वर्ष में लगभग 300 करोड़ घरेलू यात्राएं दर्ज की गई हैं, जो देश के पर्यटन उद्योग को वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल से बचाने वाली एक मज़बूत ढाल बन चुकी हैं। नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी इग्नाइट समिट में बोलते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा पर्यटन, सामाजिक कार्यक्रमों, विवाह और चिकित्सा यात्राओं सहित हर प्रकार की घरेलू आवाजाही को समाहित करता है।

300 करोड़ यात्राओं का आंकड़ा क्या दर्शाता है

शेखावत के अनुसार, इस गणना में वह हर यात्रा शामिल है जिसमें कोई व्यक्ति घर से बाहर जाता है, किसी होटल या आवास में रुकता है और वापस लौटता है — चाहे उसका उद्देश्य कुछ भी हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस 300 करोड़ के आंकड़े में कुंभ मेले से जुड़ी यात्राएं शामिल नहीं हैं, जहां अनुमानतः 66 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का दावा किया गया था। यानी वास्तविक संख्या और भी व्यापक हो सकती है।

मंत्री ने कहा, "भारत में घरेलू यात्रा करने वाले लोगों की संख्या — इसमें पर्यटन, सामाजिक कार्यक्रम, शादी या चिकित्सा यात्रा शामिल हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति बाहर जाता है, होटल में ठहरता है और वापस लौटता है, तो उसे एक यात्रा माना जाता है। ऐसी यात्राओं की संख्या 300 करोड़ है।"

वैश्विक संकटों से सुरक्षा कवच

शेखावत ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे वैश्विक व्यवधान अंतरराष्ट्रीय पर्यटन प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, भारत की स्थिति अलग है — यहां घरेलू पर्यटन की मांग इतनी विशाल है कि बाहरी झटकों का असर उद्योग पर सीमित रहता है।

उन्होंने कहा, "भारत उन सौभाग्यशाली देशों में से एक है, जहां घरेलू यात्रा और पर्यटन की ताकत इतनी अधिक है कि इसका हमारे उद्योग पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।" यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक पर्यटन उद्योग भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता के दबाव में है।

विदेशी पर्यटकों की गुणवत्ता बनाम संख्या

मंत्री ने यह भी तर्क दिया कि पर्यटन बाजार की ताकत केवल आगमन संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। थाईलैंड और दुबई जैसे गंतव्यों से तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटक औसतन 10 दिन तक देश में रहते हैं।

उन्होंने कहा, "भारत में लगभग 2 करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं, लेकिन वे औसतन 10 दिन रुकते हैं, जिससे करीब 20 करोड़ पर्यटक-रात्रियों का सृजन होता है।" यह लंबी ठहरान अवधि आर्थिक गतिविधियों — होटल, परिवहन, भोजन, स्थानीय खरीदारी — के लिहाज से अधिक मूल्यवान मानी जाती है।

सभ्यतागत विरासत और बदलता नजरिया

समिट में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत की सभ्यतागत विरासत को नई पहचान मिली है। उनके अनुसार, भारतीयों का इतिहास को देखने का नजरिया बदला है — अब देश को आक्रमणों और पराजयों के चश्मे से नहीं, बल्कि खोजकर्ताओं, साहसी यात्रियों और नवाचारकर्ताओं के देश के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि घरेलू पर्यटन में यह उछाल ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'देखो अपना देश' जैसी पहलों के जरिए आंतरिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह वृद्धि रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मापनीय लाभ पहुंचाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यापक परिभाषा — जिसमें शादियाँ, चिकित्सा यात्राएं और सामाजिक कार्यक्रम भी शामिल हैं — इसे पारंपरिक 'पर्यटन' से अलग करती है। असली सवाल यह है कि इन यात्राओं में से कितनी वास्तव में पर्यटन राजस्व, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में मापनीय योगदान दे रही हैं। वैश्विक संकटों से 'सुरक्षित' होने का दावा तभी सार्थक होगा जब सरकार पर्यटन-विशिष्ट खर्च और रोजगार के आंकड़े अलग से प्रस्तुत करे। बिना इस पारदर्शिता के, यह आंकड़ा नीतिगत सफलता की कसौटी कम और राजनीतिक संदेश अधिक लगता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में 300 करोड़ घरेलू यात्राओं के आंकड़े में क्या शामिल है?
इस आंकड़े में पर्यटन, सामाजिक कार्यक्रम, विवाह, चिकित्सा यात्रा और अन्य सभी उद्देश्यों से की गई घरेलू आवाजाही शामिल है — जहां व्यक्ति घर से बाहर जाकर किसी आवास में रुकता है और वापस लौटता है। पर्यटन मंत्री शेखावत के अनुसार, इसमें कुंभ मेले की यात्राएं शामिल नहीं हैं।
भारतीय पर्यटन वैश्विक संकटों से कैसे सुरक्षित है?
पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, भारत का विशाल घरेलू पर्यटन आधार बाहरी झटकों — जैसे पश्चिम एशिया संघर्ष या रूस-यूक्रेन युद्ध — के प्रभाव को सीमित करता है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन प्रवाह घटने पर भी घरेलू मांग उद्योग को स्थिर रखती है।
भारत में विदेशी पर्यटक कितने दिन रुकते हैं और इसका क्या महत्व है?
शेखावत के अनुसार, भारत आने वाले लगभग 2 करोड़ विदेशी पर्यटक औसतन 10 दिन रुकते हैं, जिससे करीब 20 करोड़ पर्यटक-रात्रियों का सृजन होता है। यह लंबी ठहरान अवधि थाईलैंड और दुबई जैसे गंतव्यों की तुलना में अधिक आर्थिक गतिविधि पैदा करती है।
कुंभ मेले की यात्राएं इस 300 करोड़ के आंकड़े में शामिल हैं?
नहीं। पर्यटन मंत्री ने स्पष्ट किया कि 300 करोड़ का आंकड़ा कुंभ मेले की यात्राओं से अलग है। कुंभ मेले में अनुमानतः 66 करोड़ लोगों के आने का दावा किया गया था, जो इस गणना में शामिल नहीं है।
संजीव सान्याल ने भारत की सभ्यतागत विरासत के बारे में क्या कहा?
EAC-PM सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीयों का अपने इतिहास को देखने का नजरिया बदला है — अब देश को आक्रमणों के बजाय खोजकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के देश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।
राष्ट्र प्रेस
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