तमिलनाडु: सीएम विजय ने सीएमओ अधिकारियों को सौंपे वित्त, स्वास्थ्य समेत दर्जनभर विभाग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 18 मई 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के वरिष्ठ नौकरशाहों को राज्य के प्रमुख सरकारी विभागों की जिम्मेदारी सौंपी है। यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। चेन्नई से जारी सीएमओ के आदेश में चार वरिष्ठ अधिकारियों को विभागों के अलग-अलग समूह आवंटित किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सीएमओ के आदेश के अनुसार, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं सचिव-1 पी. सेंथिलकुमार को राज्य के सर्वाधिक संवेदनशील और बड़े विभाग सौंपे गए हैं। इनमें वित्त, गृह, नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति, उद्योग, हाईवे, स्वास्थ्य, ऊर्जा और लोक निर्माण विभाग शामिल हैं। इसके साथ ही विजिलेंस आयोग की निगरानी भी उनके पास रहेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब विजय सरकार अपने शुरुआती कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहती है।
सामाजिक विकास की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री की सचिव-2 जी. लक्ष्मी प्रिया को सामाजिक विकास और कल्याण से जुड़े विभागों का प्रभार दिया गया है। उनके अधीन स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, ग्रामीण विकास, आवास, समाज कल्याण और महिला सशक्तिकरण विभाग रहेंगे। इसके अतिरिक्त, सीएमओ में नियुक्तियों, प्रोटोकॉल और प्रशासनिक कार्यों की देखरेख भी उनकी जिम्मेदारी होगी।
कृषि एवं कानूनी प्रशासन
मुख्यमंत्री के सचिव-3 ए. अन्नादुरई को जल संसाधन, कृषि, परिवहन, सहकारिता और कानून विभाग सौंपे गए हैं। ये विभाग सीधे तौर पर किसानों, संसाधन प्रबंधन और कानूनी प्रशासन से जुड़े हैं, जो ग्रामीण तमिलनाडु की रीढ़ माने जाते हैं।
डिजिटल और युवा विकास
अतिरिक्त सचिव वी. विष्णु को भविष्योन्मुखी और विकास-केंद्रित विभाग आवंटित किए गए हैं। उनके पास सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सेवाएँ, एमएसएमई, पर्यटन, कौशल विकास, युवा कल्याण और खेल विकास विभाग रहेंगे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फेरबदल विजय सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत मुख्यमंत्री कार्यालय को विभिन्न विभागों का प्रत्यक्ष संपर्क-केंद्र बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि नई सरकारें अक्सर शुरुआती महीनों में इस तरह के प्रशासनिक पुनर्गठन के जरिए नीतिगत प्राथमिकताएँ स्थापित करती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इससे शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी, तीव्र और परिणाम-आधारित बन सकती है।