सिंगापेन्नु टास्क फोर्स के 100 दिन: 4,231 शिकायतों पर कार्रवाई, 58 महिलाएँ और 94 बच्चे बचाए
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए गठित सिंगापेन्नु स्पेशल टास्क फोर्स ने अपने पहले 100 दिन पूरे कर लिए हैं। राज्य की सामाजिक कल्याण एवं महिला अधिकार मंत्री जगथीश्वरी ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को बताया कि इस अवधि में टास्क फोर्स ने राज्यभर से प्राप्त 4,231 शिकायतों पर मौके पर कार्रवाई की। मंत्री ने इस प्रदर्शन को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह टीवीके सरकार की महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
टास्क फोर्स का गठन और शुभारंभ
मंत्री जगथीश्वरी के अनुसार, टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर संस्थागत स्तर पर तेज़ और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस टास्क फोर्स की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 9 जून 2026 को चेन्नई में इसका औपचारिक शुभारंभ किया था। गौरतलब है कि यह टास्क फोर्स पुलिस, जिला प्रशासन और सामाजिक कल्याण एजेंसियों को एक समन्वित ढाँचे के अंतर्गत काम करने का मंच प्रदान करती है।
मुख्य उपलब्धियाँ: बचाव और रोकथाम
पहले 100 दिनों में टास्क फोर्स ने 58 लापता महिलाओं और 94 बच्चों को खोजकर सुरक्षित बचाया। इसके अतिरिक्त, तत्काल देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले 111 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया। बाल विवाह रोकना भी टास्क फोर्स की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा — इस अवधि में 54 बाल विवाह रोके गए और नाबालिगों को परामर्श तथा अन्य आवश्यक सहायता प्रदान की गई।
सिंगापेन्नु हेल्पलाइन 1091 की भूमिका
महिलाओं की आपात सहायता के लिए शुरू की गई 24×7 सिंगापेन्नु हेल्पलाइन 1091 को 112 आपातकालीन सेवा से जोड़ दिया गया है, जिससे शिकायतों पर प्रतिक्रिया का समय उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। मंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था से पुलिस, सामाजिक कल्याण विभाग, बाल संरक्षण इकाइयों और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हुआ है। जान का खतरा वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि अन्य मामलों में काउंसलिंग, आश्रय और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
आगे की योजना
मंत्री जगथीश्वरी ने बताया कि सरकार संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, हेल्पलाइन के प्रति जनजागरूकता फैलाने और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर संस्थागत जवाबदेही की माँग तेज़ हो रही है, और तमिलनाडु का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।