तमिलनाडु CM विजय ने लॉन्च की 'सिंगप्पेन टास्क फोर्स', महिला-बाल सुरक्षा के लिए ₹354 करोड़ आवंटित
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 9 जून 2026 को चेन्नई के एग्मोर स्थित राजारथिनम स्टेडियम में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए समर्पित विशेष पुलिस इकाई 'सिंगप्पेन टास्क फोर्स' का औपचारिक शुभारंभ किया। राज्य सरकार ने इस इकाई के गठन और संचालन के लिए ₹354 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। विजय ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध होने वाले अधिकांश अपराधों की जड़ में नशीले पदार्थों का दुरुपयोग है।
टास्क फोर्स का ढाँचा और नेतृत्व
सरकार ने 'सिंगप्पेन टास्क फोर्स' की कमान आईजी के. भवानीश्वरी को सौंपी है। इस विशेष इकाई में पुलिस अधीक्षक (एसपी), उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी), निरीक्षक और सहायक निरीक्षक स्तर के अधिकारी तैनात किए गए हैं। इकाई के लिए अलग वर्दी और विशेष प्रतीक चिह्न भी तैयार किया गया है, जो इसे सामान्य पुलिस बल से अलग पहचान देता है।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
मुख्यमंत्री विजय ने कार्यक्रम में कहा, "महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले लगभग सभी अपराधों के पीछे ड्रग्स का दुरुपयोग एक प्रमुख कारण है। वर्षों तक इस समस्या की अनदेखी की गई, जिसके कारण यह गहराई तक फैल गई। यदि हमें सुरक्षित समाज बनाना है तो सबसे पहले इस जड़ को समाप्त करना होगा।" उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि त्वरित जाँच, समय पर चार्जशीट दाखिल करना और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि कानून लागू करते समय निष्पक्षता बरती जाए और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से न फँसाया जाए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और वादे की पूर्ति
गौरतलब है कि 10 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद विजय ने अपने प्रमुख वादों में इस विशेष टास्क फोर्स के गठन को प्राथमिकता दी थी। पदभार संभालते ही उन्होंने इस इकाई के गठन संबंधी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। यह टास्क फोर्स उनके शासन की पहली बड़ी कानून-व्यवस्था संबंधी पहल मानी जा रही है।
दूसरे चरण की योजना
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दूसरे चरण में सिंगप्पेन टास्क फोर्स में 2,500 अतिरिक्त पद सृजित किए जाएंगे, जिससे राज्यभर में इसकी उपस्थिति और प्रभावशीलता और बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि अपराधों को पहले ही रोकना है। यह टास्क फोर्स तमिलनाडु में महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक संस्थागत प्रयास के रूप में देखी जा रही है।